

बिलासपुर। विश्व आर्द्रभूमि दिवस के अवसर पर कोपरा जलाशय क्षेत्र में आर्द्रभूमियों के संरक्षण और उनके महत्व को लेकर एक तीन दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम वन विभाग, बिलासपुर वन मंडल एवं डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया, मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ राज्य कार्यालय के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम की शुरुआत 31 जनवरी 2025 को शासकीय माध्यमिक शाला कोपरा में आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता से हुई। प्रतियोगिता का विषय कोपरा जलाशय, उसमें आने वाले विदेशी पक्षी एवं हमारा गाँव रखा गया। इसमें विद्यालय के 22 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए जलाशय, पक्षियों और प्रकृति के प्रति अपने भाव चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किए।

दूसरे दिन 01 जनवरी 2026 को डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया द्वारा वॉलंटियर डे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वन विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारियों एवं कोपरा जलाशय से जुड़े 15 वेटलैंड मित्रों को आर्द्रभूमि की उपयोगिता, जैव विविधता में उनकी भूमिका तथा संरक्षण की आवश्यकता के बारे में सरल और व्यवहारिक जानकारी दी गई। साथ ही वेटलैंड हेल्थ असेसमेंट के प्रमुख मापदंडों पर मैदान में प्रत्यक्ष प्रदर्शन (ऑन-फील्ड डेमोंस्ट्रेशन) भी किया गया।

कार्यक्रम के अंतिम दिन 02 फरवरी 2026 को कोपरा जलाशय में वेटलैंड मित्रों एवं स्वयंसेवकों के साथ पक्षी अवलोकन (बर्ड वॉचिंग) गतिविधि आयोजित की गई, जिसमें जलाशय में आने वाले स्थानीय एवं प्रवासी पक्षियों की पहचान और उनके महत्व पर चर्चा की गई।


इसके बाद वेटलैंड क्लीन-अप अभियान चलाया गया, जिसमें स्थानीय ग्रामीणों, वेटलैंड मित्रों, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया की टीम, वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी तथा बिलासपुर के जागरूक नागरिकों ने मिलकर भाग लिया। अभियान के दौरान जलाशय एवं उसके आसपास के क्षेत्र से प्लास्टिक, बोतलें, काँच एवं अन्य कचरे को एकत्र कर साफ-सफाई की गई।

समापन कार्यक्रम में स्थानीय लोगों के साथ संवाद के उपरांत चित्रकला प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार प्रदान किए गए तथा सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र दिए गए। कार्यक्रम के अंत में ग्राम सरपंच, जनप्रतिनिधियों, वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों, विद्यालय के शिक्षकों, छात्रों एवं वेटलैंड मित्रों ने कोपरा आर्द्रभूमि को स्वच्छ और संरक्षित बनाए रखने की शपथ ली।

यह तीन दिवसीय आयोजन न केवल आर्द्रभूमियों के संरक्षण का संदेश देने में सफल रहा, बल्कि सामुदायिक सहभागिता, पर्यावरण जागरूकता और जैव विविधता संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल साबित हुआ।




