
2022 तक कुल्हाड़ीघाट रेंज में ही मिलते थे दर्शन, अब उत्तर उदंती में भी मिली मौजूदगी ; फलदार पेड़ों के संरक्षण और जंगलों की सुरक्षा पर जोर..

गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में मालाबार पाइड हॉर्नबिल की मौजूदगी का दायरा बढ़ा है। रिजर्व की उत्तर उदंती रेंज में गश्ती दल ने इस पक्षी की उपस्थिति दर्ज की है। इसके साथ ही अब यह पक्षी टाइगर रिजर्व की कुल आठ में से छह रेंज में दर्ज किया जा चुका है। वर्ष 2022 तक इसके दर्शन मुख्य रूप से कुल्हाड़ीघाट रेंज तक सीमित थे। पिछले चार वर्षों में अलग-अलग रेंज में इसकी मौजूदगी दर्ज होना वन्यजीव संरक्षण और पक्षियों के अनुकूल आवास तैयार करने के प्रयासों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वन विभाग के अनुसार, कुल्हाड़ीघाट के बाद दक्षिण उदंती, अरसीकन्हार, तौरेंगा और इंदागांव रेंज में भी मालाबार पाइड हॉर्नबिल की मौजूदगी दर्ज की गई। अब उत्तर उदंती में इसका रिकॉर्ड मिलने से इसके ज्ञात वितरण क्षेत्र का दायरा और विस्तृत हुआ है। कुल्हाड़ीघाट और दक्षिण उदंती रेंज में इसके नियमित दर्शन होने की जानकारी भी सामने आई है।
छह रेंज में मौजूदगी..
मालाबार पाइड हॉर्नबिल को जंगलों के पारिस्थितिक संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला पक्षी माना जाता है। यह फल खाता है और उनके बीजों को अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाने में मदद करता है। इससे प्राकृतिक वनों में नए पौधों के उगने और पेड़ों की विविधता बनाए रखने में सहायता मिलती है। ऐसे में इस पक्षी की विभिन्न रेंज में मौजूदगी दर्ज होना जंगलों के संरक्षण के लिहाज से अहम है।
हालांकि, किसी पक्षी का पहले से अधिक क्षेत्रों में दिखाई देना अपने आप में उसकी कुल आबादी बढ़ने का प्रमाण नहीं है। इसके लिए वैज्ञानिक निगरानी, प्रजनन की स्थिति, घोंसलों की संख्या और अलग-अलग क्षेत्रों में उसकी नियमित मौजूदगी का अध्ययन जरूरी है। इसलिए फिलहाल छह रेंज में दर्ज उपस्थिति को उसके ज्ञात वितरण क्षेत्र के विस्तार के रूप में देखना अधिक उचित होगा।
अतिक्रमण हटाने से लेकर शिकारियों पर कार्रवाई तक..
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए अतिक्रमण तथा वन्यजीव अपराधों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। रिजर्व प्रशासन के प्रेस नोट के अनुसार, लगभग 1,000 हेक्टेयर वनभूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। साथ ही 500 से अधिक शिकारियों और वन्यजीव तस्करों को गिरफ्तार किया गया है।
इन कार्रवाइयों का उद्देश्य जंगलों को अवैध कब्जे, शिकार और तस्करी जैसी गतिविधियों से बचाना है। वन विभाग ने गश्त बढ़ाने, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने तथा वनाग्नि की रोकथाम और नियंत्रण के लिए भी प्रयास किए हैं। जंगलों की सुरक्षा के साथ वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों को बचाना और उनके विचरण के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाए रखना भी संरक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
फलदार पेड़ों के समूह से पक्षियों को भोजन देने की पहल..
हॉर्नबिल के संरक्षण के लिए टाइगर रिजर्व में ‘हॉर्नबिल रेस्टोरेंट’ नाम से पहल की गई है। इसके तहत फलदार वृक्षों के समूह विकसित किए जा रहे हैं, ताकि हॉर्नबिल सहित अन्य फल खाने वाले पक्षियों को प्राकृतिक भोजन उपलब्ध हो सके। ऐसी पहल से पक्षियों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के साथ जंगलों के प्राकृतिक पुनर्जीवन को भी बढ़ावा मिल सकता है।
इसका उद्देश्य केवल पक्षियों को भोजन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उनके प्राकृतिक आवास को मजबूत करना भी है। फलदार पेड़ों की उपलब्धता, सुरक्षित घोंसले बनाने के स्थान और मानवीय गतिविधियों से कम प्रभावित वन क्षेत्र पक्षियों के लंबे समय तक टिके रहने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
स्थानीय लोगों को बनाया जा रहा हॉर्नबिल ट्रैकर..
वन्यजीव संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाने के लिए रिजर्व प्रशासन ने स्थानीय लोगों को हॉर्नबिल ट्रैकर के रूप में भी जोड़ा है। जंगलों और आसपास के भूभाग की जानकारी रखने वाले स्थानीय लोग पक्षियों की मौजूदगी दर्ज करने और उनकी गतिविधियों पर नजर रखने में मदद कर सकते हैं।
इससे वन विभाग को अलग-अलग क्षेत्रों में पक्षियों की उपस्थिति के बारे में जानकारी जुटाने में सहायता मिलती है। स्थानीय लोगों की भागीदारी संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और जंगलों के साथ उनके जुड़ाव को मजबूत करने का माध्यम भी बन सकती है।
इसके अलावा ‘हॉर्नबिल सफारी’ पहल के जरिए लोगों को इस पक्षी और उसके प्राकृतिक आवास के बारे में जागरूक करने तथा स्थानीय समुदायों के लिए प्रकृति आधारित आजीविका के अवसर विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसी गतिविधियों में इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि पर्यटन या मानवीय आवाजाही से पक्षियों के घोंसलों और उनके संवेदनशील आवासों को नुकसान न पहुंचे।
जंगलों की सुरक्षा और निगरानी से जुड़ी उम्मीदें..
मालाबार पाइड हॉर्नबिल की उत्तर उदंती रेंज में मौजूदगी दर्ज होना उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के लिए संरक्षण की दिशा में एक उत्साहजनक घटनाक्रम है। पिछले चार वर्षों में पांच अन्य रेंज के साथ इसका रिकॉर्ड मिलना बताता है कि अब यह पक्षी रिजर्व के अधिक क्षेत्रों में दर्ज किया जा रहा है।
हालांकि, इस बदलाव के पीछे आवास की स्थिति, भोजन की उपलब्धता, पक्षियों की आवाजाही और निगरानी के स्तर जैसे पहलुओं का अध्ययन करना जरूरी होगा। आगे नियमित सर्वेक्षण और वैज्ञानिक आंकड़ों से यह समझने में मदद मिलेगी कि अलग-अलग रेंज में इसकी मौजूदगी कितनी स्थायी है और प्रजनन के लिए परिस्थितियां कैसी हैं।
रिजर्व में अतिक्रमण पर नियंत्रण, अवैध शिकार के खिलाफ कार्रवाई, वनाग्नि प्रबंधन, फलदार वृक्षों का विकास और स्थानीय समुदायों की भागीदारी जैसे प्रयास इस संरक्षण प्रक्रिया के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। मालाबार पाइड हॉर्नबिल की मौजूदगी का बढ़ता दर्ज दायरा इन प्रयासों के बीच एक सकारात्मक संकेत है। अब चुनौती इस पक्षी के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने और लंबे समय तक इसकी मौजूदगी की वैज्ञानिक निगरानी सुनिश्चित करने की है।







