बैंकिंग प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और तत्परता से ही मिलेगी स्थानीय उद्योगों को गति..

बिलासपुर। जिले में सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यमों को सुदृढ़ बनाने और शासकीय योजनाओं के तहत ऋण स्वीकृति में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने बैंक अधिकारियों को स्पष्ट हिदायत दी है कि पात्र आवेदनों और एमएसएमई से जुड़े लंबित ऋण प्रकरणों का समयबद्ध तरीके से निराकरण सुनिश्चित किया जाए।

शहर के होटल सिटी में जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र द्वारा रेजिंग एक्सीलरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेंस यानी रैम्प कार्यक्रम के तहत उद्योग बैंकर संवाद कार्यशाला का आयोजन किया गया था। बैठक की अध्यक्षता करते हुए कलेक्टर ने बैंकों में लंबित प्रकरणों की बिंदुवार समीक्षा की।

उन्होंने स्पष्ट किया कि बैंकिंग प्रक्रियाओं में जब तक पारदर्शिता और तेजी नहीं आएगी तब तक स्थानीय उद्योगों और युवाओं के स्वरोजगार को सही दिशा नहीं मिल सकेगी। इस दौरान उन्होंने उद्योग विभाग और बैंकों के बीच नियमित समन्वय बैठकें आयोजित करने पर भी विशेष बल दिया।

संवाद के दौरान पीएमईजीपी पीएमएफएमई और महिला उद्यमिता से जुड़े मामलों पर गहराई से मंथन हुआ। डिस्ट्रिक्ट रिसोर्स पर्सन ने हितग्राहियों को मैदानी स्तर पर आ रही व्यावहारिक समस्याओं से अधिकारियों को अवगत कराया। इस पर उद्योग संघ के प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि बैंक अधिकारी स्वयं खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों का औद्योगिक भ्रमण करें। इससे उन्हें जमीनी स्तर पर काम की प्रगति का सटीक आकलन करने में मदद मिलेगी।

समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए विभिन्न राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों के प्रतिनिधियों ने भरोसा दिलाया कि जिन प्रकरणों में सभी जरूरी दस्तावेज पूर्ण हैं उन्हें बिना किसी विलंब के तत्काल स्वीकृत किया जाएगा। जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के मुख्य महाप्रबंधक ने बताया कि इस तरह के सीधे संवाद का मुख्य उद्देश्य उद्यमियों और बैंकों के बीच की खाई को पाटना है ताकि जिले में औद्योगिक विकास को निर्बाध गति मिलती रहे।

इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल छत्तीसगढ़ लघु उद्योग संघ के अध्यक्ष हरीश केडिया जिला उद्योग संघ के महासचिव शरद सक्सेना सीजीएम सीएस टेकाम और जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक दिनेश उरांव समेत बड़ी संख्या में स्थानीय उद्यमी उपस्थित थे।