कोरबा/कटघोरा। विश्व हाथी दिवस पर कटघोरा वनमंडल में हाथी-मानव द्वंद्व को कम करने की दिशा में एक नई पहल की गई। एतमानगर वन परिक्षेत्र के बुका जलविहार में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम के दौरान नवपदस्थ डीएफओ जितेंद्र कुमार उपाध्याय ने हाथी प्रभावित ग्राम मड़ई को गोद लेने की घोषणा की। उन्होंने वन विभाग की नवपदस्थ एसडीओ मृगला जालिन्दर यादव को गांव की जिम्मेदारी सौंपते हुए हाथियों और अन्य वन्यजीवों से होने वाले नुकसान को कम करने के साथ ग्रामीणों की मूलभूत समस्याओं के समाधान के लिए भी लगातार काम करने के निर्देश दिए।

डीएफओ ने कहा कि गांव को एक बच्चे की तरह विकसित करने और उसकी जरूरतों पर लगातार नजर रखने की आवश्यकता है। विश्व हाथी दिवस पर हाथी प्रभावित गांव को गोद लेने की इस पहल से ग्रामीणों में उम्मीद जगी है कि अब हाथी-मानव संघर्ष से जुड़ी समस्याओं के साथ-साथ गांव की अन्य जरूरतों पर भी वन विभाग गंभीरता से काम करेगा।
200 गांव हाथी प्रभावित, 50 से अधिक हाथियों का दल कर रहा विचरण..
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीएफओ जितेंद्र कुमार उपाध्याय ने बताया कि वर्तमान में कटघोरा वनमंडल क्षेत्र में 50 से अधिक हाथियों का दल विचरण कर रहा है। कटघोरा क्षेत्र में प्राचीन समय से ही हाथियों की मौजूदगी रही है, लेकिन पिछले करीब 15 वर्षों में हाथियों के विचरण और आवागमन का दायरा लगातार बढ़ा है। वर्तमान में वनमंडल के करीब 200 गांव हाथी प्रभावित हैं।
उन्होंने कहा कि इतने बड़े क्षेत्र में हाथियों की लगातार मौजूदगी के बीच वन विभाग के सामने दोहरी जिम्मेदारी है। एक ओर हाथियों और उनके प्राकृतिक आवास का संरक्षण करना है, तो दूसरी ओर हाथी प्रभावित गांवों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी है। इसी उद्देश्य से ग्रामीणों को हाथियों के व्यवहार और उनकी गतिविधियों के बारे में लगातार जागरूक किया जा रहा है।
जागरूकता बढ़ने से कम हो रहा संघर्ष..
डीएफओ ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और जागरूकता बढ़ने से लोगों में हाथियों के व्यवहार को समझने की क्षमता भी बढ़ी है। हाथियों के विचरण क्षेत्र, उनकी गतिविधियों और खतरे की परिस्थितियों को समझकर ग्रामीण समय रहते सावधानी बरत रहे हैं। इससे मानव-हाथी द्वंद्व को कम करने में मदद मिल रही है।

उन्होंने कहा कि हाथियों का संरक्षण जरूरी है, लेकिन हाथी प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा भी सर्वोच्च प्राथमिकता है। लगातार हाथियों के विचरण के बीच ग्रामीण किस तरह स्वयं और अपने परिवार को सुरक्षित रखें, इसी उद्देश्य से वन विभाग द्वारा ऐसे जागरूकता कार्यक्रम और कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं।
ग्रामीणों को बताया – हाथी दिखे तो बरतें सावधानी..
बुका जलविहार में आयोजित परिचर्चा के दौरान ग्रामीणों को हाथियों के व्यवहार, उनके विचरण क्षेत्र और हाथियों की मौजूदगी के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी दी गई। वन विभाग के अधिकारियों ने मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं को रोकने के लिए ग्रामीणों को व्यावहारिक उपाय बताए।
कार्यक्रम में हाथी प्रभावित गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीणों के साथ क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि, स्कूली बच्चे, हाथी मित्र दल के सदस्य और वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए। एतमानगर, केंदई, जड़गा और पसान वन परिक्षेत्रों का वन अमला तथा हाथी मित्र दल भी कार्यक्रम में मौजूद रहा।
ग्रामीणों ने बताई फसल नुकसान और भय की समस्या..
जनपद पंचायत पोंडी उपरोड़ा की अध्यक्ष माधुरी देवी सिंह ने हाथियों की बढ़ती संख्या और गांवों की ओर उनके लगातार बढ़ते आवागमन को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हाथियों की मौजूदगी के कारण कई गांवों में भय का माहौल बना रहता है। कई बार हाथी खेतों में पहुंचकर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे ग्रामीणों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है।
उन्होंने वन विभाग की सतत निगरानी और ग्रामीणों को जागरूक करने के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि हाथी प्रभावित गांवों में वन विभाग और ग्रामीणों के बीच बेहतर समन्वय से ही मानव-हाथी संघर्ष को प्रभावी तरीके से कम किया जा सकता है।
वन विभाग और ग्रामीणों के बीच समन्वय पर जोर..
विश्व हाथी दिवस के कार्यक्रम में अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि हाथियों के संरक्षण और ग्रामीणों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। इसके लिए वन विभाग के मैदानी अमले और हाथी मित्र दल को ग्रामीणों के साथ लगातार संपर्क में रहने तथा हाथियों की गतिविधियों की जानकारी समय पर साझा करने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम में वन विभाग की नवपदस्थ एसडीओ मृगला जालिन्दर यादव, एतमानगर रेंजर प्रतिभा खुटे, केंदई रेंजर अभिषेक दुबे, पसान रेंजर मनीष सिंह, जड़गा रेंजर, कटघोरा रेंजर, डिप्टी रेंजर सुनील डिक्सेना, प्रीतम पुराइन सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। पोंडी उपरोड़ा जनपद सदस्य माधुरी देवी मरकाम, मड़ई सरपंच बरतू टोप्पो, बंजारी सरपंच राजकुमारी, बनिया सरपंच, चोटिया एवं लमना सरपंच सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने कार्यक्रम में सहभागिता की।
विश्व हाथी दिवस पर मड़ई गांव को गोद लेने की पहल को ग्रामीणों ने महत्वपूर्ण कदम बताया। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इससे हाथियों से होने वाले नुकसान की रोकथाम के साथ गांव की अन्य बुनियादी जरूरतों पर भी वन विभाग का ध्यान बढ़ेगा।







