

बिलासपुर। प्रकृति के यूनिवर्सल नियमों का अक्षरशः पालन कर मनुष्य न केवल शारीरिक व मानसिक रोगों से मुक्त हो सकता है, बल्कि आपसी तनाव, संघर्ष और अशांति से बाहर निकलकर शांतिपूर्ण एवं आनंदमय जीवन जीते हुए मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर हो सकता है। यह विचार सन टू ह्यूमन फाउंडेशन के संस्थापक परम पूज्य परम आलय जी ने इंदौर के समीप आयोजित गुप्त नवरात्रि विशेष साधना शिविर में व्यक्त किए।


इंदौर के पास 17 एकड़ के सुरम्य, प्राकृतिक एवं आधुनिक सुख-सुविधाओं से युक्त वातावरण में आयोजित इस शिविर में साधकों को प्रतिदिन सुबह सतत साधना, प्राकृतिक फलों, बीजों एवं मेवों से बने नाश्ते के पश्चात ज्ञानार्जन सत्र में अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त कराया गया। इसके बाद ग्रेविटेशन घटाने और लेविटेशन बढ़ाने वाले शुद्ध, सात्विक व रसपूर्ण भोजन प्रसाद का सेवन कर योगनिद्रा द्वारा शरीर व मन को तरोताजा किया गया।
शिविर में जीवित गुरु के सानिध्य में देश-विदेश के विद्वानों की चर्चित पुस्तकों का पठन, उनके दैनिक जीवन में प्रयोग तथा रात्रि ठीक 9 बजे शून्य के नाद श्रवण के साथ ध्यानपूर्वक निद्रा में प्रवेश कर तन, मन और चेतना को संतुलित करने के साक्षात प्रयोग कराए गए।
देश-विदेश से हजारों साधकों की सहभागिता..
18 से 28 जनवरी तक चले इस नवरात्रि शिविर में बिलासपुर से ललित अग्रवाल, निशा अग्रवाल, नरेश अग्रवाल तथा रायपुर से योगेश अग्रवाल, मुकेश जैन, कैलाश बजाज सहित बिलासपुर, रायपुर के सैकड़ों एवं देश-विदेश से हजारों जिज्ञासु साधकों ने सहभागिता की। शिविर में माँ मैयेत्री, माँ गार्गी, शून्य भैया, जनक आनंद जी, श्रीपति मेहता जी, शिवालय, माँ सहजोबाई, माँ जानकी, माँ प्रार्थना, माँ सरस्वती, माँ परमभक्ति, माँ राधिका, माँ तारिणी सहित देश के कोने-कोने से आए साधकों ने 11 दिनों तक सुबह 3:30 बजे से रात्रि 9 बजे तक सम्यक आहार, सम्यक व्यायाम और सम्यक नींद के माध्यम से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन के प्रयोग किए।
नवमी पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से भावविभोर हुए साधक..
नवमी के अवसर पर साधकों द्वारा विविध नाट्य प्रस्तुतियां मंचित की गईं। ललित अग्रवाल ने बताया कि परम आलय के इस रहस्यमय मंदिर में बिताए गए 18 दिन स्वर्ग से भी अधिक सुंदर और अविस्मरणीय रहे। यहां से लौटने का मन ही नहीं हो रहा, विदाई के समय सभी साधकों की आंखें नम थीं।
अब तक 400 से अधिक शिविरों का सफल आयोजन..

गौरतलब है कि यह संस्था पूर्णतः गैर-व्यावसायिक है और अब तक भारत सहित विदेशों में 400 से अधिक शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। आगामी 25 फरवरी से अहमदाबाद, 6 मार्च से आनंद तथा 18 मार्च से नववर्ष की नवरात्रि पर होने वाले शिविरों के लिए बिलासपुर से सैकड़ों साधकों ने अग्रिम पंजीयन भी करा लिया है।
लाखों लोगों को मिला स्वास्थ्य और जीवन परिवर्तन का लाभ..

शरीर, मन और चेतना को विकसित करने वाले इन प्रयोगों से अब तक लाखों लोगों ने डायबिटीज, हाई बीपी, थायराइड, माइग्रेन, अस्थमा, आर्थराइटिस, तनाव, डिप्रेशन, बेचैनी जैसी शारीरिक एवं मानसिक समस्याओं से मुक्ति पाई है तथा अपने जीवन में प्रेम, आनंद और संतुलन को विकसित किया है।




