‘जनसुनवाई’ या ‘धनसुनवाई’ ? बिलासपुर के जोंधरा रेतघाट में सेटिंग का बड़ा खेल, जिला पंचायत सदस्य के प्रतिनिधि का पैसे लेते वीडियो वायरल..

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में रेत खदानों की पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए होने वाली ‘जनसुनवाई’ अब ‘धनसुनवाई’ और सेटिंग के बड़े खेल का अड्डा बनती जा रही है। बिलासपुर जिले के मस्तूरी विकासखंड के अंतर्गत पचपेड़ी तहसील के जोंधरा (ग्राम कुकुर्दीकला) में प्रस्तावित रेतघाट को लेकर आयोजित जनसुनवाई भारी विवादों में घिर गई है। जनहित और पर्यावरण को दरकिनार कर इस पूरी प्रक्रिया को चंद मिनटों में समेटने और खुलेआम सौदेबाजी करने का एक सनसनीखेज वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से तैर रहा है। वायरल वीडियो में स्थानीय जिला पंचायत सदस्य के प्रतिनिधि कथित तौर पर पैसे का लेनदेन करते दिखाई दे रहे हैं, जिसने प्रशासन की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या था प्रोजेक्ट और कैसे हुई ‘फॉर्मेलिटी’?

बुधवार को ग्राम कुकुर्दीकला के धान उपार्जन केंद्र मैदान में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल (बिलासपुर) द्वारा यह लोक सुनवाई आयोजित की गई थी। यह जनसुनवाई विकास सिंह (कुकुर्दीकला सैंड माइन) के नाम से प्रस्तावित 11 हेक्टेयर क्षेत्र में रेत खनन के लिए रखी गई थी, जिसकी वार्षिक उत्खनन क्षमता 99,000 घनमीटर बताई गई है। नियमतः यह समय सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक तय था। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि जनसुनवाई महज एक दिखावा थी। शुरू होने के कुछ ही देर बाद इसे आनन-फानन में स्थगित कर दिया गया। जनता की राय और आपत्तियों को सुनने के बजाय पैसे का लेनदेन कर जनहित के अहम मुद्दों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया।

चंद्र प्रकाश सूर्या का वायरल वीडियो में दिख रहा सेटिंग का खेल..

इस पूरे मामले में भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा सबूत वह वीडियो है जो सोशल मीडिया पर वायरल है। इस वीडियो में जिला पंचायत सदस्य के प्रतिनिधि खुलेआम पैसे लेते और लेनदेन की बात करते नजर आ रहे हैं। इस दृश्य ने यह साफ कर दिया है कि जनसुनवाई की आड़ में पर्दे के पीछे सौदेबाजी की जा रही थी। स्थानीय लोगों का दावा है कि विरोध के सुरों को दबाने के लिए रातों-रात लोगों के घरों में जाकर उन्हें प्रभावित करने और मैनेज करने का प्रयास किया गया।

फर्जी पर्चे और भोली-भाली महिलाओं का इस्तेमाल..

मामला सिर्फ रिश्वतखोरी तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों को गुमराह करने के लिए जनसुनवाई में बिना किसी हस्ताक्षर और बिना किसी जवाबदार के नाम वाले फर्जी पर्चे बांटे गए। इन बेबुनियाद पर्चों में श्रमिकों को काम दिलाने का झूठा प्रलोभन दिया गया था। भीड़ दिखाने के लिए बड़ी संख्या में भोली-भाली महिलाओं का इस्तेमाल किया गया। मौके पर मौजूद महिला केकती बाई ने सरेआम खुलासा किया कि गांव के जनप्रतिनिधि उन्हें पैसे देने और खाना खिलाने का लालच देकर जनसुनवाई में लेकर आए थे।

प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठते तीखे सवाल..

इस पूरी घटना ने बिलासपुर जिला प्रशासन और पर्यावरण संरक्षण मंडल के अफसरों की भूमिका पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अगर जनसुनवाई जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में जनप्रतिनिधि ही सरेआम भ्रष्टाचार में लिप्त हैं, तो आम जनता का सिस्टम से विश्वास उठना तय है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जिला प्रशासन इस वायरल वीडियो और फर्जीवाड़े को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच करेगा ? या फिर रेत कारोबारियों के रसूख के आगे फाइलों को दबाकर यह मामला भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा ?

डिस्क्लेमर..

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे जिला पंचायत सदस्य के प्रतिनिधि द्वारा पैसे के लेनदेन वाले इस वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि हम नहीं करते हैं। यह खबर वायरल वीडियो, मौके के हालात और स्थानीय ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर लिखी गई है।