बाघों के कॉरिडोर की सुरक्षा में ग्रामीण बनेंगे भागीदार..

आमाडोब में वन्यप्राणी सप्ताह के तहत जागरूकता कार्यक्रम, झुमरी की कहानी से समझाया बाघों के सुरक्षित आवास का महत्व ; छह गांवों के ग्रामीण और स्कूली बच्चे हुए शामिल..

बिलासपुर। अचानकमार टाइगर रिजर्व के केंवची बफर क्षेत्र में बाघों की नियमित आवाजाही वाले कॉरिडोर की सुरक्षा को लेकर वन विभाग ने ग्रामीणों को वन्यजीव संरक्षण से जोड़ने की पहल की है। वन्यप्राणी सप्ताह के तहत सोमवार को ग्राम आमाडोब में आयोजित जनजागरूकता कार्यक्रम में आसपास के छह गांवों के ग्रामीणों, स्व सहायता समूहों और स्कूली विद्यार्थियों को वन्यजीवों के सुरक्षित आवास, बाघ कॉरिडोर और मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व की जानकारी दी गई।

इस कार्यक्रम का मुख्य संदेश यह रहा कि जंगल और वन्यजीवों के आवास आपस में जुड़े रहेंगे, तभी बाघ समेत अन्य वन्यप्राणियों का सुरक्षित विचरण और संरक्षण संभव होगा। इस वर्ष वन्यप्राणी सप्ताह की थीम ‘Habitats. Thriving Wildlife’ यानी ‘जुड़े आवास, समृद्ध वन्यजीवन’ रखी गई है।

बाघों की आवाजाही वाला क्षेत्र है केंवची बफर..

वन विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों को बताया कि केंवची बफर क्षेत्र बाघों के आवागमन वाले महत्वपूर्ण कॉरिडोर में शामिल है। यहां वन्यप्राणियों की उपस्थिति नियमित रूप से दर्ज होती रहती है। ऐसे में जंगल और उसके आसपास के क्षेत्रों में वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए स्थानीय समुदाय की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) एवं क्षेत्र संचालक प्रियंका पाण्डेय ने ग्रामीणों को बाघ कॉरिडोर और उसके महत्व की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वन्यप्राणियों के लिए सुरक्षित और जुड़े हुए आवास बनाए रखना संरक्षण की महत्वपूर्ण कड़ी है।

‘झुमरी’ की कहानी ने समझाया संरक्षण का मतलब..

कार्यक्रम में बांधवगढ़ से अचानकमार टाइगर रिजर्व लाई गई बाघिन झुमरी की कहानी पर आधारित फिल्म भी ग्रामीणों और विद्यार्थियों को दिखाई गई। फिल्म के माध्यम से बाघों के संरक्षण, उनके आवास और सुरक्षित आवागमन से जुड़े विषयों को सरल तरीके से समझाया गया।

वन विभाग का उद्देश्य ग्रामीणों को यह बताना था कि बाघ और अन्य वन्यजीव केवल जंगल की संपदा नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनके संरक्षण में स्थानीय लोगों की सहभागिता बेहद जरूरी है।

हाथी विशेषज्ञ ने बताए बचाव के उपाय..

कार्यक्रम में हाथी विशेषज्ञ मंसूर खान ने मानव-हाथी संघर्ष की स्थिति में बरती जाने वाली सावधानियों और सुरक्षा उपायों की जानकारी दी। वहीं WWF के सीनियर प्रोजेक्ट ऑफिसर उपेन्द्र दुबे ने वन्यप्राणियों की मॉनिटरिंग और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर जानकारी साझा की।

उप संचालक दिनेश कुमार पटेल ने ग्रामीणों को वन एवं वन्यप्राणियों के महत्व के साथ ही जंगलों की सुरक्षा में समुदाय की भूमिका के बारे में विस्तार से बताया।

छह गांवों के ग्रामीण और बच्चे जुटे..

आमाडोब में आयोजित कार्यक्रम में आमाडोब, पटपरी, केंवची, बानघाट, रंजकी और छोटकीरवार गांवों के ग्रामीण शामिल हुए। इसके अलावा केंवची स्व सहायता समूह के सदस्य और आमाडोब स्कूल के छात्र-छात्राओं ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

वन्यप्राणी सप्ताह की थीम पर स्कूली विद्यार्थियों के लिए निबंध और चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को मुख्य वन संरक्षक प्रियंका पाण्डेय ने सम्मानित किया।

संरक्षण में ग्रामीणों की भागीदारी पर जोर..

वन विभाग का मानना है कि बाघ कॉरिडोर से लगे गांवों में जागरूकता बढ़ने से वन्यप्राणियों की सुरक्षा और संरक्षण के प्रयासों को मजबूती मिलेगी। ग्रामीणों को वन्यप्राणियों की मौजूदगी की सूचना समय पर वन अमले तक पहुंचाने, जंगलों की सुरक्षा में सहयोग करने और मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति में सावधानी बरतने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र संचालक प्रियंका पाण्डेय, उप संचालक दिनेश कुमार पटेल, हाथी विशेषज्ञ मंसूर खान, WWF के सीनियर प्रोजेक्ट ऑफिसर उपेन्द्र दुबे,वन्यप्राणी विशेषज्ञ अनुराग शुक्ला, ग्राम पंचायत आमाडोब की सरपंच सुरंजना आयाम सहित कोर एवं बफर क्षेत्र के वन अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।

वन विभाग के अनुसार अचानकमार टाइगर रिजर्व में 2 से 8 अक्टूबर तक वन्यप्राणी सप्ताह मनाया जा रहा है। सप्ताह के दौरान वन्यजीव संरक्षण, आवासों की सुरक्षा और स्थानीय समुदाय की भागीदारी को लेकर विभिन्न जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।