विश्व हाथी दिवस पर अचानकमार टाइगर रिजर्व में गूंजा संरक्षण का संदेश, कुमकी हाथियों की पूजा कर ग्रामीणों को बताए मानव-हाथी संघर्ष से बचाव के उपाय..

बिलासपुर। विश्व हाथी दिवस के अवसर पर बुधवार को अचानकमार टाइगर रिजर्व में हाथियों के संरक्षण और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने का संदेश दिया गया। अचानकमार परिक्षेत्र के सिहावल हाथी कैंप में रखे गए कुमकी हाथियों की विधिवत पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इस दौरान वन विभाग के अधिकारियों, मैदानी अमले, वन्यजीव विशेषज्ञों और स्थानीय ग्रामीणों ने हाथियों के प्रति संवेदनशीलता और उनके संरक्षण का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हाथियों के संरक्षण के साथ-साथ जंगल से लगे गांवों में रहने वाले लोगों को मानव-हाथी संघर्ष से बचाव के प्रति जागरूक करना रहा। अधिकारियों ने ग्रामीणों को बताया कि हाथियों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। हाथियों के करीब जाने, उन्हें परेशान करने या उनके रास्ते में बाधा डालने से बचना चाहिए। किसी भी तरह की हाथी गतिविधि की जानकारी तत्काल वन विभाग को देने की अपील भी की गई।

कुमकी हाथियों की अहम भूमिका..

सिहावल हाथी कैंप में रखे गए कुमकी हाथी वन विभाग के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जंगल में जंगली हाथियों की निगरानी, उन्हें नियंत्रित करने और मानव-हाथी संघर्ष की परिस्थितियों में वन अमले की मदद करने में प्रशिक्षित कुमकी हाथियों का उपयोग किया जाता है। विश्व हाथी दिवस पर इन हाथियों की पूजा कर उनके महत्व को भी रेखांकित किया गया।

कार्यक्रम में अचानकमार टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक प्रियंका पांडेय, उप संचालक एवं सहायक संचालक सहित सभी परिक्षेत्रों के परिक्षेत्र अधिकारी मौजूद रहे। कानन पेंडारी जू के पशु चिकित्सक, स्थानीय मैदानी वन अमला, WWF की टीम, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।

ग्रामीणों को बताया – सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव..

कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को मानव-हाथी द्वंद्व से बचने के लिए जरूरी सावधानियों की जानकारी दी गई। वन विभाग ने समझाया कि हाथियों की गतिविधियों वाले क्षेत्रों में अकेले जाने से बचें और हाथी दिखाई देने पर उसके करीब जाने या उसे भगाने का प्रयास न करें। साथ ही ग्रामीणों से जंगल और हाथियों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने में वन विभाग का सहयोग करने की अपील की गई।

अधिकारियों ने कहा कि हाथी हमारे वन पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनके संरक्षण के साथ स्थानीय लोगों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। जागरूकता, सतर्कता और वन विभाग तथा ग्रामीणों के बीच बेहतर समन्वय से मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं को कम किया जा सकता है।