
परिजनों की शिकायत पर DEO को नोटिस, 22 अक्टूबर तक मांगी गई जांच रिपोर्ट; शारीरिक दंड के आरोपों की होगी पड़ताल..

बिलासपुर। कोटा क्षेत्र के मुसियारी प्राथमिक शाला में एक छात्रा के साथ कथित मारपीट और शारीरिक दंड दिए जाने की शिकायत को राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने गंभीरता से लिया है। छात्रा के परिजनों की शिकायत के बाद आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए बिलासपुर के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को नोटिस जारी किया है। आयोग ने शिक्षा विभाग को पूरे मामले की विस्तृत जांच कर निर्धारित समय-सीमा में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

परिजनों की शिकायत में स्कूल के एक शिक्षक पर छात्रा के साथ कथित तौर पर मारपीट करने और उसे शारीरिक दंड देने का आरोप लगाया गया है। शिकायत सामने आने के बाद मामला बाल अधिकारों से जुड़ा होने के कारण अब आयोग के स्तर तक पहुंच गया है। आयोग ने शिक्षा विभाग से घटना के वास्तविक तथ्यों की जांच कराने के साथ ही शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
22 अक्टूबर तक देनी होगी रिपोर्ट..
राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने जिला शिक्षा अधिकारी को मामले की विस्तृत जांच कर 22 अक्टूबर तक आयोग कार्यालय में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। जांच रिपोर्ट में घटना से संबंधित तथ्यों, शिकायत की स्थिति, स्कूल स्तर पर हुई कार्रवाई तथा संबंधित पक्षों से प्राप्त जानकारी को शामिल करने को कहा गया है।

आयोग के निर्देश के बाद शिक्षा विभाग के सामने अब पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर तथ्य सामने रखने की जिम्मेदारी है। जांच के दौरान छात्रा, उसके परिजनों, संबंधित शिक्षक और स्कूल प्रबंधन से जुड़े पक्षों से जानकारी लिए जाने की संभावना है।
जांच के बाद ही साफ होगी आरोपों की स्थिति..
मामले में फिलहाल छात्रा के परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों की ही जानकारी सामने आई है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। शिक्षा विभाग की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि स्कूल में घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ था और शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

बाल अधिकारों से जुड़े मामलों में बच्चों के साथ शारीरिक दंड को लेकर पहले से ही संवेदनशीलता बरतने के निर्देश दिए जाते रहे हैं। ऐसे में आयोग द्वारा मामले का संज्ञान लिए जाने से स्कूलों में बच्चों के प्रति व्यवहार और अनुशासन के तरीकों को लेकर भी सवाल उठे हैं। अब सभी की नजर शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट पर है। रिपोर्ट के आधार पर ही मामले में आगे की कार्रवाई की दिशा तय होगी।







