सेंट्रल जेल में 15 दिन में दूसरी मौत : फिसलन बनी कैदियों के लिए खतरा, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल..

73 वर्षीय सजायाफ्ता कैदी की गिरने से मौत, हाल ही में इसी तरह हुई थी एक और कैदी की जान गई थी..

बिलासपुर। बिलासपुर केंद्रीय जेल में कैदियों की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। महज पंद्रह दिनों के भीतर फिसलकर गिरने से दूसरी कैदी की मौत होने की घटना ने जेल प्रशासन की व्यवस्थाओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं के बाद जेल परिसर में मौजूद बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा उपायों की समीक्षा की मांग तेज हो गई है।

जानकारी के अनुसार, तिफरा निवासी 73 वर्षीय सोकराम साहू, जो आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे, जेल परिसर में अचानक पैर फिसलने से गिर गए। गिरने के दौरान उन्हें गंभीर चोटें आईं। उन्हें तत्काल उपचार उपलब्ध कराने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी। घटना के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया।

यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि इससे पहले 29 जून को भी केंद्रीय जेल में एक कैदी की फिसलकर गिरने से मौत हुई थी। दो सप्ताह के भीतर एक जैसी परिस्थितियों में दो कैदियों की मौत ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था और रखरखाव को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

फिसलन वाली सतह पर उठ रहे सवाल..

जेल के भीतर मौजूद चमकदार टाइल्स और बरसात के मौसम में बढ़ने वाली फिसलन को लेकर पहले भी चिंताएं जताई जाती रही हैं। कैदियों और उनके परिजनों का कहना है कि कई स्थानों पर फर्श इतना चिकना है कि बुजुर्ग और बीमार कैदियों के लिए चलना जोखिम भरा हो जाता है। लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या जेल प्रशासन ने ऐसे संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए हैं या नहीं।

बुजुर्ग और बीमार कैदियों की सुरक्षा पर बहस..

सोकराम साहू की उम्र 73 वर्ष थी। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि जेलों में बुजुर्ग कैदियों और बीमार कैदियों के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था होनी चाहिए। फिसलन रोकने के उपाय, रेलिंग, एंटी-स्किड मैट और नियमित निगरानी जैसी सुविधाएं दुर्घटनाओं को रोकने में मददगार साबित हो सकती हैं।

जेल प्रशासन के दावों पर सवाल..

जेल प्रशासन समय-समय पर कैदियों की सुरक्षा और बेहतर सुविधाओं के दावे करता रहा है, लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाएं इन दावों की वास्तविकता पर सवाल खड़े कर रही हैं। यदि एक ही प्रकार की दुर्घटना में इतने कम समय के भीतर दो कैदियों की मौत हो रही है, तो यह केवल संयोग नहीं बल्कि व्यवस्थागत खामियों की ओर भी इशारा करता है।

जांच और जवाबदेही की मांग..

लगातार हुई मौतों के बाद अब इस बात की मांग उठ रही है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि दुर्घटनाओं के पीछे केवल फिसलन जिम्मेदार थी या सुरक्षा व्यवस्था में कोई गंभीर लापरवाही भी रही। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि जेल के भीतर बंद कैदियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

फिलहाल, केंद्रीय जेल में 15 दिनों के भीतर हुई दूसरी मौत ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बहस छेड़ दी है और प्रशासन के सामने कई असहज सवाल खड़े कर दिए हैं।