क्रेडा की नई संविदा भर्ती पर हाईकोर्ट की बड़ी रोक : पुराने कर्मचारियों की जगह नए संविदाकर्मियों की नियुक्ति को चुनौती, ऊर्जा सचिव सहित अफसरों को नोटिस..

बिलासपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) को हाईकोर्ट से एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने क्रेडा द्वारा ‘सेवाकर्ता इकाई’ के पदों पर निकाली गई नई संविदा भर्ती प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से अंतरिम रोक लगा दी है। जस्टिस बी.डी. गुरु की सिंगल बेंच ने मामले को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए ऊर्जा विभाग के सचिव, क्रेडा के अधीक्षण अभियंता, जोनल कार्यालय के कार्यपालन अभियंता और सहायक अभियंता को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

क्या है पूरा मामला?

यह याचिका रायपुर के कमलेश कुमार साहू सहित 9, राजनांदगांव के योगेश कुमार साहू सहित 6, बेमेतरा के लीलाधर साहू सहित 6, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई के नरेंद्र कुमार साहू सहित 5 और जशपुर के गणेश कुमार साहू सहित कुल 26 सेवाकर्ता इकाइयों ने अधिवक्ता नरेंद्र मेहेर के माध्यम से दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनकी नियुक्ति वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए संविदा के आधार पर हुई थी और 31 मार्च 2026 को उनका अनुबंध समाप्त हो गया। आरोप है कि क्रेडा प्रबंधन ने उनकी सेवा अवधि बढ़ाने के बजाय उन्हें हटा दिया और उन्हीं पदों पर नए लोगों की भर्ती के लिए नया विज्ञापन निकाल दिया।

कोर्ट में दी गई यह अहम दलील..

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने जोरदार पैरवी की। उन्होंने कोर्ट को बताया कि कानूनन किसी भी संविदा या अस्थायी कर्मचारी को सिर्फ इसलिए नौकरी से नहीं निकाला जा सकता कि उसकी जगह किसी दूसरे संविदा या अस्थायी कर्मचारी को रखा जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि संविदाकर्मियों को केवल तभी हटाया जा सकता है, जब उनके स्थान पर किसी की नियमित (रेगुलर) नियुक्ति की जा रही हो।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया गया हवाला..

वरिष्ठ अधिवक्ता ने अपनी दलीलों को मजबूती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट के ‘मनीष गुप्ता बनाम अध्यक्ष जनभागीदारी समिति’ फैसले के साथ-साथ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के ‘मंजू गुप्ता बनाम छत्तीसगढ़ शासन’ और ‘अंकिता नामदेव’ प्रकरणों के न्यायिक निर्णयों का हवाला दिया। इन तर्कों से सहमत होते हुए कोर्ट ने नई भर्ती पर स्टे दे दिया है।

पहले भी टेक्नीशियन भर्ती पर लग चुकी है रोक..

सुनवाई में यह बात भी सामने आई कि क्रेडा प्रबंधन की यह कार्यप्रणाली नई नहीं है। इससे पहले भी विभाग ने टेक्नीशियन के संविदा पदों पर पुरानी टीम को हटाकर नई भर्ती का विज्ञापन निकाला था, जिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगाई थी। अब ‘सेवाकर्ता इकाई’ के मामले में भी कोर्ट के इस फैसले से पुराने संविदा कर्मचारियों को बड़ी अंतरिम राहत मिली है।