उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की अनूठी पहल : युवाओं और महिलाओं को मिलेगा रोजगार का नया रास्ता..निःशुल्क कौशल विकास प्रशिक्षण शुरू, टूल किट के साथ स्वरोजगार के लिए दुकान खोलने तक मिलेगी मदद..

गरियाबंद। वन एवं वन्यजीव संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों के सामाजिक और आर्थिक विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है।टाइगर रिजर्व क्षेत्र के युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पांच दिवसीय निःशुल्क कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया है। इस प्रशिक्षण में तकनीकी और स्वरोजगार आधारित विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण देकर ग्रामीणों को रोजगार से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

वन विभाग द्वारा पंडित सुन्दरलाल शर्मा एजुकेशनल अकादमी के सहयोग से संचालित इस कार्यक्रम में क्षेत्र के 67 युवक-युवतियां और महिलाएं भाग ले रही हैं। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मोबाइल रिपेयरिंग, प्लंबिंग, इलेक्ट्रिशियन तथा ब्यूटिशियन (ब्यूटी पार्लर) जैसे व्यवसायिक कोर्सों की व्यावहारिक जानकारी दी जा रही है।

वर्तमान में प्रशिक्षण का आयोजन ईको सेंटर कोयबा में किया जा रहा है। इसके अलावा ग्राम कठवा, कुल्हाड़ीघाट, सांकरा और मान्दागिरी में भी आगामी चरणों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

इन गांवों के प्रतिभागी ले रहे हिस्सा..

प्रशिक्षण कार्यक्रम में कोयबा, नागेश, उदन्ती, देवझरअमली, बन्वापारा, बुड्गेलटप्पा, इन्दागांव, डूमाघाट, धुर्वागुड़ी, फरसरा, पीपलखूंटा, धनोरा और जुगाड़ सहित विभिन्न ग्रामों के प्रतिभागी शामिल हुए हैं। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें आधुनिक उपकरणों के उपयोग, व्यवसाय संचालन, ग्राहक प्रबंधन तथा स्वरोजगार की संभावनाओं के बारे में भी जानकारी दी जा रही है।

प्रशिक्षण के बाद मिलेगा टूल किट और व्यवसाय शुरू करने में सहायता..

इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले सभी सफल प्रतिभागियों को उनके ट्रेड के अनुरूप निःशुल्क टूल किट और टी-शर्ट प्रदान की जाएगी। इतना ही नहीं, प्रत्येक प्रशिक्षण समूह से 2 से 3 इच्छुक और पात्र प्रतिभागियों का चयन कर उन्हें स्वयं की दुकान या व्यवसाय शुरू करने के लिए आवश्यक संसाधन और सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस पहल का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि युवाओं और महिलाओं को वास्तविक रूप से स्वरोजगार स्थापित करने में मदद करना है, ताकि वे आर्थिक रूप से मजबूत बन सकें और अपने परिवार की आय बढ़ाने में योगदान दे सकें।

संरक्षण के साथ विकास का मॉडल..

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व लंबे समय से वन्यजीव संरक्षण के लिए जाना जाता है, लेकिन अब विभाग स्थानीय समुदायों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए भी लगातार प्रयास कर रहा है। ‘संरक्षण भी – विकास भी’ की अवधारणा पर आधारित यह कार्यक्रम ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को कौशल आधारित रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

वन विभाग ने क्षेत्र के सभी युवाओं और महिलाओं से ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेकर इसका लाभ उठाने की अपील की है। विभाग का मानना है कि कौशल विकास के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

उप संचालक, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व ने कहा कि विभाग भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों का विस्तार करेगा ताकि जंगलों से जुड़े गांवों के लोगों को रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध हो सकें।