बिलासपुर में चंगाई सभा की आड़ में धर्मांतरण का खेल : शादी और मुफ्त इलाज का लालच देकर ईसाई बनाने की कोशिश, 3 पर FIR..

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में प्रार्थना और चंगाई सभा की आड़ में कथित तौर पर धर्म परिवर्तन कराने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सीपत थाना क्षेत्र के ग्राम मोहरा में प्रलोभन देकर लोगों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था। ग्रामीणों की शिकायत के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सभा को रुकवाया और तीन आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज कर लिया है।

हिंदू देवी-देवताओं का अपमान, सनातन छोड़ने का उकसावा..

जानकारी के अनुसार, ग्राम मोहरा कछरीपारा निवासी सुमित यादव (24) ने सीपत थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के मुताबिक, रविवार सुबह गांव के ही रामस्वरूप सूर्यवंशी के घर एक प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया था। इस सभा में रामस्वरूप, जितेंद्र सूर्यवंशी और बिलासपुर निवासी पंकज कुमार करियारे मौजूद थे। आरोप है कि ये लोग ग्रामीणों को हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक बातें कहकर भड़का रहे थे और सनातन धर्म को त्यागकर ईसाई धर्म अपनाने का दबाव बना रहे थे।

शादी, मुफ्त इलाज और बेहतर जिंदगी का प्रलोभन..

सुमित यादव जब अपने साथियों (धीरज भोई, सुभाष साहू और शुभांशु भोई) के साथ वहां पहुंचे तो देखा कि घर के आंगन में टीन शेड के नीचे भारी भीड़ जमा थी। वहां मौजूद भोले-भाले लोगों को अच्छे परिवार में शादी, मुफ्त इलाज, स्वास्थ्य लाभ और बेहतर जीवन स्तर का लालच दिया जा रहा था। सभा में बाकायदा बाइबल के साथ नाश्ते-पानी की भी व्यवस्था थी। माहौल बिगड़ने की आशंका को देखते हुए ग्रामीणों ने फौरन पुलिस को सूचना दी। सीपत पुलिस ने मौके पर पहुंचकर सभा बंद कराई और तीनों आरोपियों के खिलाफ बीएनएस (BNS) की धारा 299 तथा छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 1968 की धारा 3 व 4 के तहत नामजद एफआईआर दर्ज कर ली है।

धर्मांतरण का बढ़ता जाल : 16 महीने में 58 केस दर्ज..

बिलासपुर जिले में चंगाई और प्रार्थना सभाओं की आड़ में धर्मांतरण का यह कोई पहला मामला नहीं है। इसके आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। जनवरी 2025 से अप्रैल 2026 तक (पिछले 16 महीनों में) जिले में धर्मांतरण के 58 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। धर्मांतरण कराने वाले लोगों का मुख्य निशाना गरीब, बीमार और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग होता है। उन्हें नौकरी, मुफ्त इलाज, आर्थिक मदद और नशा मुक्ति जैसे लालच दिए जाते हैं। कई मामलों में महिलाओं और बच्चों को भोजन व अन्य सुविधाओं के जरिए सभाओं से जोड़ने की बात भी सामने आई है।

पुलिस और प्रशासन का कहना है कि मोहरा गांव के मामले को गंभीरता से लिया गया है और इसके हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है।