
रायगढ़-सराई पाली हाईवे प्रोजेक्ट : 30 किमी के दायरे में 15 जर्जर हिस्से और 3 ब्लैक स्पॉट दे रहे हादसों को न्योता, आधी-अधूरी सड़क पर टोल वसूलने की तैयारी..

रायगढ़। रायगढ़ से सराईपाली तक 90 किलोमीटर लंबी नेशनल हाईवे का निर्माण पिछले 11 सालों से विभागीय लेटलतीफी, ठेकेदारों की नाकामी और टेंडर प्रक्रिया की खामियों के बीच झूल रहा है। वर्ष 2015 में जिस प्रोजेक्ट को शुरू किया गया था, वह दो निर्माण कंपनियों के काम बीच में ही छोड़कर भाग जाने के कारण आज तक अधूरा है। स्थिति यह है कि रायगढ़ से चंद्रपुर के बीच 30 किलोमीटर के हिस्से में 15 से अधिक स्थानों पर सड़क के परखच्चे उड़ चुके हैं। कहीं 20 मीटर तो कहीं 50 मीटर तक सड़क का नामोनिशान नहीं है। अब नेशनल हाईवे (एनएच) विभाग टुकड़ों में टेंडर निकालकर इस सड़क को 2028 तक पूरा करने का दावा कर रहा है। लेकिन इस पूरे प्रोजेक्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि एक तरफ सड़क जर्जर है, वहीं दूसरी तरफ गोमर्डा से सराईपाली के बीच महज 30 किमी का काम पूरा कर एनएच ने टोल नाका शुरू करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
दो ठेकेदार भागे, अब 23% अधिक दर के टेंडर पर फंसा पेंच..
वर्ष 2015 में इस मार्ग के निर्माण का पहला ठेका एरा इंफ्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड को दिया गया था। काम में अत्यधिक देरी के कारण विभाग ने ठेका निरस्त कर दिया। इसके बाद ग्रोवर कंस्ट्रक्शन ने काम का जिम्मा लिया, लेकिन डेढ़ साल काम करने के बाद यह कंपनी भी प्रोजेक्ट अधूरा छोड़कर चली गई। अब विभाग एकमुश्त काम कराने के बजाय अलग-अलग हिस्सों के टेंडर निकाल रहा है। इसमें चंद्रपुर बायपास परियोजना सबसे अहम है। महानदी पर पुल और 5.6 किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए 73.75 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया गया था। पहले टेंडर में ठेकेदारों ने तय बजट से 40 प्रतिशत अधिक दर डाली, जिसे निरस्त कर दिया गया। अब गुजरात की एक कंपनी ने 23 प्रतिशत अधिक दर का प्रस्ताव दिया है। इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए दिल्ली भेजा गया है, जहां से हरी झंडी मिलने के बाद ही काम शुरू हो पाएगा।
10 साल पुरानी सीसी रोड में दरारें, डामर प्लांट बंद होने का बहाना..
रायगढ़ से मांड नदी पुल (चंद्रपुर के समीप) और बताऊपाली तक करीब 25 किलोमीटर सड़क का निर्माण लगभग 10 साल पहले हुआ था। अब इस हिस्से की सीसी सड़क दरकने लगी है और डामर उखड़ने लगा है। मेंटेनेंस के नाम पर विभाग ने एस्टीमेट बनाकर टेंडर तो जारी कर दिया है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम शुरू नहीं हुआ है। अधिकारियों का तर्क है कि डामर प्लांट बंद होने के कारण काम रुका हुआ है। हालांकि, एनएच का दावा है कि सड़कों का पैचवर्क और बीटी का काम नवंबर से शुरू किया जाएगा। शहरी क्षेत्र के 0.7 किमी हिस्से में डिवाइडर और स्ट्रीट लाइट का काम फिलहाल नगर निगम के भरोसे छोड़ दिया गया है।
60 करोड़ के नए पुल की फाइल दिल्ली में रुकी..
इस पूरे प्रोजेक्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा महानदी पर बनने वाले दो नए पुल हैं। एनएच के सब-इंजीनियर रितेश कश्यप के मुताबिक, पहला पुल महादेवपाली और मानिकपुर को जोड़ेगा। यहां से 4 किमी सड़क के बाद लातनाला के पास दूसरा पुल बनाया जाएगा। इसके बनने से भारी वाहन चंद्रपुर शहर में घुसे बिना लातनाला होते हुए सीधे टिमरलगा निकल जाएंगे। 60 करोड़ रुपए की इस अहम परियोजना की फाइल भी अभी स्वीकृति के लिए दिल्ली मुख्यालय में अटकी पड़ी है।
हादसों का हाईवे : बड़े भंडार के पास 100 मीटर सड़क गायब..
सड़क सुरक्षा समिति की रिपोर्ट के मुताबिक रायगढ़ से चंद्रपुर के बीच 3 से अधिक डेंजर और ब्लैक स्पॉट बन चुके हैं। बड़े भंडार के पास सड़क का 100 मीटर का हिस्सा पूरी तरह टूटकर गड्ढों में तब्दील हो चुका है। रोजाना हजारों भारी वाहनों की आवाजाही के कारण यहां उड़ती धूल और गड्ढों की वजह से लगातार हादसे हो रहे हैं, लेकिन ठेकेदार के भागने के बाद से इस हिस्से की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
टोल वसूलने की जल्दबाजी: खरसिया की कंपनी को 58.80 करोड़ का काम..
पूरा हाईवे भले ही जर्जर हो, लेकिन गोमर्डा अभयारण्य से सराईपाली तक के 30 किलोमीटर हिस्से में डामर का काम अंतिम चरण में है। खरसिया की एक कंपनी को 58.80 करोड़ रुपये में यह काम सौंपा गया है, जिसे दिसंबर तक पूरा करने का दावा किया जा रहा है। इसी हिस्से में कनकबीरा और सराईपाली के नरेश नगर में पुल का काम बाकी होने के बावजूद एनएच के अधिकारी गोमर्डा अभयारण्य के आगे टोल नाका बनाने की फाइल तेजी से दौड़ा रहे हैं।
अधिकारियों का रटा-रटाया जवाब : तीन दिन पहले चार्ज लिया है..
इस पूरे प्रोजेक्ट की लेटलतीफी और टेंडर की वर्तमान स्थिति को लेकर जब एनएच के एसडीओ बीआर भगत से संपर्क किया गया, तो उनका जवाब जिम्मेदारी से बचने वाला था। उन्होंने कहा, “रायगढ़ से सराईपाली एनएच में कितना काम बाकी है और टेंडर की स्थिति क्या है, इसकी पूरी जानकारी मुझे नहीं है। मैंने तीन दिन पहले ही प्रभार संभाला है। विभागीय फाइलों का अवलोकन करने के बाद ही स्थिति स्पष्ट कर पाऊंगा।”







