उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) के जंगल में फिर दिखा बाघ, ट्रैप कैमरे में कैद हुई तस्वीर..

स्वच्छ पर्यावरण और सुरक्षित प्राकृतिक आवास से वन्यजीवों की बढ़ रही मौजूदगी, वन विभाग ने ग्रामीणों को जंगल में नही जाने की दी सलाह..

गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) के जंगलों में एक बार फिर बाघ की मौजूदगी दर्ज की गई है। 9 अक्टूबर की सुबह ट्रैप कैमरे में बाघ की तस्वीर कैद हुई। इसके बाद वन विभाग सतर्क हो गया है। अधिकारियों और मैदानी कर्मचारियों ने आसपास के ग्रामीणों को जंगल में जाने से बचने की सलाह दी है। वही, वन विभाग की टीम बाघ की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही है।

ट्रैप कैमरे में बाघ की तस्वीर सामने आना वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जंगल में बाघ जैसे बड़े वन्यजीव की मौजूदगी इस बात की ओर इशारा करती है कि USTR का वन क्षेत्र में वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और उनकी आवाजाही के लिए उपयुक्त है। वन विभाग को वन्यजीवों की बढ़ती मौजूदगी को देखते हुए निगरानी करना भी जरूरी है। हालांकि, केवल एक तस्वीर के आधार पर बाघों की संख्या बढ़ने या जंगल में स्थायी रूप से बसने का निष्कर्ष नही निकाला जा सकता।

जंगल में बाघ की मौजूदगी, ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह..

बाघ की तस्वीर सामने आने के बाद वन विभाग ने आसपास के ग्रामीणों को सतर्क रहने के लिए कहा है। जंगल में वनोपज के लिए जाने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। ग्रामीणों को अकेले जंगल की ओर नही जाने और वन विभाग के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।

वन विभाग बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ट्रैप कैमरों और मैदानी निगरानी का सहारा ले रहा है। कैमरे में दर्ज तस्वीरों के आधार पर वन्यजीव की आवाजाही वाले क्षेत्रों की जानकारी जुटाई जा सकती है। इससे वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ-साथ आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क करने में भी मदद मिलती है।

प्राकृतिक वातावरण वन्यजीवों के लिए अहम..

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व अपनी जैव विविधता और वन संपदा के लिए जाना जाता है। यहां के जंगल अनेक प्रकार के वन्यजीवों और पक्षियों को प्राकृतिक आवास उपलब्ध कराते हैं। वन क्षेत्र में पानी, भोजन, सुरक्षित आवास और वन्यजीवों के आने-जाने के रास्ते बने रहना उनके संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है।

बाघ की तस्वीर सामने आने से एक बार फिर इस क्षेत्र के प्राकृतिक महत्व पर ध्यान गया है। स्वच्छ पर्यावरण, जंगलों की सुरक्षा और मानव दखल में कमी वन्यजीवों के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करने में मददगार हो सकती हैं।

वन्यजीव संरक्षण के साथ पर्यटन की भी संभावनाएं..

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व का प्राकृतिक परिवेश पर्यटन के लिहाज से भी आकर्षण का केंद्र बनते जा रहा है। घने जंगल, प्राकृतिक दृश्य, जैव विविधता और वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने की संभावना प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों को आकर्षित कर सकती है।

यहां प्रकृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने की संभावनाएं हैं। इसके लिए जरूरी है कि पर्यटन गतिविधियां वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार और उनके आवास को प्रभावित न करें। पर्यटकों को निर्धारित मार्गों, प्रवेश संबंधी नियमों और वन विभाग के निर्देशों का पालन करना चाहिए। बाघ की मौजूदगी को रोमांच के रूप में देखने के बजाय उसके संरक्षण और सुरक्षित दूरी बनाए रखने को प्राथमिकता देना जरूरी है।

संरक्षण और जनसुरक्षा, दोनो पर नजर..

USTR में बाघ की तस्वीर सामने आने के बाद वन विभाग के सामने वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीणों की सुरक्षा, दोनों महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं। ग्रामीणों को समय पर जानकारी देना, कैमरों से निगरानी करना और वन्यजीवों की गतिविधियों के अनुरूप सतर्कता बरतना जरूरी है।

बाघ की मौजूदगी इस क्षेत्र के जंगलों के प्राकृतिक महत्व को फिर रेखांकित करती है। यदि जंगलों, जलस्रोतों और वन्यजीवों के आवास को सुरक्षित रखने के प्रयास लगातार जारी रहते हैं, तो इससे जैव विविधता के संरक्षण को मजबूती मिल सकती है। साथ ही, स्थानीय समुदायों की भागीदारी से प्रकृति संरक्षण और जिम्मेदार पर्यटन के बीच बेहतर संतुलन बनाया जा सकता है।