बिलासपुर।बिलासपुर नगर निगम की सीमा से लगे ग्राम पंचायत महमंद में भू-माफियाओं का अपना अलग ही सिस्टम चल रहा है। कागजों पर भले ही प्रशासन ने अवैध प्लाटिंग पर पाबंदी लगा रखी हो, लेकिन जमीन पर हकीकत बिल्कुल उलट है। जिन खेतों में कुछ समय पहले तक फसलें लहलहाती थीं, वहां आज जेसीबी मशीनें दौड़ रही हैं। करीब 35 एकड़ की उपजाऊ कृषि भूमि को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर रियल एस्टेट का बड़ा बाजार सजा दिया गया है। ताज्जुब की बात यह है कि राजस्व विभाग के जिम्मेदार अफसरों को इतनी बड़ी मशीनें और कटते हुए प्लॉट नजर ही नहीं आ रहे, मानो उन्होंने आंखों पर पट्टी बांध रखी हो।

बिना मंजूरी कट रहे प्लॉट, सुविधाओं का अता-पता नहीं..
जानकारी के मुताबिक, बिना टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (T&CP) की मंजूरी लिए जितेंद्र राय और उनके पार्टनर मिलकर खुलेआम प्लॉट बेच रहे हैं। ग्राहकों को भविष्य की एक आलीशान कॉलोनी का सुनहरा सपना दिखाया जा रहा है। अगर आप मौके पर जाकर देखेंगे, तो बिल्डरों ने मिट्टी डालकर सड़कें जैसी आकृति जरूर बना दी है, ताकि देखने वालों को लगे कि कॉलोनी बस रही है। लेकिन वहां न तो बिजली का कोई खंभा लगा है, न ही पानी की निकासी के लिए नाली बनी है। अन्य बुनियादी सुविधाओं की बात करना तो फिलहाल बेमानी ही होगा। ऐसे में जो लोग यहां अपना घर बनाने की सोच रहे हैं, उन्हें आगे चलकर भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
नियम-कायदे मानो छुट्टी पर गए हों..
सरकारी नियम बताते हैं कि किसी भी खेती वाली जमीन पर रिहायशी कॉलोनी बसाने से पहले उसका लैंड यूज (भूमि उपयोग) बदलवाना पड़ता है। इसके लिए कई विभागों की एनओसी जरूरी होती है। पर महमंद में चल रहे इस खेल में नियम-कायदे शायद लंबी छुट्टी पर चले गए हैं। बिना कोई वैधानिक प्रक्रिया पूरी किए प्लॉटिंग का काम धड़ल्ले से जारी है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि पटवारी, आरआई और राजस्व महकमे की नजरों से बचकर इतने बड़े पैमाने पर मशीनें चलना और सड़कें बनाना मुमकिन नहीं है। लोगों को शक है कि इस पूरे खेल में मैदानी अफसरों की भी मौन सहमति शामिल है, वरना इतनी बड़ी कार्रवाई बिना रोक-टोक के कैसे हो सकती है?
एसडीएम ने कहा – होगी सख्त कार्रवाई..
जब इस पूरे मामले की खबर ऊपर तक पहुंची, तो एसडीएम मनीष साहू का बयान सामने आया। उन्होंने कहा कि बिना अनुमति के प्लॉट काटना नियमों का खुला उल्लंघन है। प्रशासन इस पूरे मामले की बारीकी से जांच करेगा और अगर अवैध प्लाटिंग की पुष्टि होती है, तो जमीन की खरीद-बिक्री पर तुरंत रोक लगाकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
खरीदारों को रहना होगा सतर्क..
प्रॉपर्टी के जानकारों का मानना है कि बिना टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (T&CP) अप्रूवल वाले प्लॉट खरीदना आगे चलकर बड़ा सिरदर्द बन सकता है। ऐसी जगहों पर न तो विकास की कोई गारंटी होती है, न ही बुनियादी सुविधाएं मिलने का भरोसा। ऐसे में लोगों को अपनी जीवन भर की कमाई फंसाने से पहले सभी कागजातों की ठीक से पड़ताल कर लेनी चाहिए। महमंद में जिस तेजी से खेत गायब हो रहे हैं, उससे प्रशासनिक मॉनिटरिंग की कलाई खुल जाती है।
अगर वक्त रहते इस मनमानी पर ब्रेक नहीं लगा, तो आने वाले दिनों में इन अवैध कॉलोनियों में रहने वाले लोग जब सड़क और नाली के लिए प्रदर्शन करेंगे, तब इसका पूरा बोझ सरकारी मशीनरी पर ही आएगा।







