रायपुर। छत्तीसगढ़ में पुरानी गाड़ियों में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट यानी एचएसआरपी लगाने का काम काफी धीमी गति से चल रहा है।योजना शुरू हुए लगभग डेढ़ साल हो चुके हैं। इसके बाद भी प्रदेश की 80 प्रतिशत से अधिक पुरानी गाड़ियों में अब तक नई नंबर प्लेट नहीं लग पाई है। तय समय में यह अभियान पूरा होने पर अब सवाल उठने लगे हैं।

परिवहन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो स्थिति स्पष्ट होती है। प्रदेश में कुल 52 लाख 48 हजार 476 पुरानी गाड़ियां रजिस्टर्ड हैं। इनमें से अब तक केवल 10 लाख 72 हजार 553 गाड़ियों में ही नई नंबर प्लेट लग सकी है। राजधानी रायपुर का हाल भी कुछ ऐसा ही है। रायपुर जिले में 13 लाख 34 हजार 483 पुराने वाहन रजिस्टर्ड हैं। इसके मुकाबले अब तक सिर्फ 3 लाख 6 हजार वाहनों में ही हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाई जा सकी है। इसका मतलब है कि राजधानी में भी केवल 24 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है।
इस काम को प्रदेश में दो जोन में बांटकर किया जा रहा है। दो अलग अलग कंपनियों को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। जोन ए में रियल मेजॉन इंडिया लिमिटेड काम कर रही है। यहां 26 लाख 21 हजार गाड़ियों में से 7 लाख 46 हजार आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 6 लाख 16 हजार गाड़ियों में प्लेट लगाई जा चुकी है। यह कुल वाहनों का करीब 23 प्रतिशत है। वहीं जोन बी का काम रोसमर्टा सेफ्टी सिस्टम लिमिटेड के पास है। इस जोन में 26 लाख 26 हजार गाड़ियां हैं। यहां 5 लाख 66 हजार आवेदन मिले और 4 लाख 55 हजार गाड़ियों में प्लेट लगाई गई है। यह कुल संख्या का सिर्फ 17 प्रतिशत है।
सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के निर्देश के बाद 1 अप्रैल 2019 से पहले रजिस्टर्ड सभी वाहनों में यह नंबर प्लेट लगाना अनिवार्य किया गया है। यह सिर्फ एक नंबर प्लेट नहीं बल्कि वाहन की डिजिटल पहचान का माध्यम है। एल्युमिनियम से बनी इस प्लेट में क्रोमियम आधारित अशोक चक्र होलोग्राम नीले रंग का आईएनडी मार्क और 10 अंकों का यूनिक लेजर सीरियल नंबर होता है। इसमें एक विशेष स्नैप लॉक लगा होता है जिसे बिना तोड़े हटाया नहीं जा सकता।
इस प्रणाली से वाहन चोरी रोकने फर्जी नंबर प्लेट की पहचान करने और ई चालान की प्रक्रिया आसान होती है। डिजिटल ट्रैफिक मॉनिटरिंग और इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम को भी इससे मदद मिलती है। इसके बावजूद अभियान की धीमी रफ्तार परिवहन विभाग के लिए चुनौती बनी हुई है। फर्जी एचएसआरपी प्लेट लगाने की शिकायतें भी लगातार मिलती रही हैं।
एचएसआरपी लगवाने के लिए सरकार ने शुल्क निर्धारित किया है। दोपहिया वाहनों के लिए 365 रुपये 80 पैसे और तीनपहिया वाहनों के लिए 427 रुपये 16 पैसे देने होते हैं। कार और हल्के मोटर वाहनों के लिए 656 रुपये 8 पैसे जबकि अन्य हल्के वाहनों का शुल्क 705 रुपये 64 पैसे तय किया गया है। वर्ष 2019 से पहले रजिस्टर्ड गाड़ियों में अधिकृत डीलर के माध्यम से प्लेट लगवाने पर 100 रुपये अतिरिक्त इंस्टॉलेशन शुल्क देना होगा। घर पहुंचकर प्लेट लगाने की सुविधा लेने पर अलग से अतिरिक्त शुल्क भी लगता है।
परिवहन विभाग के अपर आयुक्त डी रविशंकर ने बताया कि अधिकृत वेंडर कंपनियों को जल्द से जल्द सभी पात्र वाहनों में नंबर प्लेट लगाने के निर्देश दिए गए हैं। काम में तेजी लाने तथा वाहन मालिकों की सुविधा के लिए विभिन्न स्थानों पर अतिरिक्त कैम्प भी लगाए जा रहे हैं।







