रामावतार जग्गी हत्याकांड : हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अमित जोगी दोषी करार – उम्रकैद की सजा..ट्रायल कोर्ट के बरी करने के फैसले को हाईकोर्ट ने किया निरस्त, कहा ‘साजिश के तहत हुई थी हत्या’..

बिलासपुर/रायपुर।छत्तीसगढ़ की राजनीति से जुड़े बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में 2 अप्रैल को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक और अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले के मुख्य आरोपी अमित जोगी को दोषी करार देते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई है।

हाईकोर्ट ने इससे पहले ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए बरी करने के फैसले को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि वह निर्णय उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के विपरीत था।

2003 चुनाव से पहले रची गई थी साजिश..

अदालत ने अपने विस्तृत फैसले में कहा कि यह हत्या कोई सामान्य आपराधिक घटना नहीं थी, बल्कि वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव से पहले एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी। बताया गया कि एनसीपी की प्रस्तावित रैली को विफल करने के उद्देश्य से यह षड्यंत्र रचा गया था। इसके लिए रायपुर के ग्रीन पार्क होटल और मुख्यमंत्री निवास में कई अहम बैठकें आयोजित की गई थीं। इन बैठकों में रैली को हर हाल में रोकने के लिए कठोर कदम उठाने का निर्णय लिया गया।

4 जून 2003 की रात को दिया गया वारदात को अंजाम..

कोर्ट के अनुसार, 4 जून 2003 की रात इस साजिश को अंजाम दिया गया। आरोपियों ने रामावतार जग्गी की कार का पीछा किया, उन्हें रास्ते में रोका और गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। घटना को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए और बाद में एक स्थान पर एकत्र होकर वारदात की पुष्टि की।

जांच में सामने आई पुलिस की भूमिका पर सवाल..

मामले की जांच के दौरान यह भी सामने आया कि प्रारंभिक पुलिस जांच में वास्तविक आरोपियों को बचाने और कुछ निर्दोष लोगों को फंसाने की कोशिश की गई थी। हालांकि बाद में मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी गई, जिसमें पूरे षड्यंत्र का खुलासा हुआ और साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की भूमिका स्पष्ट हुई।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी..

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि इतनी बड़ी और संगठित साजिश बिना किसी प्रभावशाली व्यक्ति की सक्रिय भागीदारी के संभव नहीं हो सकती।

अदालत ने यह भी कहा कि उपलब्ध साक्ष्य, गवाहों के बयान और घटनाओं की कड़ी एक-दूसरे से पूरी तरह जुड़ी हुई हैं, जो आरोपी की संलिप्तता को साबित करती हैं।

राजनीतिक हलकों में हलचल..

इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। लंबे समय से चर्चा में रहे इस मामले में आए इस निर्णय को न्यायिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

करीब दो दशक पुराने इस बहुचर्चित हत्याकांड में हाईकोर्ट का यह फैसला न्याय प्रक्रिया में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। अदालत के इस निर्णय ने न केवल मामले की दिशा बदल दी है, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया है कि साजिश और अपराध चाहे जितना पुराना क्यों न हो, कानून के दायरे से बच पाना आसान नहीं है।