

गरियाबंद। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में अवैध रूप से प्रवेश कर मछली और वन्यजीवों के शिकार का प्रयास करने वाले ओडिशा के तीन आरोपियों को वन विभाग की एंटी पोचिंग टीम ने पुलिस की मदद से गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई 25 अप्रैल 2026 को इंदागांव (धुरवागुड़ी) बफर क्षेत्र के पीपलखूंटा सर्कल में नियमित गश्त के दौरान की गई।

वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी पीपलखूंटा ‘ब’ के आरक्षित वन कक्ष क्रमांक 1204 और 1206 में गोड़ेना जलप्रपात के पास पानी को फावड़े से रोककर उसमें विषैले पत्ते मिलाकर मछलियां पकड़ने का प्रयास कर रहे थे। यह तरीका न केवल अवैध है, बल्कि इससे जलचर और वन्यजीवों को गंभीर नुकसान होता है। गश्त कर रही एंटी पोचिंग टीम ने मौके पर ही तीनों आरोपियों को पकड़ लिया और वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान चमरु, लखीराम और संजय के रूप में हुई है, जो ओडिशा के नवरंगपुर जिले के अछला गांव के निवासी हैं। इनके खिलाफ पी.ओ.आर. प्रकरण क्रमांक 16/393 दर्ज कर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला कायम किया गया।
तीनों आरोपियों को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी देवभोग के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जिला जेल गरियाबंद भेज दिया गया है।
वन विभाग की एंटी पोचिंग टीम ने स्पष्ट किया है कि टाइगर रिजर्व क्षेत्र में अवैध गतिविधियों के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाई जा रही है। विभाग का कहना है कि अवैध शिकार, कटाई या अतिक्रमण में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
इस कार्रवाई में वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ गरियाबंद पुलिस की भी अहम भूमिका रही। टीम में सहायक परिक्षेत्र अधिकारी, वनरक्षक और पेट्रोलिंग श्रमिकों ने मिलकर इस ऑपरेशन को सफल बनाया।
वन विभाग ने चेतावनी दी है कि संरक्षित वन क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों में लिप्त पाए जाने वालों को सीधे जेल भेजा जाएगा।



