
14 और 15 अक्टूबर को तिलक नगर में गरबा महोत्सव ; पहले दिन महिलाओं के लिए विशेष आयोजन, दूसरे दिन महिला-पुरुष और बच्चे भी लेंगे हिस्सा..

बिलासपुर। नवरात्रि में गरबा केवल नृत्य नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सामूहिक उत्साह का प्रतीक भी है। इसी भावना के साथ सर्व यादव समाज महिला प्रकोष्ठ पहली बार बिलासपुर में दो दिवसीय गरबा महोत्सव आयोजित करने जा रहा है। 14 और 15 अक्टूबर को तिलक नगर स्थित पुत्रीशाला सामुदायिक भवन में होने वाले इस आयोजन में यादव समाज की महिलाएं, युवतियां और बच्चे गरबा के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। खास बात यह है कि पहले दिन छत्तीसगढ़ी वेशभूषा में गरबा होगा, जबकि दूसरे दिन पारंपरिक गुजराती परिधान में नृत्य की प्रस्तुति दी जाएगी। आयोजन में शहर के साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।
सर्व यादव समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष विष्णु यादव ने बताया कि महिला प्रकोष्ठ जिला एवं नगर इकाई के संयुक्त तत्वावधान में पहली बार इस तरह का आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य समाज की महिलाओं और युवतियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए मंच उपलब्ध कराना तथा आपसी मेलजोल और सांस्कृतिक परंपराओं को बढ़ावा देना है। समाज की महिलाओं में आयोजन को लेकर उत्साह है। तैयारियों के तहत तिलक नगर स्थित सामुदायिक भवन में गरबा का अभ्यास भी किया जा रहा है।
पहले दिन छत्तीसगढ़ी, दूसरे दिन गुजराती वेशभूषा..
आयोजन की खासियत दोनों दिनों की अलग-अलग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी। 14 अक्टूबर को केवल महिलाओं के लिए गरबा कार्यक्रम रखा गया है। इस दिन महिलाएं छत्तीसगढ़ी वेशभूषा में माता रानी की पूजा-अर्चना के बाद गरबा करेंगी। इसके जरिए प्रदेश की पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक पहचान को गरबा के साथ जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
15 अक्टूबर को कार्यक्रम में महिलाओं के साथ पुरुष, युवतियां और बच्चे भी शामिल होंगे। इस दिन प्रतिभागी पारंपरिक गुजराती वेशभूषा में गरबा प्रस्तुत करेंगे। आयोजकों के अनुसार, दोनों दिनों के कार्यक्रमों में संगीत, नृत्य और पारंपरिक परिधानों के माध्यम से नवरात्रि का उत्साह देखने को मिलेगा। कार्यक्रम में रायपुर के कलाकारों, गायकों और बैंड की प्रस्तुतियां भी प्रस्तावित हैं।
बेहतर प्रदर्शन करने वालों को मिलेगा सम्मान..
गरबा महोत्सव में प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाने के लिए विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार और सम्मान की व्यवस्था की गई है। इसमें बेस्ट डांसर, बेस्ट ग्रुप डांस, गरबा किंग, गरबा क्वीन, पारंपरिक वेशभूषा और बच्चों के नृत्य जैसी श्रेणियां शामिल रहेंगी। सीनियर वर्ग की महिलाओं को भी उनके प्रदर्शन के आधार पर सम्मानित किया जाएगा।
महिला प्रकोष्ठ की जिला अध्यक्ष गीता यादव और नगर अध्यक्ष पुष्पा यादव ने बताया कि आयोजन में समाज की महिलाओं को आगे आने और अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। उनकी कोशिश है कि इस पहल को हर साल आयोजित किया जाए, ताकि महिलाओं और बच्चों को सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने के लिए नियमित मंच मिल सके।
भगवान कृष्ण की रास परंपरा से भी जोड़ रहे आयोजन..
आयोजक यादव समाज की सांस्कृतिक परंपराओं और भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला का उल्लेख करते हुए गरबा को आस्था और सामूहिक नृत्य से जुड़ा आयोजन मानते हैं। उनका कहना है कि नवरात्रि में माता की आराधना के साथ गरबा के माध्यम से समाज की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। आयोजन में अनुशासन, पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक मूल्यों का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
शाम 7 से रात 11 बजे तक कार्यक्रम..
दोनों दिन गरबा महोत्सव शाम 7 बजे से रात 11 बजे तक आयोजित होगा। आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि इसमें शामिल होने के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। समाज की महिलाओं, युवतियों, बच्चों और परिवारों से अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील की गई है।
आयोजन में 14 अक्टूबर को विधायक अमर अग्रवाल, विधायक धर्मजीत सिंह और विधायक सुशांत शुक्ला के शामिल होने की जानकारी दी गई है। वहीं, 15 अक्टूबर को केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू के कार्यक्रम में शामिल होने का कार्यक्रम बताया गया है।
गरबा महोत्सव की तैयारियों को लेकर हुई बैठक में सर्व यादव समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष विष्णु यादव सहित जसवंत यादव, धनु यादव, बुधराम यादव, दुर्गेश यदु, मंजीत यादव, सतीश यादव, शिवचरण यादव, रामचंद्र यादव, विजय यादव, संतोष यादव, लक्ष्मी यादव, अभिमन्यु यादव, नंदकिशोर यादव, कृष्ण कुमार यादव, रमेश यादव, ओमकार यादव, समीर यादव, दीपक यादव, विक्की यादव, मनोज यादव, आशीष यादव, अनिल यादव, सीमा यादव, सरिता यादव, अंजली यादव और मंजू यादव सहित समाज के अनेक सदस्य उपस्थित रहे।
महिला प्रकोष्ठ की पदाधिकारियों ने कहा कि यह आयोजन केवल गरबा तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, नई पीढ़ी को परंपराओं से जोड़ने और समाज में सांस्कृतिक एकजुटता को मजबूत करने की दिशा में एक पहल है।







