

गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के कोटमी बाजार में हुई सर्राफा व्यापारी प्रदीप सोनी की हत्या और लूट के मामले में पुलिस के हाथ एक बहुत बड़ी कामयाबी लगी है। यह कामयाबी कातिलों को पकड़ने की नहीं है बल्कि उनके छोड़े गए कचरे को बटोरने की है। पुलिस को घटनास्थल से करीब आठ किलोमीटर दूर बोदराटोला तिलोरा के जंगल में ज्वेलरी के खाली डिब्बे जला हुआ थैला और कुछ बिखरा हुआ सामान मिला है।

सात दिन का लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी असली कातिल फरार हैं और हमारी तेज तर्रार पुलिस अब जली हुई राख और खाली डिब्बों में सुराग ढूंढने का काम कर रही है। जांच में जुटी पुलिस का शानदार दिमाग यह कह रहा है कि वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी रात में इसी घने जंगल में आराम से रुके थे। उन्होंने वहां बिना किसी खौफ के रात बिताई सबूत मिटाने के लिए आग जलाई अपना काम निपटाया और सुबह होते ही पुलिस को ठेंगा दिखाते हुए रफूचक्कर हो गए।
पुलिस अब बरामद किए गए इन जले और बिखरे हुए सामानों की बड़ी बारीकी से जांच कर रही है ताकि शायद उस राख से कोई चमत्कारिक सुराग निकल आए और आरोपियों तक पहुंचने का कोई पुख्ता जरिया मिल सके। हत्या के पूरे एक हफ्ते बाद भी कातिल पुलिस की पकड़ से बहुत दूर हैं।
आपको याद दिला दें कि छब्बीस मई को कोटमी बाजार में सरेआम गुंडों ने सर्राफा व्यापारी प्रदीप सोनी की छाती में गोली उतार दी थी। कोटमी साप्ताहिक बाजार में प्रदीप ने अपनी दुकान लगाई थी। शाम करीब सात बजे जब वे दुकान बढ़ाकर घर जाने की तैयारी कर रहे थे तभी एक पल्सर बाइक पर तीन बदमाश वहां आ धमके।
बदमाशों ने उनसे सोने चांदी से भरा बैग छीनने की कोशिश की। प्रदीप ने अपनी खून पसीने की कमाई बचाने के लिए जब विरोध किया तो कातिलों ने बहुत करीब से उनके सीने पर गोली मार दी और बैग लेकर भाग निकले। सूचना मिलते ही कोटमी चौकी पुलिस मौके पर पहुंची। गंभीर रूप से घायल प्रदीप सोनी को तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में भी साफ दिखा था कि प्रदीप सोनी मंगलवार सुबह घर से सामान लेकर कैसे हंसी खुशी निकले थे। उन्हें क्या पता था कि यह उनका आखिरी सफर होगा। वे हर मंगलवार नियम से हनुमान जी के मंदिर जाते थे पर उस मनहूस दिन मंदिर पहुंचने से पहले ही लुटेरों ने उनकी जान ले ली।
घटना के तुरंत बाद पुलिस ने खूब फुर्ती दिखाने का नाटक किया। मौके से खून के धब्बे और खाली कारतूस जमा करके घटनास्थल को सील कर दिया गया। इसके बाद पूरे छह जिलों में तगड़ी नाकेबंदी का दावा भी किया गया। बिलासपुर कोरबा मनेन्द्रगढ़ अनूपपुर डिंडोरी और कोरिया जिले की सीमाओं पर पुलिस तैनात कर दी गई। इतनी भारी भरकम नाकेबंदी के बावजूद कातिल बड़े आराम से पुलिस के जाल से निकल गए।
इधर इस पूरे मामले पर राजनीति भी पूरी तरह से गरमा गई है। कांग्रेस ने प्रदेश की लचर कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ा दी हैं। कांग्रेस नेताओं का साफ कहना है कि छत्तीसगढ़ में अब कोई कानून व्यवस्था नहीं बची है यहां सिर्फ अपराधियों का राज चल रहा है। पूर्व विधायक शैलेश पांडेय ने कहा कि पेंड्रा में हुई इस निर्मम हत्या ने आम लोगों और व्यापारियों के दिल में भारी खौफ पैदा कर दिया है। अपराधियों को जैसे खुली छूट मिली हुई है और पुलिस बस राजनीतिक दबाव के चलते हाथ पर हाथ धरे बैठी है।
अब आम जनता यही सोच रही है कि क्या पुलिस कभी उन असली कातिलों तक पहुंच पाएगी या फिर यूं ही जंगल में राख और डिब्बे खोजती रहेगी।



