स्मृति ईरानी ने लगाई छग के नेताओं की क्लास : मंत्रियों-विधायकों के दावों की स्क्रीन पर खुली पोल ; फर्जी आंकड़े बताने पर एक विधायक को फटकार..

मिशन 2028 : सत्ता-संगठन की दूरी पाटने की कवायद, सोशल मीडिया के दावों पर हाईकमान सख्त..

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सत्ता वापसी के बाद भाजपा अब अपने संगठन को चुस्त-दुरुस्त कर 2028 के चुनाव की तैयारियों में जुट गई है। लेकिन सरकार और संगठन के बीच बढ़ती खाई ने हाईकमान की चिंता बढ़ा दी है। इसी कड़ी में प्रदेश प्रभारी व पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने रायपुर के कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में सोमवार को मंत्रियों, सांसदों और विधायकों की मैराथन बैठक ली। 10 घंटे से ज्यादा चले इस रणनीतिक मंथन में हाईटेक तरीके से जनप्रतिनिधियों के कामकाज और उनकी जमीनी पकड़ का पूरा चिट्ठा खोला गया। इस दौरान चौंकाने वाली बात तब सामने आई, जब दावों की ऑन-स्क्रीन जांच हुई और अपने फॉलोअर्स के फर्जी आंकड़े देने पर एक विधायक को जोरदार फटकार लगी।डैमेज कंट्रोल के तौर पर अब सभी विधायकों को आगामी दिवाली पर अपने क्षेत्र के कार्यकर्ताओं के लिए ‘स्नेह भोज’ आयोजित करने को कहा गया ।

हवा-हवाई दावों पर लगी रोक, स्क्रीन पर दिखा सच..

सोमवार सुबह 10 बजे से ही प्रदेश कार्यालय में मंत्रियों, लोकसभा-राज्यसभा सांसदों और विधायकों का जमघट लग गया था। 11 बजे से बैठकों का दौर शुरू हुआ। वन-टू-वन चर्चा के दौरान स्मृति ईरानी ने अपने चिर-परिचित अंदाज में कहा कि अब पुराने तरीके से काम नहीं चलेगा। बैठक कक्ष में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने सीधे विधायकों और मंत्रियों के सोशल मीडिया अकाउंट्स, उनकी डिजिटल एक्टिविटी और फॉलोअर्स का डेटा लाइव चेक किया । इसी दौरान एक महिला विधायक ने हड़बड़ी में जनता से जुड़ाव और डिजिटल रीच के गलत आंकड़े पेश कर दिए। इस पर प्रदेश प्रभारी ने उन्हें बीच में ही टोकते हुए सख्त लहजे में कहा- “मैडम, आपके आंकड़े ये नहीं हैं। मेरे सामने स्क्रीन पर जो रिपोर्ट है, वह कुछ और ही कह रही है।” इस एक वाकये ने स्पष्ट कर दिया कि पार्टी अब हवा-हवाई बातों के बजाय केवल ठोस जमीनी रिपोर्टिंग और डेटा पर भरोसा कर रही है।

दिवाली पर ‘स्नेह भोज’ से डैमेज कंट्रोल का टास्क..

लगातार दो दिनों की कोर ग्रुप बैठकों में यह फीडबैक सामने आया था कि चुनाव जीतने के बाद शीर्ष नेताओं, मंत्रियों और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच एक बड़ा गैप बन गया है। इसे गंभीरता से लेते हुए स्मृति ने एक व्यावहारिक टास्क सौंपा। उन्होंने सभी विधायकों, मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों को निर्देश दिए हैं कि वे इस बार दीपावली के मौके पर अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में जमीनी कार्यकर्ताओं के लिए एक ‘विशेष स्नेह भोज’ का आयोजन करें। और सत्ता में आने के बाद पैदा हुई आपसी दूरियों और नाराजगी को खत्म करें ताकि संगठन की असली रीढ़ माने जाने वाले कार्यकर्ताओं को वापस पारिवारिक जुड़ाव के साथ मुख्यधारा में लाया जा सके।

सांसदों का रिपोर्ट कार्ड तलब, विकास कार्यों पर जवाब-तलब..

दोपहर के सत्र में सांसदों की बारी आई। एक-एक सांसद से उनके संसदीय क्षेत्र का विस्तृत ब्योरा और रिपोर्ट कार्ड तलब किया गया। विधानसभावार विकास कार्यों की प्रगति रिपोर्ट परखी गई और पूछा गया कि काम सुचारू रूप से हो रहे हैं या नहीं। सांसदों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि केंद्र सरकार की लाभकारी योजनाओं का 100% लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। इसके साथ ही, यह भी पूछा गया कि उनके क्षेत्रों में जनता की वर्तमान मांगें क्या हैं और विकास को गति देने के लिए किन नए प्रोजेक्ट्स की जरूरत है।

सत्ता और संगठन में समन्वय ही 2028 का मंत्र..

स्मृति ईरानी ने कहा कि सरकार के काम संगठन के जरिए जनता तक जाने चाहिए और संगठन का फीडबैक सीधा सरकार तक आना चाहिए। उन्होंने हिदायत दी कि किसी भी कीमत पर सरकार और पार्टी के बीच संवादहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जनसंपर्क को महज औपचारिकता न बनाकर जमीनी सक्रियता बढ़ाने की बात पर उन्होंने जोर दिया।

बैठक में इन दिग्गजों की रही मौजूदगी..

दिन भर चली इन मैराथन बैठकों में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव, प्रदेश सह-प्रभारी सिद्धार्थ शम्भू, संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह, उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा विशेष रूप से मौजूद रहे। साय कैबिनेट के अन्य मंत्री भी इस रणनीतिक मंथन का हिस्सा बने।

डिजिटल मॉनिटरिंग से उड़ी नींद..

पहली बार जनप्रतिनिधियों के सोशल मीडिया अकाउंट्स की ऑन-स्क्रीन जांच होने से कई नेताओं की नींद उड़ी हुई है। अब तक केवल कागजी रिपोर्ट देने वाले नेताओं को समझ आ गया है कि हाईकमान थर्ड-पार्टी सर्वे और डिजिटल फुटप्रिंट के जरिए उन पर सीधी नजर रख रहा है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, हाईकमान अब हर तीन महीने में इसी तरह डिजिटल मॉनिटरिंग और जमीनी रिपोर्ट के आधार पर मंत्रियों और विधायकों के कामकाज की समीक्षा करेगा। जो नेता दिवाली के बाद भी कार्यकर्ताओं से दूरी बनाए रखेंगे और जिनकी परफॉर्मेंस रिपोर्ट लगातार खराब रहेगी, उन पर पार्टी 2028 के चुनाव से पहले कोई बड़ा फैसला ले सकती है।