रसूखदारों के आगे नतमस्तक प्रशासन : लगातार हादसों के बाद 22 गाड़ियां पकड़कर थपथपाई अपनी पीठ ; अरपा डैम खतरे में..

बिलासपुर।बिलासपुर जिले में रेत और मिट्टी का अवैध खनन धड़ल्ले से जारी है। लगातार हो रहे सड़क हादसों और बेगुनाहों की मौतों के बाद आखिरकार खनिज विभाग की नींद खुल ही गई। विभाग ने अपनी इज्जत बचाने और दिखावे के लिए कुछ ट्रैक्टर और हाइवा जप्त कर लिए हैं। लेकिन यह पूरी कार्रवाई सिर्फ फाइलों का पेट भरने और अपनी पीठ थपथपाने जैसी है। जहां जिले में असली खेल चल रहा है वहां जाने की हिम्मत किसी भी अधिकारी में नहीं है। शहर के बड़े रसूखदारों की खदानों और अवैध ईंट भट्टों पर कार्रवाई करने के नाम पर खनिज विभाग का पसीना छूट रहा है। यह कार्रवाई साफ बताती है कि प्रशासन सिर्फ छोटी मछलियों पर जाल फेंकता है जबकि बड़े मगरमच्छ बेखौफ तैर रहे हैं।

नेता जी के पतिदेव का सुबह का दौरा और खौफ का चश्मा..

कूटी पारा मोपका देवरीखुर्द और दोमुहानी इस समय अवैध खनन के सबसे बड़े हॉटस्पॉट बने हुए हैं। यहां दिन भर में सैकड़ों ट्रैक्टर बिना किसी रोकटोक के रेत और ईंट ढो रहे हैं।इसके बावजूद खनिज विभाग पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों को यह भारी भरकम गाड़ियां नजर नहीं आतीं। शायद उनकी आंखों पर रसूखदारों के खौफ का मोटा चश्मा चढ़ा हुआ है। पूरे शहर में यह चर्चा आम है कि जिले की एक कद्दावर नेता के पतिदेव हर सुबह इन इलाकों में अपना व्यावसायिक दौरा करने पहुंचते हैं।

नेता जी के पतिदेव की सरपरस्ती में ही यह पूरा काला कारोबार फल फूल रहा है। उनकी मौजूदगी ही खनन माफियाओं के लिए सुरक्षा कवच और अधिकारियों के लिए नो एंट्री का बोर्ड बन जाती है। प्रशासन की गाड़ियां इन इलाकों के बाहर से ही वापस लौट जाती हैं। नेता जी के रसूख का ही कमाल है कि इन हॉटस्पॉट पर कोई छापा नहीं पड़ता और सरकारी खजाने को हर दिन लाखों का चूना लगाया जा रहा है।

अरपा डैम की दीवारें हो रहीं कमजोर जल संसाधन विभाग मौन..

अरपा चेक डेम के आसपास बेलगाम अवैध खनन की सबसे बड़ी और भयानक कीमत अरपा डैम को चुकानी पड़ रही है। जल संसाधन विभाग के इस महत्वपूर्ण डैम की दीवारें लगातार हो रहे परिवहन से कमजोर पड़ रही है ।

सुबह होते ही अरपा चेक गेम के रास्ते सैकड़ों की संख्या में ट्रैक्टर गुजरते हैं जिससे अरपा चेक डैम का पूरा ढांचा हिल जाता है। मगर विभाग के कान में जूं नहीं रेंगती।अगर भविष्य में यह डैम टूटता है या कोई बड़ी तबाही आती है तो इसका सीधा जिम्मेदार यही माफिया और उन्हें बचाने वाला सरकारी तंत्र होगा।

डैम के 500 मीटर के बेखौफ पोकलेन मशीनें गरज रही हैं और जिम्मेदार अधिकारी अपने वातानुकूलित कमरों में बैठकर छोटी मोटी कार्रवाइयों की प्रेस रिलीज तैयार करने में व्यस्त हैं। जनता के टैक्स के पैसे से बने इस डैम को माफियाओं की लालच की भेंट चढ़ाया जा रहा है।

हादसों के बाद डैमेज कंट्रोल में जुटा विभाग..

खनिज विभाग ने अपनी लंबी चौड़ी प्रेस रिलीज में बताया है कि कलेक्टर के निर्देश पर 4 -5 और 7 अप्रैल को बड़ी कार्रवाई की गई। खनिज अमले ने रतखंडी धुमा मानिकपुर लावर और राजपुर केकती क्षेत्र में छापे मारे। विभाग के मुताबिक रतखंडी में अरपा नदी से रेत निकालते 10 ट्रैक्टर ट्राली पकड़े गए। धुमा मानिकपुर से मिट्टी खोदते 1 पोकलेन और 4 हाइवा जप्त किए गए।

इसी तरह लावर क्षेत्र से 1 हाइवा और राजपुर केकती से 1 जेसीबी व 4 ट्रैक्टर पकड़े गए। बुतेना इलाके में मुरुम निकालते 1 जेसीबी भी विभाग के हाथ लगी। कुल मिलाकर 22 वाहनों को पकड़कर बेलगहना पुलिस चौकी और लावर जांच चौकी में खड़ा कर दिया गया है। प्रशासन इसे अपनी बहुत बड़ी कामयाबी बता रहा है।

पिक एंड चूज की नीति से बाज आए प्रशासन..

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या सिर्फ इन 22 गाड़ियों के पकड़े जाने से जिले में पनप चुका अवैध खनन का सिंडिकेट खत्म हो जाएगा। इसका जवाब है बिल्कुल नहीं। यह आधी अधूरी कार्रवाई तब हुई है जब सड़कों पर बेकाबू रेत और गिट्टी से भरे भारी वाहन लगातार लोगों की जान ले रहे हैं। जनता में प्रशासन के खिलाफ बढ़ते गुस्से को शांत करने के लिए आनन फानन में यह डैमेज कंट्रोल किया गया है।

जब तक मोपका और देवरीखुर्द जैसे बड़े हॉटस्पॉट पर नेता जी के पतिदेव का दखल रहेगा तब तक कोई भी अधिकारी वहां झांकने तक की जहमत नहीं उठाएगा। प्रशासन को चाहिए कि वह कार्रवाई के नाम पर पिक एंड चूज की नीति छोड़े। अगर वाकई में अवैध खनन रोकना है और लोगों की जान बचानी है तो उन रसूखदारों के गिरेबान तक हाथ डालना होगा जो इस पूरे सिस्टम को अपनी जेब में रखकर चल रहे हैं।

फिलहाल तो खनिज विभाग की यह कार्रवाई ऊंट के मुंह में जीरा और जनता की आंखों में धूल झोंकने से ज्यादा कुछ नहीं है। प्रशासन को तय करना होगा कि वह आम जनता की सुरक्षा के लिए काम कर रहा है या चंद रसूखदारों की तिजोरी भरने के लिए।