शिक्षा के मंदिर में पढ़ाई की जगह बच्चों के हाथों में थमा दी झाड़ू : बेलगहना के बैगापारा का मामला ; चपरासी के गायब रहने पर विद्यार्थियों से कराई जा रही सफाई,बीईओ ने साधी चुप्पी..

बिलासपुर। जिले की शिक्षा व्यवस्था और स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली की पोल खोलने वाला एक मामला सामने आया है। बेलगहना स्थित शासकीय प्राथमिक शाला बैगापारा में विद्यार्थियों से स्कूल की सफाई करवाए जाने का मामला प्रकाश में आया है। आरोप है कि जब स्कूल में चपरासी नहीं आता, तो उसकी भरपाई मासूम बच्चों से करवाई जाती है। नौनिहालों के हाथों में किताबें होने की बजाय उन्हें झाड़ू थमा दी गई और उनसे कक्षाओं के साथ-साथ पूरे परिसर की सफाई कराई गई। इस वाकये ने प्रशासनिक दावों पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

नियमित रूप से करवाया जाता है यह काम..

स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों ने खुद इस व्यवस्था की हकीकत बयां की हैं। विद्यार्थियों ने बताया कि जब भी सफाई कर्मचारी अनुपस्थित रहता है, तब उनसे नियमित रूप से स्कूल की सफाई करवाई जाती है। बच्चों के अनुसार, सुबह जब वे स्कूल पहुंचते हैं, तो पढ़ाई शुरू होने से पहले ही उन्हें झाड़ू लगाने के लिए कह दिया जाता है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि जब स्कूलों में सफाई व्यवस्था के लिए कर्मचारी नियुक्त किए गए हैं, तो फिर यह कार्य बच्चों से क्यों कराया जा रहा है?

अभिभावकों में आक्रोश, कार्रवाई की मांग..

स्कूली बच्चों द्वारा झाड़ू लगाने की घटना की जानकारी जैसे ही सामने आई, अभिभावकों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को स्कूल शिक्षा प्राप्त करने के लिए भेजते हैं। ऐसे में बच्चों को शिक्षा देने के बजाय उनसे सफाई का काम कराना पूरी तरह से अनुचित और गलत है। गुस्साए परिजनों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा है कि जो भी अधिकारी और कर्मचारी इस कृत्य के लिए जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

जिम्मेदार अधिकारी ने नहीं उठाया फोन..

इस मामले में शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों का रवैया भी सवालों के घेरे में है। घटना को लेकर जब विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) गोपाल दुबे से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन रिसीव करना ही मुनासिब नहीं समझा। अधिकारी की यह चुप्पी व्यवस्था की लापरवाही को और उजागर करती है।