

बिलासपुर पुलिस महकमे में एक बहुत बड़ा और कड़ा फेरबदल हुआ है। एसएसपी रजनेश सिंह ने जिले की पुलिसिंग का पूरा ढांचा ही बदल डाला है। एक साथ 33 अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले कर दिए गए हैं। सबसे खास बात यह है कि अब सीएसपी और एसडीओपी दफ्तरों में सीधे इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी बैठेंगे। बिलासपुर के इतिहास में ऐसा प्रयोग पहली बार हो रहा है। इस सख्त फैसले ने पुलिस महकमे में जबरदस्त खलबली मचा दी है। सुस्त और लापवाह थानेदारों को सीधे लूप लाइन का रास्ता दिखा दिया गया है। जो थानेदार अब तक थानों में बैठकर सिर्फ मलाई काट रहे थे उनकी कुर्सी छिन गई है।

क्या है इस नई व्यवस्था का गणित और असली लाभ..
बिलासपुर में थानों और बड़े अफसरों के दफ्तरों के बीच तालमेल की हमेशा कमी रही है। अमूमन सीएसपी और एसडीओपी दफ्तरों में फाइलों की चाल कछुए जैसी होती है। पुलिस महकमे के इस बाबू राज के कारण अहम मामले महीनों लटकते रहते हैं। आम जनता इंसाफ के लिए दफ्तरों के चक्कर काटती रहती है।
एसएसपी ने इस पुरानी बीमारी का सटीक इलाज खोज लिया है। संजय सिंह को कोतवाली सीएसपी दफ्तर में तैनात किया गया है। उत्तम साहू को सिविल लाइन और अवनीश पासवान को कोटा एसडीओपी दफ्तर भेजा गया है। ये सभी बहुत अनुभवी इंस्पेक्टर हैं। इनके बैठने से फाइलों पर अब धूल नहीं जमेगी। थानों और बड़े अफसरों के बीच तालमेल बहुत तेज होगा। पुलिसिंग में सुस्ती की गुंजाइश अब पूरी तरह से खत्म हो जाएगी।
थानेदारों का पुराना रोना धोना अब हमेशा के लिए होगा बंद..
इस नई और आधुनिक व्यवस्था का सीधा फायदा बिलासपुर की आम जनता को मिलेगा। अक्सर थानेदार काम के भारी बोझ का बहाना बनाते हैं। वे कागजी कार्रवाई का रोना रोते नजर आते हैं। वह थानों के बाहर निकलते ही नहीं हैं। अब सीएसपी दफ्तरों में बैठे इंस्पेक्टर कानून व्यवस्था की पूरी मॉनिटरिंग करेंगे। इससे थाना प्रभारियों का वर्कलोड सीधा आधा हो जाएगा। अब उन्हें थाने के एसी कमरों से बाहर निकलकर फील्ड पर पसीना बहाना ही होगा। उन्हें पेंडिंग अपराध हर हाल में सुलझाने होंगे। जनता की शिकायतें सुननी होंगी। अपराधियों की धरपकड़ करनी होगी। अब उनके पास काम न करने का कोई बहाना नहीं बचेगा।
विवादित और सुस्त चेहरों को मिला अपना मनपसंद आराम कक्ष..
एसएसपी रजनेश सिंह ने इस तबादला सूची से महकमे को एक बहुत साफ संदेश दे दिया है। काम में कोताही बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं होगी। जिन थानेदारों का रिपोर्ट कार्ड दागदार था उन पर सीधा और कड़ा एक्शन हुआ है। चकरभाठा के टीआई उमेश साहू को हटाकर सीधे अजाक थाने में बैठा दिया गया है। तोरवा के टीआई अभय बैस का काम भी कुछ ज्यादा ही ढीला था। इसलिए उन्हें भी लूप लाइन में डालकर सरकंडा सीएसपी दफ्तर भेज दिया गया है। जिन थानों में जनता की सुनवाई नहीं हो रही थी वहां से इन लापरवाह प्रभारियों को हटाकर कप्तान ने आम लोगों को बड़ी राहत दी है।
काम करने वाले तेजतर्रार अफसरों को मिली अहम कमान..
सुस्त अफसरों को हटाने के साथ ही तेजतर्रार चेहरों को आगे लाया गया है। एसीसीयू प्रभारी रजनीश सिंह को तोरवा थाने की कमान सौंपी गई है। इंस्पेक्टर दामोदर मिश्रा को एयरपोर्ट सुरक्षा से हटाकर हिर्री थाना भेजा गया है। अजाक थाना प्रभारी कृष्णचंद्र सिदार अब मस्तूरी थाना संभालेंगे। पुलिस लाइन के गोपाल कृष्ण सतपथी अब एसीसीयू प्रभारी होंगे। कोनी से भावेश शेंडे को चकरभाठा और तोपसिंह नवरंग को बिल्हा भेजा गया है। महिला इंस्पेक्टर राजश्री दामू कोशले को कोनी थाना प्रभारी बनाया गया है।
पुलिस पेट्रोल पंप के प्रभारी तक बदले गए..

एसएसपी ने सिर्फ बड़े अफसरों पर ही कार्रवाई नहीं की है। पुलिस पेट्रोल पंप का काम भी अब एसआई संभालेंगे। मोपका चौकी प्रभारी ओंकारधर दीवान को पेट्रोल पंप का प्रभारी बनाया गया है। उनकी जगह एसआई ओमप्रकाश कुर्रे सिविल लाइन से मोपका चौकी प्रभारी बनकर गए हैं। इसके अलावा आठ एएसआई चार प्रधान आरक्षक और छह आरक्षक भी बदले गए हैं।



