उदंती-सीता नदी टाइगर रिजर्व में फिर गूंजी ‘जंगल के राजा’ की दहाड़, 10 महीने में दूसरी बार कैमरे में कैद हुआ बाघ..

गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले स्थित उदंती-सीता नदी टाइगर रिजर्व से वन्यजीव प्रेमियों के लिए बड़ी और उत्साहजनक खबर सामने आई है। लंबे समय बाद इस अभयारण्य में बाघों की सक्रिय मौजूदगी के संकेत लगातार मिल रहे हैं। हाल ही में रिजर्व क्षेत्र में लगाए गए ट्रैप कैमरों में एक और बाघ कैद हुआ है, जिससे वन विभाग और अभयारण्य प्रबंधन में खुशी की लहर है।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार पिछले दो वर्षों से अभयारण्य में वन्यजीवों के लिए बेहतर और सुरक्षित वातावरण तैयार करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे। जंगल की सुरक्षा मजबूत करने, अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने की दिशा में कई कदम उठाए गए। अब इन प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आने लगा है।

टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वरुण जैन ने बताया कि फिलहाल रिजर्व क्षेत्र में कम से कम तीन बाघों की मौजूदगी के संकेत मिले हैं। इनमें से एक बाघ ट्रैप कैमरे में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया है, जबकि दूसरे बाघ के मल (स्कैट) के नमूने भी मिले हैं, जिससे उसकी मौजूदगी की पुष्टि हुई है।

उन्होंने बताया कि पिछले 10 महीनों के भीतर यह दूसरी बार है जब किसी बाघ की तस्वीर ट्रैप कैमरे में कैद हुई है। करीब 50 दिन पहले जंगल के 16 अलग-अलग स्थानों पर इस नए बाघ के पगमार्क (पंजों के निशान) मिले थे। इससे वन विभाग को आशंका थी कि यह एक नया बाघ है। अब कैमरे में कैद हुई तस्वीर से इसकी पुष्टि हो गई है कि वही बाघ इस क्षेत्र में सक्रिय है। बताया जा रहा है कि यह तस्वीर 5 मार्च 2026 को दिन के समय ट्रैप कैमरे में कैप्चर हुई थी।

इस बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वन विभाग ने पहले 10 स्थानों पर ट्रैप कैमरे लगाए थे। उन्हीं कैमरों में से एक में इस दूसरे बाघ की तस्वीर कैद हुई है। अब इस क्षेत्र में और अधिक कैमरे लगाए जा रहे हैं ताकि बाघ की स्पष्ट तस्वीरें और उसकी गतिविधियों की पूरी जानकारी मिल सके।

करीब 1852 वर्ग किलोमीटर में फैले इस टाइगर रिजर्व के कोर जोन में 51 गांव और बफर जोन में 59 गांव स्थित हैं। इसके बावजूद यहां के जंगलों में वन्यजीवों के लिए पर्याप्त प्राकृतिक संसाधन और सुरक्षित वातावरण मौजूद है। विशेष रूप से तौरेंगा और अरसी कन्हार रेंज को वन्यजीवों के लिए अनुकूल क्षेत्र माना जाता है, जहां अक्सर जंगली जानवरों की गतिविधियां देखी जाती हैं।

अभयारण्य में बाघ की लगातार मिल रही मौजूदगी को वन्यजीव संरक्षण के लिए बेहद सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह संरक्षण के प्रयास जारी रहे, तो आने वाले समय में यहां बाघों की संख्या में और बढ़ोतरी हो सकती है और यह क्षेत्र फिर से बाघों का सुरक्षित आश्रय बन सकता है।

वन विभाग के अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि बाघ की वापसी से इस क्षेत्र की जैव विविधता और मजबूत होगी तथा वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को नई दिशा और ऊर्जा मिलेगी।