बिलासपुर। सरकंडा थाना क्षेत्र के चर्चित रानी सिंह एनडीपीएस प्रकरण में सोमवार को उस समय नया मोड़ आ गया, जब जनसुनवाई के दौरान मामले को लेकर पहुंचे परिजनों की शिकायत पर राज्य महिला आयोग ने हस्तक्षेप किया। महिला आयोग की अध्यक्ष किरणमयी नायक ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और तथ्यात्मक जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, रानी सिंह पिछले लगभग चार महीनों से एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज मामले में न्यायिक हिरासत में हैं। जनसुनवाई के दौरान उनके परिजनों ने महिला आयोग के समक्ष अपनी बात रखते हुए दावा किया कि रानी सिंह को सुनियोजित तरीके से झूठे मामले में फंसाया गया है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई है।
रानी सिंह के भाई शिवराज ने महिला आयोग के समक्ष शिकायत प्रस्तुत करते हुए आरोप लगाया कि उनकी बहन के खिलाफ की गई कार्रवाई एक पारिवारिक विवाद का परिणाम है। उन्होंने कहा कि उनकी बहन के बहनोई, जो मेडिकल स्टोर का संचालन करते हैं, ने कथित रूप से नशीली दवाइयों को घर में रखवाकर पुलिस कार्रवाई कराई। शिवराज का आरोप है कि इसके बाद पुलिस ने रानी सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और मामले की जांच एकतरफा तरीके से की गई।
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शिवराज ने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे घटनाक्रम में कुछ पुलिस अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध रही है। उनका कहना है कि यदि मामले की शुरुआत से निष्पक्ष जांच की जाती तो उनकी बहन को इतने लंबे समय तक जेल में नहीं रहना पड़ता। उन्होंने महिला आयोग से स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
परिजनों की शिकायत सुनने के बाद महिला आयोग की अध्यक्ष किरणमयी नायक ने मामले को गंभीर मानते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को सभी तथ्यों और परिस्थितियों की विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए। आयोग ने स्पष्ट किया कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जानी चाहिए, ताकि मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
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महिला आयोग के हस्तक्षेप के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अब जांच एजेंसी की रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि जांच में परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों में कोई तथ्य सामने आते हैं तो मामले में आगे और भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं। वहीं यदि जांच में आरोप निराधार पाए जाते हैं तो इससे पुलिस कार्रवाई की पुष्टि होगी।
फिलहाल आयोग के निर्देशों के बाद पूरे प्रकरण की पुनः समीक्षा और तथ्यों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। इससे रानी सिंह मामले में लंबे समय से उठ रहे सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
नोट : रानी सिंह के परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप उनके व्यक्तिगत आरोप हैं। इनकी सत्यता और आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। जांच रिपोर्ट आने तक किसी भी पक्ष के दावों को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता।







