

बिलासपुर/जीपीएम।गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) जिले में इन दिनों प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। जनपद पंचायत के अधिकारियों को लेकर ‘अटैचमेंट’ का मामला सुर्खियों में है। आरोप है कि जिले में अधिकारियों पर दबाव बनाकर काम कराने और बात नहीं मानने पर अटैचमेंट या कार्रवाई की धमकी दी जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, जनप्रतिनिधियों और कुछ प्रभावशाली लोगों के निशाने पर जनपद पंचायत के सीईओ हैं। बताया जा रहा है कि कथित भ्रष्टाचार के मामलों में अधिकारियों की संलिप्तता से इंकार करने पर उन्हें अटैचमेंट का सामना करना पड़ रहा है। इस पूरे मामले में यह सवाल भी उठ रहा है कि अटैचमेंट के आदेश जारी करने का अधिकार संबंधित अधिकारी के पास है या नहीं।
इसी बीच जिला कलेक्टर कार्यालय से जुड़ा एक और मामला चर्चा में है। जानकारी के अनुसार, एक इंजीनियर का स्थानांतरण कोटा हो चुका है, लेकिन उसे अब तक जिले में ही रोके रखा गया है। आरोप है कि उसे ‘कमाऊ इंजीनियर’ मानते हुए रोकने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं, एक अन्य कथित फर्जी इंजीनियर के दिव्यांग श्रेणी में होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
जिले में एक बांध पर बनाए गए ‘तैरते रेस्टोरेंट’ को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। करोड़ों रुपये की लागत से बने इस प्रोजेक्ट के भौतिक सत्यापन की मांग उठ रही है। दावा किया जा रहा है कि जांच होने पर बड़े स्तर पर अनियमितता और भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता है।
इसके अलावा, जनपद कार्यालयों में कुछ नेताओं से जुड़े वाहनों के संचालन को लेकर भी दबाव बनाए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि इन गाड़ियों को चलाने के लिए अधिकारियों पर दबाव डाला जाता है और मना करने पर झूठी शिकायतों के जरिए उन्हें सस्पेंड या अटैच कराने की कोशिश की जाती है।
इस पूरे घटनाक्रम से जिले के कई अधिकारी और कर्मचारी प्रभावित बताए जा रहे हैं। लगातार बढ़ते आरोपों और विवादों के बीच अब प्रशासनिक पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।
क्या कहते हैं हालात?
जीपीएम जिले में प्रशासनिक फैसलों और कथित दबाव की राजनीति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब देखना होगा कि इन आरोपों की जांच किस दिशा में जाती है और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।



