

बिलासपुर। जिले के मस्तूरी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत भटचौरा में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मजदूरी भुगतान में भारी गड़बड़ी और कथित भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि शासन द्वारा आवास निर्माण के लिए जारी की गई मजदूरी राशि पात्र हितग्राहियों के खातों में पहुंचने के बजाय दूसरे लोगों के खातों में ट्रांसफर कर दी गई। मामले के सामने आने के बाद गांव में नाराजगी बढ़ गई है और ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

ग्रामीणों ने जनपद पंचायत मस्तूरी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को लिखित शिकायत सौंपकर पूरे मामले की जांच कराने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और मजदूरी की राशि वापस दिलाने की मांग की है। शिकायतकर्ता पिंकी लहरे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिलने वाली मजदूरी राशि उनके खाते में जमा नहीं हुई। जांच करने पर पता चला कि भुगतान किसी अन्य खाते में चला गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह गड़बड़ी केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि कई हितग्राहियों के साथ ऐसा हुआ है। शिकायत में मंगलीन बाई कोसले, धनेश्वरी बाई, राही बाई कोसले और सुरेश कोसले सहित कई ग्रामीणों के नाम शामिल हैं। सभी ने मजदूरी भुगतान में अनियमितता की शिकायत की है।
मामले में पंचायत के रोजगार सहायक शमेलाल पुरेना की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि योजना का लाभ गरीब और जरूरतमंद परिवारों को मिलना चाहिए था, लेकिन पंचायत स्तर पर कथित लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण हितग्राही परेशान हो रहे हैं। मजदूरी राशि समय पर नहीं मिलने से कई परिवारों के मकान निर्माण का काम भी प्रभावित हुआ है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित बैंक खातों, भुगतान रिकॉर्ड और पंचायत स्तर पर किए गए ऑनलाइन एंट्री की गहराई से जांच कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
इसी बीच मामले में एक और बड़ा खुलासा सामने आया है। भारत जांगड़े, हरलाल, राजकुमार और परसू राम जांगड़े ने बताया कि वर्ष 2023 में उनके प्रधानमंत्री आवास पूरी तरह बन चुके हैं, लेकिन जब उन्होंने आवास शाखा में जानकारी ली तो पता चला कि उनके नाम से अब तक वर्क ऑर्डर ही जारी नहीं हुआ है। इस जानकारी के बाद योजना के दस्तावेजी रिकॉर्ड और क्रियान्वयन प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
ग्राम पंचायत के उपसरपंच रंजीत कुर्रे ने भी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो यह गरीबों के हक के साथ बड़ा खिलवाड़ माना जाएगा। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि शासन की योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है।
अब सबकी नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।



