बिलासपुर में ठगी : खुद को बताया ईडी का अफसर, सिम्स में कैंटीन ठेका और नौकरी के नाम पर लाखों की धोखाधड़ी..

बिलासपुर शहर में जालसाजी का एक और मामला सामने आया है। यहां एक व्यक्ति ने खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का प्रभावशाली अफसर बताकर एक परिवार को पूरी तरह अपने झांसे में ले लिया। आरोपी ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर सिम्स अस्पताल में कैंटीन का ठेका दिलाने का लालच दिया। इसके साथ ही उसने ईडी विभाग में ही सरकारी नौकरी लगवाने का भरोसा भी दिया। इस बहाने उसने पीड़ित परिवार से कुल 6 लाख 82 हजार रुपए ठग लिए। काफी वक्त बीत जाने पर जब न नौकरी मिली और न ठेका मिला, तब पीड़ित ने अपने पैसे वापस मांगे। कोतवाली पुलिस ने शनिवार को इस मामले में पति-पत्नी पर धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कर ली है और आगे की कार्रवाई में जुट गई है।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, टिकरापारा के रेलवे महाराष्ट्र मंडल इलाके में रहने वाले देवेन्द्र ठक्कर ने यह शिकायत दर्ज कराई है। देवेन्द्र की मुलाकात कुछ समय पहले सिम्स अस्पताल में राहुल मिश्रा और उसकी पत्नी पदमा जनार्दन से हुई थी। ये दोनों पति-पत्नी जांजगीर-चांपा जिले के ठठारी के निवासी हैं।

सिम्स अस्पताल में बातचीत के दौरान राहुल मिश्रा ने देवेन्द्र पर रौब झाड़ते हुए कहा कि वह ईडी में एक बड़ा अधिकारी है। उसकी बातों और दिखावे में आकर देवेन्द्र को उस पर पूरा भरोसा हो गया। इसी दौरान मौके का फायदा उठाते हुए राहुल ने देवेन्द्र को कोनी स्थित सिम्स अस्पताल में कैंटीन का ठेका दिलाने का लालच दिया। बात सिर्फ ठेके तक नहीं रुकी, बल्कि राहुल ने देवेन्द्र के बेटे और उसके एक अन्य दोस्त को भी ईडी में ही अच्छी नौकरी लगवाने का पक्का आश्वासन दे दिया।

किस्तों में ऐंठे लाखों रुपए, खाते और नकद में हुआ लेन-देन..

शिकायत के मुताबिक, इस पूरे काम को कराने के एवज में राहुल और उसकी पत्नी पदमा ने देवेन्द्र से रुपयों की मांग शुरू कर दी। ठक्कर परिवार ने आरोपियों की बातों पर विश्वास करते हुए अलग-अलग समय पर किस्तों में पैसे दे दिए। यह रकम नकद और बैंक खातों में ट्रांसफर के माध्यम से दी गई। इस तरह आरोपियों ने कुल 6 लाख 82 हजार रुपए अपने पास जमा कर लिए।

पैसे वापस मांगने पर टालमटोल, अब पुलिस करेगी कार्रवाई..

लंबा समय बीत जाने के बाद भी देवेन्द्र ठक्कर को न तो सिम्स में कैंटीन का ठेका मिला और न ही उनके बेटे की कहीं नौकरी लग सकी। जब उन्हें अपने साथ हुई इस धोखाधड़ी का अहसास होने लगा, तो उन्होंने राहुल और उसकी पत्नी पर दबाव बनाना शुरू किया और अपने दिए हुए पैसे वापस मांगे। लगातार दबाव पड़ने पर पति-पत्नी ने कुछ रकम तो लौटा दी, लेकिन 1 लाख 62 हजार रुपए अब तक वापस नहीं किए हैं।

बचे हुए पैसे न मिलने और खुद के ठगे जाने की पूरी बात लेकर देवेन्द्र शनिवार को कोतवाली थाने पहुंचे। वहां उन्होंने पुलिस को पूरी घटना की जानकारी देते हुए लिखित शिकायत दी। पुलिस ने मामले को देखते हुए फौरन राहुल मिश्रा और उसकी पत्नी पदमा जनार्दन के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर लिया है। अब पुलिस बैंक के सभी लेनदेन की जानकारी निकाल रही है और अन्य दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल कर रही है ताकि आरोपियों की इस ठगी की पूरी भूमिका सामने आ सके।