रेलवे की मनमानी : 6 माह में 478 लोकल ट्रेनें रद्द, 46 बीच रास्ते रोकी ; 30 रुपए के सफर के लिए 200 रुपए फूंक रहे यात्री..

अकलतरा से पेंड्रा तक के एमएसटी धारक और मजदूर परेशान, रेलवे ने दिया विकास कार्यों का हवाला..

बिलासपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (एसईसीआर) के बिलासपुर मंडल में लोकल ट्रेनों के लगातार रद्द होने से यात्रियों की परेशानी चरम पर पहुंच गई है। रेलवे के आंकड़ो के मुताबिक, अप्रैल से सितंबर तक के 6 महीनों में 318 मेमू और 160 पैसेंजर ट्रेनें (कुल 478) रद्द कर दी गईं। वहीं 46 मेमू ट्रेनों को बीच रास्ते में ही टर्मिनेट कर दिया गया। ट्रेनों की इस मनमानी का सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ रहा है, जहां 30 रुपए के रेल टिकट की जगह अब लोगों को बस में सफर के लिए 200 रुपए तक खर्च करने पड़ रहे हैं।

रोज़ाना सफर करने वालों पर भारी आर्थिक मार..

बिलासपुर आने-जाने वाले हजारों यात्री मुख्य रूप से मेमू और पैसेंजर ट्रेनों पर ही निर्भर हैं। अकलतरा, चांपा, जांजगीर, जयरामनगर, गतौरा, पेंड्रा, खोंगसरा, कोटा, चकरभाठा और बिल्हा से हर दिन मजदूर, नौकरीपेशा और छात्र बिलासपुर पहुंचते हैं। ट्रेनें रद्द होने से सबसे ज्यादा नुकसान उन मजदूरों को हो रहा है, जिनकी दिनभर की कमाई का एक बड़ा हिस्सा अब सिर्फ सफर के किराए में जा रहा है। अकलतरा के मजदूर रमेश साहू ने बताया कि बिलासपुर में काम के लिए रोज आना-जाना होता है। ट्रेन न चलने पर बस से जाना मजबूरी बन जाता है।

एमएसटी वालों का पैसा फंसा, छात्रों की पढ़ाई प्रभावित..

रेलवे से एमएसटी (मंथली पास) बनवा चुके यात्रियों को दोहरा नुकसान झेलना पड़ रहा है। जयरामनगर की शिक्षिका सीमा वर्मा ने बताया कि पास का पैसा कटने के बावजूद ट्रेनें रद्द होने पर बस या ऑटो से सफर करना पड़ता है। वहीं, चांपा के छात्र मुकेश का कहना है कि ट्रेन रद्द होने से कॉलेज पहुंचने में देरी होती है और बस का किराया अलग से देना पड़ता है। कोटा के कारोबारी राजेश कुमार ने बताया कि ट्रेन जब बीच रास्ते में रोक दी जाती है, तो आगे का सफर पूरा करने में समय और पैसा दोनों बर्बाद होते हैं। लोगों की मांग है कि रद्दीकरण की जानकारी पहले दी जानी चाहिए।

अकेले अप्रैल में 234 ट्रेनों के थमे पहिए..

रेलवे के पांच महीने के जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। आंकड़ों के अनुसार 318 मेमू और 160 पैसेंजर ट्रेनें रद्द रहीं। अकेले अप्रैल महीने का डेटा देखें तो 234 ट्रेनें रद्द की गईं, जिनमें 110 मेमू ट्रेनें शामिल थीं। इसके अलावा 46 मेमू ट्रेनों को उनके गंतव्य से पहले ही समाप्त कर दिया गया, जिससे यात्री बीच रास्ते में भटकने को मजबूर हुए।

विकास कार्यों के लिए ब्लॉक जरूरी : रेलवे

ट्रेनों के रद्द होने पर बिलासपुर मंडल के सीनियर डीसीएम अनुराग सिंह का कहना है कि रेलवे में आधारभूत संरचना, नॉन-इंटरलॉकिंग और मेगा ब्लॉक कार्यों के दौरान कुछ ट्रेनों को न्यूनतम दिनों के लिए रद्द किया जाता है। कार्य पूर्ण होते ही सामान्य रेल सेवाएं बहाल कर दी जाती हैं।

बस ऑपरेटर उठा रहे इस मजबूरी का सीधा फायदा..

रद्द ट्रेनों के कारण बस स्टैंड पर भारी भीड़ हो रही है। इसका सीधा फायदा बस ऑपरेटर उठा रहे हैं। 30 रुपए के रेल सफर के बदले बस में मनमाना किराया वसूला जा रहा है, जिससे यात्रियों का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है।

बीच रास्ते रोके जाने से सुरक्षा पर भी उठ रहे सवाल..

46 ट्रेनों को बीच रास्ते में टर्मिनेट करने से रात के समय सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ी है। कई बार लोगों को सुनसान स्टेशनों पर उतरकर आगे के लिए प्राइवेट वाहनों का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।