

123 गांवों में समग्र आजीविका मॉडल, 2 लाख से ज्यादा लोगों को लाभ..महिलाएं बनीं आय का मजबूत आधार..युवाओं को कौशल से मिल रहा रोजगार..

रायपुर/कोरबा।छत्तीसगढ़, जिसे ‘धान का कटोरा’ कहा जाता है, वहां की ग्रामीण अर्थव्यवस्था लंबे समय से धान की खेती पर निर्भर रही है। लेकिन सीमित सिंचाई और मौसम पर निर्भरता के कारण किसानों की आय अक्सर एक ही फसल तक सीमित रह जाती है। ऐसे में अब वेदांता बालको की पहल ग्रामीणों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरी है।
वेदांता बालको ने कोरबा, कवर्धा, रायगढ़, रायपुर और सरगुजा जिले के 123 गांवों में एक समग्र आजीविका मॉडल विकसित किया है। इस मॉडल का उद्देश्य केवल खेती पर निर्भरता कम कर ग्रामीणों को आय के कई स्रोत उपलब्ध कराना है। इस पहल से अब तक 2 लाख से अधिक लोग सीधे लाभान्वित हो चुके हैं।
महिलाएं बनीं बदलाव की धुरी..
इस बदलाव के केंद्र में ग्रामीण महिलाएं हैं। ‘प्रोजेक्ट उन्नति’ के तहत 561 से ज्यादा स्वयं सहायता समूह (SHG) बनाए गए हैं, जिनसे 6,000 से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं।
600 से ज्यादा महिलाएं छोटे व्यवसाय से नियमित आय कमा रही हैं।
45 गांवों में 2,200 से अधिक महिलाएं नैनो बिजनेस में सक्रिय।

कोरबा की विजय लक्ष्मी सारथी इसका उदाहरण हैं। उन्होंने प्रशिक्षण लेकर घर से फूड बिजनेस शुरू किया और आज हर महीने 12 से 15 हजार रुपये तक कमा रही हैं।
वहीं ‘क्लीनला’ समूह की महिलाएं घरेलू सफाई उत्पाद बनाकर हर सदस्य करीब 6,000 रुपये मासिक कमा रही हैं।
युवाओं को कौशल से रोजगार..
खेती के साथ अब युवाओं के लिए नए रास्ते भी खुल रहे हैं। वर्ष 2010 में शुरू हुए वेदांता स्किल स्कूल के माध्यम से अब तक 15,000 से ज्यादा युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है।
हर साल 1,000 से अधिक युवाओं को ट्रेनिंग।
11 राज्यों के 70+ संस्थानों में प्लेसमेंट।
सालाना वेतन 3 लाख रुपये तक..

कोरबा के आर्यन दास महंत ने स्किल ट्रेनिंग के बाद होटल इंडस्ट्री में नौकरी पाई और अब करीब 2 लाख रुपये सालाना कमा रहे हैं।
शिक्षा, स्वास्थ्य और सुविधाओं पर भी जोर..
आजीविका को मजबूत बनाने के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
110 ‘नंद घर’ केंद्रों से 7,000 से अधिक माताओं और बच्चों को लाभ।
300 से ज्यादा छात्रों को कोचिंग, 84 का चयन।
4,000 से अधिक छात्रों को शैक्षणिक सहायता।
इसके अलावा सड़क, स्वच्छता और अन्य बुनियादी सुविधाओं में सुधार से लोगों की बाजार और रोजगार तक पहुंच आसान हुई है।
अब एक नहीं, कई स्रोतों से आय..
इस पहल का सबसे बड़ा असर यह है कि अब ग्रामीण परिवार केवल खेती पर निर्भर नहीं हैं। वे छोटे व्यवसाय, नौकरी और अन्य गतिविधियों के जरिए आय के कई स्रोत विकसित कर रहे हैं।
वेदांता बालको का यह मॉडल खेती को कमजोर नहीं करता, बल्कि उसे मजबूत बनाते हुए अतिरिक्त अवसर देता है। इससे ग्रामीण परिवार आर्थिक रूप से ज्यादा सुरक्षित और आत्मनिर्भर बन रहे हैं।
भविष्य की मजबूत नींव..
छत्तीसगढ़ के गांवों में हो रहा यह बदलाव केवल आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक स्थायी और सुरक्षित भविष्य की दिशा में बड़ा कदम है।
यह पहल दिखाती है कि अगर खेती, कौशल, शिक्षा और सामुदायिक विकास को एक साथ जोड़ा जाए, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा और सकारात्मक परिवर्तन संभव है।



