
घर की जानकारी के आधार पर रची थी चोरी की साजिश, दो सराफा कारोबारियों से बरामद हुए जेवर; पुलिस ने पूछताछ के बाद मुचलके पर छोड़ा..

बिलासपुर। सकरी थाना क्षेत्र की सागरदीप कॉलोनी में हुई लाखों रुपये के सोने-चांदी के जेवर और नगदी की चोरी का पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक वारदात किसी बाहरी गिरोह ने नहीं, बल्कि घर के सदस्य और निलंबित आरक्षक आशीष मिश्रा ने अपने दो दोस्तों सूरज सिंह ठाकुर उर्फ मोना और अनुराग चौधरी उर्फ लालू के साथ मिलकर की थी। आरोपियों को घर में रखे जेवर और नगदी की जानकारी थी। इसी का फायदा उठाकर उन्होंने अलमारी और लॉकर का ताला तोड़ा और चोरी का सामान लेकर फरार हो गए।
पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से चोरी के सामान के साथ वारदात में इस्तेमाल बुलेट भी जब्त करने की जानकारी दी है। तीनों को न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है। हालांकि, मामले में चोरी के जेवर खरीदने वाले दो सराफा कारोबारियों को पुलिस द्वारा पूछताछ के बाद मुचलके पर छोड़े जाने से कार्रवाई को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।
तीजा में गांव गई थी गृहस्वामिनी, पीछे से टूटे अलमारी और लॉकर के ताले..
सकरी थाना पुलिस के अनुसार सागरदीप कॉलोनी निवासी वृंदावती मिश्रा तीजा के दौरान अपने पैतृक गांव रीवा गई थीं। उनके घर से बाहर रहने के दौरान अलमारी और लॉकर का ताला टूटा मिला। घर लौटने पर सोने-चांदी के जेवर और नगदी गायब मिली। इसके बाद उन्होंने सकरी थाने में शिकायत दर्ज कराई।
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने घर के सदस्य आशीष मिश्रा उम्र 31 वर्ष तथा उसके दोस्त सूरज सिंह ठाकुर उर्फ मोना उम्र 27 वर्ष, निवासी 27 खोली और अनुराग चौधरी उर्फ लालू उम्र 23 वर्ष, निवासी उसलापुर से पूछताछ की। पुलिस का दावा है कि पूछताछ और जांच में चोरी की साजिश का खुलासा हुआ।
घर की जानकारी बनी चोरी की वजह..
पुलिस के मुताबिक आशीष मिश्रा को घर में रखे जेवर और नगदी के बारे में जानकारी थी। इसी जानकारी के आधार पर उसने दोस्तों के साथ चोरी की योजना बनाई। मौका मिलने पर तीनों घर पहुंचे और अलमारी तथा लॉकर का ताला तोड़कर जेवर व नगदी चोरी कर ली।
जांच में पुलिस को चोरी के सामान को अलग-अलग स्थानों पर बेचने की जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस ने चोरी के जेवर की बरामदगी के लिए शहर के सराफा कारोबारियों तक जांच आगे बढ़ाई।
दो सराफा दुकानों से बरामद हुए चोरी के जेवर..
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने चोरी के जेवर उसलापुर स्थित सती श्री ज्वेलर्स और गोल बाजार स्थित बालाजी ज्वेलर्स में बेच दिए थे। पुलिस ने दोनों दुकानों से चोरी के जेवर बरामद किए। इसके बाद दोनों कारोबारियों को थाने लाकर पूछताछ की गई।
पुलिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में दोनों कारोबारियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। हालांकि कारोबारी क्षेत्र में सती श्री ज्वेलर्स के संचालक के रूप में प्रकाश सोनी और बालाजी ज्वेलर्स के संचालक के रूप में आर्यन सराफ के नाम की चर्चा है। इन नामों की पुलिस स्तर से स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस का कहना है कि दोनों कारोबारियों का आपराधिक रिकॉर्ड भी खंगाला गया, लेकिन पूर्व में कोई आपराधिक रिकॉर्ड सामने नहीं आया। पूछताछ और जेवर बरामद करने के बाद दोनों को मुचलका जमानत पर छोड़ दिया गया।
चोरी का माल खरीदने वाले पर कार्रवाई को लेकर उठे सवाल..
