

कोरबा। जिले में अवैध लकड़ी के कारोबार पर लगाम कसने के लिए वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने बड़ी और सुनियोजित कार्रवाई की है। कोरबा वनमंडल के बालको वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम सतरेंगा में जंगल माफिया के खिलाफ छापामार अभियान चलाया गया। इस दौरान छह अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ दबिश देकर भारी मात्रा में अवैध रूप से संग्रहित लकड़ी बरामद की गई।

वन विभाग को इस अवैध गतिविधि की जानकारी मुखबिर के माध्यम से मिली थी। सूचना को गंभीरता से लेते हुए वनमंडलाधिकारी श्रीमती प्रेमलता यादव ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उपवनमंडलाधिकारी सूर्यकांत सोनी के मार्गदर्शन में पूरी योजना तैयार की गई और फिर टीम गठित कर छापेमारी की गई।
इस अभियान का नेतृत्व वन परिक्षेत्र अधिकारी जयंत सरकार और नव पदस्थ वन परिक्षेत्र अधिकारी देवव्रत सिन्हा ने किया। उनके साथ विभिन्न परिक्षेत्रों के सहायक अधिकारी और कर्मचारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। टीम सर्च वारंट के साथ गांव सतरेंगा पहुंची और चिन्हित छह घरों में एक साथ छापा मारा।

जांच के दौरान घरों में बीजा, साल, हल्दू और अन्य प्रजातियों की लकड़ियों का चिरान बड़ी मात्रा में मिला। यह लकड़ी अवैध रूप से काटकर व्यापार के उद्देश्य से जमा की गई थी। वन विभाग की टीम ने मौके पर ही पूरी लकड़ी को जब्त कर लिया।
कार्रवाई के दौरान जगत निर्मलकर के घर से सबसे अधिक 254 नग चिरान बरामद हुए। इसके अलावा महेत्तर सिंह के घर से 73 नग, घासीराम के घर से 18 नग, लच्छीराम के घर से 10 नग और भगत राम के घर से 4 नग चिरान जब्त किए गए। कुल मिलाकर 359 नग चिरान बरामद किए गए हैं, जिनकी मात्रा लगभग 5.405 घनमीटर आंकी गई है।
जब्त की गई लकड़ी की अनुमानित बाजार कीमत करीब 4.25 लाख रुपये बताई जा रही है। वन विभाग के अनुसार यह लकड़ी अवैध रूप से जंगलों से काटी गई थी और इसे बेचने की तैयारी की जा रही थी।

इस पूरे अभियान में वन विभाग और पुलिस बल के कुल 55 अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल रहे। कार्रवाई को पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से अंजाम दिया गया। बालको, कोरबा और लेमरू परिक्षेत्र के अधिकारी-कर्मचारियों ने मिलकर इस ऑपरेशन को सफल बनाया।
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में वन अधिनियम के तहत सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। जिन लोगों के घरों से लकड़ी बरामद हुई है, उनके खिलाफ नियमों के अनुसार आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
इस कार्रवाई में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संयुक्त वन प्रबंधन समिति के सदस्यों का भी अहम सहयोग मिला। गांव के लोगों ने वन विभाग की इस पहल की सराहना की है और इसे जंगलों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बताया है।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी, ताकि जंगलों की अवैध कटाई और तस्करी पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।



