आदिवासी जमीन के सौदे में 10 लाख की धोखाधड़ी का आरोप, जमीन कारोबारी गिरफ्तार..

अमेरी की जमीन को लेकर अनुबंध और एडवांस भुगतान का मामला ; स्वामित्व व मुख्तियारनामा पर उठे सवाल, चार महीने पहले भी दर्ज हुई थी एफआईआर..

बिलासपुर। न्यायधानी में जमीन की खरीद-बिक्री के नाम पर कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। अमेरी क्षेत्र की जमीनों का सौदा कर 10 लाख रुपये एडवांस लेने और बाद में रजिस्ट्री नहीं कराने के आरोप में सिविल लाइन पुलिस ने जमीन कारोबारी प्रफुल्ल झा को गिरफ्तार किया है। शिकायतकर्ता विशालचंद्र केसरी का आरोप है कि सौदे में ऐसी जमीन भी शामिल की गई, जो राजस्व रिकॉर्ड में दूसरे व्यक्तियों के नाम पर दर्ज थी। इनमें गोंड आदिवासी समुदाय की चंद्रकली बाई के नाम दर्ज जमीन भी शामिल बताई गई है। मामले ने जमीन के वास्तविक स्वामित्व, बिक्री के अधिकार और अनुबंध के आधार पर रकम लेने के तरीकों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 336, 338 और 340 के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

70 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से तय हुआ था सौदा..

शिकायत के मुताबिक, दयालबंद निवासी विशालचंद्र केसरी का भारतीय नगर निवासी प्रफुल्ल झा के साथ बिलासपुर के अमेरी क्षेत्र में स्थित जमीनों की खरीद-बिक्री को लेकर सौदा हुआ था। आरोप है कि प्रफुल्ल झा ने संबंधित जमीनों को अपने साथ अनुबंधित बताते हुए 70 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से बेचने की बात कही थी। इस संबंध में 10 दिसंबर 2025 को अनुबंध किया गया और शिकायतकर्ता ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से 10 लाख रुपये एडवांस के रूप में दिए।

विशालचंद्र केसरी के अनुसार, बाद में जमीनों के राजस्व रिकॉर्ड की जानकारी सामने आने पर उन्हें सौदे की वास्तविक स्थिति को लेकर संदेह हुआ। उनका आरोप है कि अनुबंध में शामिल कुछ जमीनें अन्य लोगों के नाम पर दर्ज थीं। ऐसे में सवाल यह उठा कि संबंधित जमीनों को बेचने के लिए प्रफुल्ल झा के पास वैध अधिकार थे या नहीं।

आदिवासी महिला के नाम दर्ज जमीन भी सौदे में शामिल होने का आरोप..

शिकायत में खसरा नंबर 232 की 0.2430 हेक्टेयर जमीन का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, यह जमीन राजस्व रिकॉर्ड में गोंड आदिवासी समुदाय की चंद्रकली बाई के नाम पर दर्ज थी। आरोप है कि जमीन को सामान्य वर्ग की भूमि बताकर सौदे में शामिल किया गया और उसके वास्तविक स्वामित्व से जुड़ी जानकारी स्पष्ट नहीं की गई।

इस पहलू के सामने आने के बाद मामला केवल एडवांस रकम लेकर रजिस्ट्री नहीं कराने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि जमीन के स्वामित्व और उसे बेचने के अधिकार की जांच भी महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि, आदिवासी जमीन के संबंध में किसी नियम का उल्लंघन हुआ है या नहीं, यह संबंधित राजस्व अभिलेखों, अनुबंध और अन्य दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

मुख्तियारनामा के आधार पर जमीन बेचने का दावा..

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि प्रफुल्ल झा ने कृष्णा दुआ के नाम से जारी मुख्तियारनामा के आधार पर जमीन बेचने का अधिकार होने की बात कही थी। बाद में उन्हें कथित तौर पर पता चला कि संबंधित मुख्तियारनामा जमीन की बिक्री के लिए पर्याप्त या वैध अधिकार प्रदान नहीं करता था। शिकायत में इसकी प्रामाणिकता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

विशालचंद्र केसरी का कहना है कि उन्होंने रकम देने के बाद जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए कई बार संपर्क किया, लेकिन उन्हें लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा। रजिस्ट्री नहीं होने और संपर्क का उचित जवाब नहीं मिलने पर उन्हें धोखाधड़ी की आशंका हुई। इसके बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की।

मसानगंज और तोरवा की जमीनों का भी उल्लेख..

शिकायत में 15 दिसंबर 2025 को मसानगंज और तोरवा क्षेत्र की अन्य जमीनों के संबंध में किए गए अनुबंधों का भी जिक्र है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन जमीनों की बिक्री के लिए भी मुख्तियारनामा के जरिए अधिकार होने की बात कही गई थी, लेकिन अब तक किसी भी जमीन की रजिस्ट्री नहीं कराई गई।

शिकायतकर्ता ने पुलिस को दिए आवेदन में पहले की शिकायत और सिविल लाइन थाने में दर्ज एफआईआर क्रमांक 631, दिनांक 10 मई 2026 का भी उल्लेख किया है। उनका आरोप है कि पूर्व के मामले की जानकारी मिलने और वर्तमान सौदे में रजिस्ट्री नहीं होने के बाद उन्हें अपने साथ भी धोखाधड़ी होने का संदेह हुआ।

चार महीने पहले भी दर्ज हुई थी एफआईआर..

प्रफुल्ल झा के खिलाफ 10 मई 2026 को सिविल लाइन थाने में एक अन्य एफआईआर दर्ज होने का उल्लेख शिकायत में किया गया है। विशालचंद्र केसरी के मुताबिक, उन्हें जब इस पुराने मामले की जानकारी मिली, तब उन्होंने अपने साथ हुए जमीन के सौदे को लेकर भी पुलिस से संपर्क किया।

हालांकि, पुराने मामले और वर्तमान शिकायत के बीच क्या संबंध है, दोनों मामलों में आरोपों की प्रकृति क्या है और क्या अन्य लोग भी इस तरह के सौदों से प्रभावित हुए हैं, यह पुलिस की जांच में स्पष्ट होगा। केवल पूर्व में एफआईआर दर्ज होने के आधार पर किसी अन्य मामले के आरोपों को स्वतः प्रमाणित नहीं माना जा सकता।

पुलिस खंगाल रही जमीन के सौदों से जुड़े दस्तावेज..

शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर पुलिस ने प्रफुल्ल झा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 336, 338 और 340 के तहत अपराध दर्ज कर गिरफ्तारी की कार्रवाई की है। अब जांच में जमीनों के अनुबंध, एडवांस भुगतान, राजस्व रिकॉर्ड और मुख्तियारनामा से जुड़े दस्तावेजों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

पुलिस यह भी जांच कर सकती है कि संबंधित जमीनों की बिक्री के लिए किसे अधिकार प्राप्त था, अनुबंध के समय जमीनों की वास्तविक स्थिति क्या थी और रकम लेने के बाद रजिस्ट्री क्यों नहीं हुई। इसके साथ ही पूर्व में किए गए अन्य जमीन सौदों और संभावित शिकायतों की जानकारी भी जांच का हिस्सा हो सकती है।

फिलहाल, मामले में शिकायतकर्ता के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी। पुलिस की जांच के निष्कर्ष यह तय करने में अहम होंगे कि जमीन के सौदे में किन नियमों का उल्लंघन हुआ और कथित धोखाधड़ी में किन लोगों की क्या भूमिका रही।