मामले में सबसे अहम सवाल अब यह है कि चोरी के जेवर खरीदने वाले कारोबारियों की भूमिका को पुलिस ने किस आधार पर तय किया। पुलिस ने दोनों स्थानों से चोरी का माल बरामद किया है, लेकिन कारोबारियों को गिरफ्तार करने के बजाय मुचलके पर छोड़ दिया गया।
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने जेवर सराफा कारोबारियों को बेचने की जानकारी दी थी। वहीं, केवल चोरी का सामान किसी कारोबारी के पास से बरामद होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उसे चोरी के बारे में जानकारी थी। ऐसे मामलों में खरीदार की जानकारी, खरीद की परिस्थितियां, बिल या अन्य दस्तावेज और उसके ज्ञान से जुड़े साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण होती है। इसी वजह से इस मामले में पुलिस की जांच और खरीदारों की भूमिका को लेकर आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
दबाव की चर्चा, पुलिस ने नहीं बताया कार्रवाई रोकने का कारण..
तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जब जांच चोरी के जेवर खरीदने वाले कारोबारियों तक पहुंची तो मामला सराफा कारोबारियों के बीच चर्चा में आ गया। कारोबारी सूत्रों के बीच यह चर्चा रही कि कुछ लोगों ने पुलिस से संपर्क कर कारोबारियों के खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई नहीं करने को लेकर पैरवी की। हालांकि पुलिस ने किसी कथित दबाव की पुष्टि नहीं की है और न ही अपनी विज्ञप्ति में इस तरह के किसी दबाव का उल्लेख किया है।
ऐसे में यह स्पष्ट होना बाकी है कि दोनों कारोबारियों को किन कानूनी आधारों पर मुचलके पर छोड़ा गया और उनके खिलाफ आगे जांच जारी रहेगी या नहीं।
चोरी के माल की खरीद पर सराफा संघ की चुप्पी क्यों?
लगातार सामने आ रहे चोरी के मामलों में सराफा कारोबारियों के पास चोरी के जेवर बिकने की बातें सामने आती रही हैं। इसके बावजूद ऐसे मामलों में प्रदेश स्तर पर संचालित सराफा एसोसिएशन की भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे हैं। सकरी के ताजा मामले में भी दो सराफा कारोबारियों से चोरी के जेवर बरामद होने की पुलिस ने पुष्टि की है, जिन्हें पूछताछ के बाद मुचलके पर छोड़ा गया। सवाल यह है कि यदि कोई कारोबारी अनजाने में भी चोरी का माल खरीदता है तो उसकी भूमिका की जांच के साथ संगठन स्तर पर भी आंतरिक कार्रवाई या जवाबदेही तय करने की कोई व्यवस्था है या नहीं? लगातार सामने आ रहे मामलों के बीच सराफा एसोसिएशन को अपनी भूमिका स्पष्ट करने की जरूरत है।
अधिवक्ता बोले – जानकारी होने पर चोरी का माल खरीदना भी गंभीर अपराध..
अधिवक्ता विक्रांत पिल्लई का कहना है कि चोरी करना अपराध है, लेकिन यदि कोई व्यक्ति यह जानते हुए चोरी का सामान खरीदता या अपने पास रखता है कि वह चोरी का है, तो उसकी भूमिका भी गंभीर कानूनी जांच का विषय बनती है। ऐसे मामलों में खरीदार की जानकारी, सामान खरीदने की परिस्थितियां और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच जरूरी है।
उन्होंने कहा कि चोरी का माल बरामद होने की स्थिति में पुलिस को यह भी देखना चाहिए कि खरीदार को माल के चोरी का होने की जानकारी थी या नहीं और उसके पास खरीद से संबंधित वैध दस्तावेज थे या नहीं।
टीआई बोले – खरीदारों से जेवर जब्त कर मुचलके पर छोड़ा..
सकरी थाना प्रभारी संजय सिंदे ने बताया कि आरोपियों ने चोरी के जेवर सराफा कारोबारियों के पास बेच दिए थे। दोनों स्थानों से जेवर बरामद किए गए हैं। खरीदारों को पूछताछ के बाद मुचलका जमानत पर जरूर छोड़ा गया है, लेकिन न्यायालीन प्रकरण में वह भी आरोपी है। वहीं निलंबित आरक्षक सहित चोरी के मामले में आरोपी तीनों युवकों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है।







