

बिलासपुर। शहर में बिना नक्शा पास बने मकानों को वैध करने के लिए शुरू की गई नियमितीकरण योजना अब पूरी तरह से ठहराव की स्थिति में पहुंच गई है। करीब तीन साल पहले शुरू हुई इस योजना से लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन वर्तमान में हजारों आवेदक परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

योजना के तहत शहर के लोगों ने इंजीनियरों के माध्यम से 15 से 20 हजार रुपये तक खर्च कर अपने मकानों के नक्शे तैयार कराए और आवेदन नगर निगम के जोन कार्यालयों में जमा किए। शुरुआत में प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ी और कई फाइलें नगर निगम की भवन शाखा से होते हुए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग तक पहुंचीं, लेकिन इसके बाद से पूरी प्रक्रिया लगभग ठप हो गई है।
4500 से ज्यादा आवेदन लंबित..
नगर निगम बिलासपुर में वर्तमान में 4500 से अधिक आवेदन लंबित पड़े हैं। निगम प्रशासन का कहना है कि सभी फाइलें टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग को भेज दी गई हैं, लेकिन वहां से आगे कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। बताया जा रहा है कि कलेक्टर की अध्यक्षता वाली कमेटी की नियमित बैठकें नहीं होने के कारण मामलों का निराकरण अटका हुआ है।
खर्च के बाद भी नहीं मिला लाभ..
योजना में शामिल होने के लिए लोगों ने अपनी जमा पूंजी खर्च कर दी, लेकिन अब उन्हें न तो उनकी फाइल की स्थिति की स्पष्ट जानकारी मिल रही है और न ही कोई समयसीमा तय की जा रही है। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। कई आवेदकों का कहना है कि अगर अब नियम बदले गए या दोबारा आवेदन मांगा गया, तो यह उनके साथ अन्याय होगा।
नेता ने उठाए सवाल..
इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सरकार ने लोगों से पैसा खर्च करवाने के बाद प्रक्रिया को बीच में रोक दिया, जो पूरी तरह गलत है। उन्होंने मांग की है कि लंबित सभी फाइलों पर जल्द निर्णय लेकर प्रक्रिया फिर से शुरू की जाए।
कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर लोग..
फाइलें लंबित होने के कारण आवेदक लगातार नगर निगम और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। हर बार अलग-अलग कारण बताए जा रहे हैं।कहीं प्रक्रिया बंद होने की बात कही जाती है, तो कहीं नियमों में बदलाव का हवाला दिया जाता है। इससे लोगों में असमंजस और असंतोष दोनों बढ़ रहे हैं।
अन्य शहरों में भी यही हाल..
यह समस्या केवल बिलासपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के अन्य शहरों में भी नियमितीकरण की प्रक्रिया धीमी या रुकी हुई बताई जा रही है। यह योजना पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल में शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य अवैध निर्माणों को वैध कर नागरिकों को राहत देना था।
फैसले का इंतजार..
फिलहाल हजारों लोग इस उम्मीद में हैं कि सरकार और प्रशासन जल्द ही कोई ठोस निर्णय लेंगे और लंबित आवेदनों का निराकरण करेंगे। जब तक कोई स्पष्ट फैसला नहीं आता, तब तक लोगों की परेशानी और अनिश्चितता बनी रहेगी।



