रिश्तों की आड़ में नाबालिग बेटी का शोषण, नवजात को देने की साजिश का आरोप ; पिता-बुआ समेत 6 गिरफ्तार..

रायपुर में चौंकाने वाला मामला: गर्भवती होने पर कराया गर्भपात, दूसरी बार प्रसव के बाद नवजात को दूसरे लोगों को सौंपने का आरोप; पुलिस ने पॉक्सो समेत कई धाराओं में शुरू की जांच..

रायपुर। राजधानी रायपुर के न्यू राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र से रिश्तों को शर्मसार करने वाला बेहद गंभीर मामला सामने आया है। एक नाबालिग लड़की ने अपने ही पिता पर लंबे समय तक यौन शोषण करने का आरोप लगाया है। पुलिस के मुताबिक, पीड़िता के गर्भवती होने के बाद उसका गर्भपात कराया गया और दूसरी बार गर्भवती होने पर उसकी वास्तविक उम्र और वैवाहिक स्थिति छिपाकर अस्पताल में प्रसव कराया गया। प्रसव के बाद नवजात को कथित तौर पर दूसरे लोगों को सौंपे जाने और इसके बदले रकम के लेनदेन की बात भी सामने आई है।

मामले में पुलिस ने पीड़िता के पिता और बुआ सहित कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में अस्पताल से जुड़े लोगों के अलावा दो दंपती भी शामिल हैं। पुलिस अब पूरे मामले में यह पता लगाने में जुटी है कि नवजात को किन परिस्थितियों में किसे सौंपा गया और कथित लेनदेन में कौन-कौन लोग शामिल थे।

2023 से शोषण का आरोप, धमकी के कारण चुप रही पीड़िता..

पुलिस को दी शिकायत में पीड़िता ने बताया कि वर्ष 2023 में अमलीडीह स्थित एक रिश्तेदार के घर पर उसके पिता ने उसे धमकी देकर उसका शोषण किया। आरोप है कि इसके बाद भी वह लंबे समय तक उसका शोषण करता रहा। डर और धमकी के कारण पीड़िता ने इस बारे में किसी को जानकारी नहीं दी।

बाद में जब पीड़िता गर्भवती हुई तो उसने अपनी बुआ को इसकी जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, बुआ ने यह बात उसके पिता को बताई। इसके बाद कथित तौर पर पिता गर्भपात की दवा लेकर आया और पीड़िता को दवा खिलाई गई। पुलिस के मुताबिक, इस दौरान उसके साथ मारपीट भी की गई, जिसके बाद गर्भपात हो गया।

दूसरी बार गर्भवती होने पर बदली गई पहचान की जानकारी..

पुलिस के मुताबिक, कुछ समय बाद पीड़िता के साथ फिर से दुष्कर्म हुआ और वर्ष 2025 में वह दोबारा गर्भवती हो गई। इसके बाद उसे कथित तौर पर अलग-अलग स्थानों पर रखा गया। पहले उसे वर्षा मंडल के घर ले जाया गया और बाद में गीता राय के घर भेज दिया गया, जहां वह करीब दो महीने तक रही।

आरोप है कि इसी दौरान उसकी वास्तविक उम्र और वैवाहिक स्थिति छिपाने की तैयारी की गई। पुलिस के अनुसार, अस्पताल में भर्ती कराते समय पीड़िता को बालिग और शादीशुदा बताया गया, जबकि वह नाबालिग थी।

अस्पताल में कराया प्रसव, दस्तावेजों पर भी कराए हस्ताक्षर..

पुलिस जांच के अनुसार, पीड़िता को डंगनिया स्थित वासुदेव अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां ऑपरेशन के जरिए उसने एक बेटे को जन्म दिया। पुलिस अब अस्पताल में भर्ती से लेकर प्रसव और बाद की पूरी प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।

पुलिस का आरोप है कि प्रसव के बाद नवजात को पीड़िता से अलग कर दूसरे लोगों को सौंप दिया गया। इस प्रक्रिया में पीड़िता से कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी कराए गए। पुलिस के मुताबिक, डर और दबाव के कारण उसने उन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। प्रसव के बाद पीड़िता को करीब 15 दिन तक गीता राय के घर में रखा गया। इसके बाद उसका पिता उसे अपने घर ले गया।

नवजात को कथित तौर पर 1.50 लाख रुपये में देने की जांच..

मामले का सबसे गंभीर पहलू नवजात को कथित तौर पर करीब 1.50 लाख रुपये में दूसरे लोगों को सौंपे जाने से जुड़ा है। पुलिस इस कथित लेनदेन की भी जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि नवजात को किसके माध्यम से किसे सौंपा गया और इसमें अस्पताल अथवा अन्य लोगों की क्या भूमिका थी।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले में सामने आए प्रत्येक तथ्य की जांच की जा रही है और दस्तावेजों, अस्पताल रिकॉर्ड तथा संबंधित लोगों से पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पिता-बुआ समेत छह गिरफ्तार..

पीड़िता की शिकायत के आधार पर न्यू राजेंद्र नगर पुलिस ने दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट, किशोर न्याय अधिनियम समेत विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया है। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार आरोपियों में पीड़िता का पिता, उसकी बुआ, रोहित कुमार राय (35), साहेब मंडल (42), योगिता राय उर्फ गीता राय (32) और बरखा वर्मा उर्फ वर्षा मंडल (34) शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, सभी आरोपियों से पूछताछ कर मामले की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।

अब पुलिस के सामने कई बड़े सवाल..

इस मामले में पुलिस की जांच सिर्फ नाबालिग के शोषण तक सीमित नहीं है। नवजात के जन्म के बाद उसे दूसरे लोगों को सौंपे जाने की प्रक्रिया, कथित रकम का लेनदेन, अस्पताल में दर्ज दस्तावेजों में पीड़िता की उम्र और वैवाहिक स्थिति से जुड़ी जानकारी तथा इसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

पुलिस अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि नाबालिग की पहचान और उम्र से संबंधित जानकारी कैसे छिपाई गई और अस्पताल में भर्ती के दौरान किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। मामले की जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

नोट: नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाली कोई जानकारी प्रकाशित नहीं की गई है।