मैनपाट की वादियों में बाइकर्स का शोर : पर्यटकों,ग्रामीणों और वन्यजीवों के लिए बढ़ी मुसीबत..मॉडिफाइड साइलेंसर और खतरनाक स्टंट पर रोक की मांग, हाथी प्रभावित क्षेत्र में बढ़ी चिंता.. देखें वॉयरल वीडियो..

जंगलों में गूंज रहा मॉडिफाइड साइलेंसर का शोर, वन्यजीवों पर पड़ रहा असर..

अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मैनपाट इन दिनों बारिश के मौसम में अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण पर्यटकों की पहली पसंद बना हुआ है। पहाड़ियों पर बिछी हरियाली, झरनों का कलकल बहता पानी, बादलों से घिरी घाटियां और ठंडी हवाएं पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। लेकिन इसी खूबसूरत माहौल के बीच कुछ बाइकर्स गैंग की लापरवाही स्थानीय लोगों, पर्यटकों और वन्यजीवों के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है।

ग्रामीणों के अनुसार, छुट्टियों और सप्ताहांत के दौरान बड़ी संख्या में युवा मॉडिफाइड साइलेंसर वाली बाइकों के साथ मैनपाट पहुंच रहे हैं। इनमें से कुछ युवक जंगल और पर्यटन स्थलों के आसपास बाइक खड़ी कर तेज आवाज निकालते हैं, रेसिंग करते हैं और स्टंटबाजी का प्रदर्शन करते हैं। साइलेंसर से निकलने वाली कर्कश आवाजें कई किलोमीटर दूर तक सुनाई देती हैं, जिससे क्षेत्र की प्राकृतिक शांति प्रभावित हो रही है।

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ग्रामीणों का कहना है कि मैनपाट केवल एक पर्यटन स्थल ही नहीं, बल्कि घने जंगलों और वन्यजीवों का महत्वपूर्ण आवास क्षेत्र भी है। यहां हाथियों की आवाजाही लगातार बनी रहती है और कई हिस्से हाथी प्रभावित क्षेत्र के रूप में चिन्हित हैं। ऐसे में तेज आवाज और शोर-शराबा वन्यजीवों के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंकाएं भी बढ़ा सकता है।

पर्यटकों ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि लोग मैनपाट की शांत वादियों और प्राकृतिक वातावरण का आनंद लेने आते हैं, लेकिन कुछ बाइकर्स द्वारा किए जाने वाले शोर और स्टंट से पर्यटन स्थल का माहौल बिगड़ रहा है। कई परिवारों और वरिष्ठ नागरिकों ने भी ऐसे व्यवहार को अनुचित बताते हुए प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है।

स्थानीय व्यवसायियों का कहना है कि मैनपाट की पहचान प्रकृति, शांति और स्वच्छ वातावरण से है। यदि इस तरह की गतिविधियों पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो इसका नकारात्मक असर पर्यटन पर पड़ सकता है। होटल संचालकों, दुकानदारों और पर्यटन से जुड़े लोगों ने भी प्रशासन से विशेष अभियान चलाने की मांग की है।

इधर, लगातार सामने आ रही घटनाओं के बावजूद ग्रामीणों का आरोप है कि मॉडिफाइड साइलेंसर और नियमों का उल्लंघन करने वाले बाइकर्स के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। इसे लेकर वन विभाग और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि समय-समय पर जांच अभियान चलाकर ऐसे वाहनों की पहचान की जानी चाहिए और मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन, वन विभाग और पुलिस विभाग से संयुक्त अभियान चलाने की मांग की है। उनका कहना है कि पर्यटन स्थलों और जंगल क्षेत्रों में स्टंटबाजी, रेसिंग तथा मॉडिफाइड साइलेंसर के उपयोग पर सख्ती से रोक लगाई जाए, ताकि मैनपाट की प्राकृतिक शांति, पर्यटकों की सुरक्षा और वन्यजीवों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

मैनपाट की खूबसूरती उसकी प्राकृतिक शांति और पर्यावरणीय संतुलन में बसती है। ऐसे में ग्रामीणों का मानना है कि पर्यटन के नाम पर नियमों की अनदेखी करने वालों पर सख्त कार्रवाई ही इस अनमोल धरोहर को सुरक्षित रख सकती है।