बिलासपुर।प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में लगीं मितानिन और मितानिन प्रशिक्षक कर्मचारियों ने अब अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना शुरू कर दिया है। इन कर्मचारियों ने सरकार के सामने नियमितीकरण की मांग रखी है। उनका कहना है कि सरकार को नियमितीकरण की प्रक्रिया जल्द से जल्द शुरू करनी चाहिए ताकि उनके रोजगार को सुरक्षा मिल सके।

घोषणा पत्र और वादे की दिलाई याद..
कर्मचारियों की तरफ से एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अपनी बातें रखी गई हैं। इस विज्ञप्ति में सरकार को चुनाव के समय किए गए वादे याद दिलाए गए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार ने अपने घोषणा पत्र के साथ-साथ ‘मोदी की गारंटी’ के तहत भी यह कहा था कि मितानिन कार्यक्रम का नियमितीकरण किया जाएगा। वादे के बाद कर्मचारियों को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे कर्मचारियों में चिंता बढ़ती जा रही है।
ठेकेदारी व्यवस्था बंद करने की अपील..
विज्ञप्ति के अनुसार, वर्तमान समय में पूरा मितानिन कार्यक्रम ठेकेदारी व्यवस्था के माध्यम से चल रहा है। मितानिनों और प्रशिक्षकों का कहना है कि इस ठेकेदारी व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाना चाहिए। इसकी जगह पूरे कार्यक्रम को नियमित किया जाए। कर्मचारियों का मानना है कि ठेकेदारी खत्म होने और नियमितीकरण होने से न केवल उन्हें रोजगार की पक्की सुरक्षा मिलेगी, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन और भी अच्छे और प्रभावी ढंग से हो सकेगा।
हजारों कर्मचारियों के भविष्य का सवाल..
कर्मचारियों ने अपनी मांग के समर्थन में बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत प्रदेश भर में एक बड़ी संख्या में स्वास्थ्यकर्मी काम कर रहे हैं। इसी तरह स्वास्थ्य ढांचे में अपना लगातार योगदान दे रहीं लगभग 72 हजार मितानिन और 3250 मितानिन प्रशिक्षकों को भी नियमित सेवा का लाभ मिलना चाहिए। इतनी बड़ी संख्या में काम करने वाले लोगों को नियमित किए जाने से स्वास्थ्य विभाग को भी मजबूती मिलेगी।
सरकार के फैसले का इंतजार..
अपनी प्रेस विज्ञप्ति के जरिए कर्मचारियों ने सरकार से मांग की है कि वह घोषणा पत्र में किए गए वादों को पूरा करते हुए मितानिन कार्यक्रम का नियमितीकरण करे। इससे उनके भविष्य को एक सुरक्षा मिलेगी और स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।






