बिल्हा की कृति अग्रवाल ने रचा इतिहास, गीता पाठ के विश्व रिकॉर्ड में दर्ज कराया नाम..

8277 लोगों के साथ ऑनलाइन श्रीमद्भगवद्गीता पाठ में सहभागिता, गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड ने दिया आधिकारिक प्रमाण पत्र; सुपुत्र दिव्य अग्रवाल को भी मिली उपलब्धि..

बिलासपुर। प्रतिभा, अनुशासन और आध्यात्मिक समर्पण के दम पर बिल्हा की कृति अग्रवाल ने ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिसने न केवल बिल्हा बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है। श्रीमद्भगवद्गीता के सामूहिक ऑनलाइन पाठ में सहभागिता कर कृति अग्रवाल ने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया है। उनकी इस उपलब्धि को लेकर क्षेत्र में खुशी और उत्साह का माहौल है।

चिन्मय मिशन द्वारा 9 मई को ऑनलाइन श्रीमद्भगवद्गीता पाठ का आयोजन किया गया था। इस आयोजन में देश-दुनिया से बड़ी संख्या में लोगों ने एक साथ गीता का पाठ किया। आयोजकों के अनुसार, इस ऑनलाइन आयोजन में 8277 लोगों ने एक साथ गीता पाठ में सहभागिता की। इसी उपलब्धि को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड की ओर से आधिकारिक प्रमाण पत्र प्रदान किया गया है।

कृति अग्रवाल की यह उपलब्धि उनके लिए केवल एक विश्व रिकॉर्ड नहीं, बल्कि लंबे समय से किए जा रहे आध्यात्मिक अध्ययन, अनुशासन और सेवा भावना का परिणाम है। गीता के प्रति उनकी गहरी रुचि और नियमित जुड़ाव ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है। कृति लंबे समय से गीता परिवार से जुड़कर विभिन्न जिम्मेदारियां निभा रही हैं।

गीता परिवार में निभा रहीं कई जिम्मेदारियां..

कृति अग्रवाल गीता परिवार की ऑनलाइन संस्था वर्ग एवं ऑफलाइन गतिविधियों में सक्रिय रूप से सेवाएं दे रही हैं। वे तकनीकी सहायक, ग्रुप समन्वयक, एडिटिंग, कॉलिंग, मॉनिटरिंग, मेंटर और साधक मित्र जैसी विभिन्न जिम्मेदारियां निभा चुकी हैं। गीता के प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका के कारण उन्हें ‘स्टार गीता प्रचारक’ के रूप में भी पहचान मिली है।

वर्तमान में कृति अग्रवाल गीता परिवार बिलासपुर की सचिव के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं। उनका कहना है कि गीता का अध्ययन केवल धार्मिक पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन को बेहतर ढंग से समझने और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

मां के साथ बेटे ने भी हासिल की उपलब्धि..

कृति अग्रवाल की इस सफलता की खास बात यह भी है कि उनके सुपुत्र दिव्य अग्रवाल ने भी इस उपलब्धि में अपनी सहभागिता दर्ज कराई है। दिव्य भी गीता परिवार से जुड़े हुए हैं और गीता संस्था वर्ग में साधक के साथ-साथ ‘बाल सखा’ के रूप में अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

मां-बेटे की इस उपलब्धि ने परिवार के साथ-साथ गीता परिवार से जुड़े लोगों में भी खुशी की लहर पैदा कर दी है। कृति और दिव्य की सफलता को एक ऐसी मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें परिवार की अगली पीढ़ी भी भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक शिक्षा और श्रीमद्भगवद्गीता से जुड़कर आगे बढ़ रही है।

बिल्हा से विश्व मंच तक पहुंचा नाम..

कृति अग्रवाल की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि बिल्हा जैसे क्षेत्र से निकलकर उन्होंने वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज होना उनके व्यक्तिगत प्रयासों के साथ-साथ बिल्हा और छत्तीसगढ़ के लिए भी गौरव का विषय है।

छत्तीसगढ़ गीता परिवार और बिलासपुर गीता परिवार ने कृति अग्रवाल और दिव्य अग्रवाल की इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी है। परिवार, परिचितों और गीता परिवार से जुड़े सदस्यों ने कहा कि कृति और दिव्य की सफलता युवाओं और समाज के लिए प्रेरणादायी है।

आध्यात्मिकता के साथ सेवा का भी संदेश..

कृति अग्रवाल की कहानी केवल रिकॉर्ड बनाने तक सीमित नहीं है। उन्होंने गीता से जुड़कर अध्ययन के साथ-साथ संगठनात्मक और सामाजिक सेवा को भी अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया। अलग-अलग जिम्मेदारियों के माध्यम से वे लोगों को गीता से जोड़ने और उसके संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का काम कर रही हैं।

उनकी यह उपलब्धि इस बात का उदाहरण है कि समर्पण, निरंतर प्रयास और अपनी संस्कृति से जुड़ाव के जरिए स्थानीय स्तर की प्रतिभा भी विश्व पटल पर अपनी मजबूत पहचान बना सकती है। कृति और दिव्य की सफलता से बिल्हा सहित पूरे छत्तीसगढ़ में गर्व और उत्साह का माहौल है।