PWD का बड़ा खेल : 15 करोड़ के टेंडर में ठेकेदार को 4.70 करोड़ का फायदा, ऑडिट में खुली पोल..

बिलासपुर। बिलासपुर में लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों का एक बड़ा कारनामा सामने आया है। यहां 12 किलोमीटर लंबी एक सड़क के निर्माण में भारी गड़बड़ी पकड़ी गई है। महालेखाकार (ऑडिट) की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि PWD के अफसरों ने नियमों को ताक पर रखकर एक ठेकेदार को 4 करोड़ 70 लाख रुपये का सीधा फायदा पहुंचाया है। यह गड़बड़ी बिलासपुर-पासीद मार्ग के निर्माण में हुई है।

15.06 करोड़ का था टेंडर..

बिलासपुर-पासीद मार्ग की लंबाई करीब 12 किलोमीटर है। इस सड़क को बनाने का काम साल 2023-24 में PWD संभाग क्रमांक-1 ने कराया था। इसका टेंडर 15 करोड़ 6 लाख रुपये में मेसर्स मां कन्हैया लाल अग्रवाल नाम के ठेकेदार को दिया गया था। सड़क बन गई, लेकिन जब इसका सरकारी ऑडिट हुआ, तो पता चला कि काम में कई स्तर पर घोटाले हुए हैं। ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, अफसरों ने ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए इंडियन रेलवे कांग्रेस के तय नियमों को भी नहीं माना।

कुल टेंडर का लगभग 30 फीसदी हिस्सा एक्स्ट्रा दिया..

अगर आंकड़ों को आसान भाषा में समझें, तो 15 करोड़ के काम में लगभग साढ़े चार करोड़ से ज्यादा की रकम ठेकेदार को बिना नियम के दे दी गई। यह कुल प्रोजेक्ट का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा है।

ऑडिट टीम ने अपनी जांच में पाया कि यह पैसा तीन अलग-अलग तरीकों से ठेकेदार की जेब में डाला गया :

1. सड़क की डिजाइन बदली, 1.47 करोड़ का फायदा..

सड़क बनाने के कुछ तकनीकी मानक होते हैं। इसे सीबीआर (CBR – सड़क की मजबूती का पैमाना) कहा जाता है। इस सड़क के लिए यह मानक 8 प्रतिशत होना था। लेकिन PWD के इंजीनियरों ने इसे जानबूझकर 5 प्रतिशत मान लिया। इसका नतीजा यह हुआ कि सड़क की मोटाई बढ़ानी पड़ी। इसके बदले में ठेकेदार को जीएसबी (GSB) और डीबीएम (DBM) के काम का एक्स्ट्रा बिल पास कर दिया गया। इस एक बदलाव से ठेकेदार को 1 करोड़ 47 लाख रुपये का एक्स्ट्रा पेमेंट मिल गया।

2. बिना सर्टिफिकेट रॉयल्टी में 2.30 करोड़ की छूट..

सड़क बनाने में भारी मात्रा में मिट्टी, मुरूम और रेत का इस्तेमाल होता है। सरकारी नियम है कि ठेकेदार को इन चीजों का ‘रॉयल्टी चुकता प्रमाण पत्र’ विभाग में जमा करना होता है।

ठेकेदार ने यह सर्टिफिकेट जमा नहीं किया। नियम कहता है कि जब ठेकेदार सर्टिफिकेट न दे, तो विभाग को बाजार के मौजूदा रेट के हिसाब से बिल में से पैसा काटना चाहिए। लेकिन अफसरों ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने बाजार भाव की जगह बहुत ही कम दर से पैसे काटे। इस खेल से ठेकेदार को 2 करोड़ 30 लाख रुपये का सीधा मुनाफा हो गया। इसके अलावा रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि एक और मामले में 1.75 करोड़ रुपये का नुकसान विभाग को हुआ है।

3. 88 दिन की देरी, फिर भी 71 लाख का जुर्माना माफ..

सरकारी टेंडर में काम पूरा करने की एक समय-सीमा होती है। अगर ठेकेदार समय पर काम पूरा न करे, तो उस पर पेनाल्टी (जुर्माना) लगती है। बिलासपुर-पासीद सड़क का काम तय समय से 88 दिन की देरी से पूरा हुआ। अनुबंध की शर्तों के हिसाब से ठेकेदार पर 71 लाख 29 हजार रुपये का जुर्माना लगना था। लेकिन PWD ने यह जुर्माना वसूला ही नहीं। यह पूरी रकम भी ठेकेदार के पास ही रह गई।

ऑडिट अफसरों ने मांगा जवाब..

इस हेराफेरी पर ऑडिट टीम ने सख्त रवैया अपनाया है। वरिष्ठ लेखापरीक्षा अधिकारी ने PWD (संभाग-1) बिलासपुर के कार्यपालन अभियंता (EE) से साफ शब्दों में पूछा है कि आखिर किस आधार पर ठेकेदार को करोड़ों रुपये की यह छूट दी गई? सबसे हैरानी की बात यह है कि विभाग के बड़े अधिकारियों को इस ऑडिट रिपोर्ट और गड़बड़ी की भनक तक नहीं है।

खराब सड़क से जनता भुगत रही है खामियाजा..

इस पूरे भ्रष्टाचार का असर सीधा आम लोगों पर पड़ रहा है। मंगला और पासीद से जुड़े सैकड़ों गांव हैं। इन गांवों के लोगों के लिए शहर आने-जाने का यही मुख्य रास्ता है। निर्माण के दौरान ही इसमें इतनी गड़बड़ियां हुईं कि सड़क सही ढंग से बन ही नहीं पाई। नतीजा यह है कि बनने के कुछ ही दिनों बाद सड़क खराब हो गई। अब इस जर्जर सड़क से गुजरना लोगों की मजबूरी बन गया है। गड्ढों और खराब रास्ते के कारण सबसे ज्यादा परेशानी एंबुलेंस और गंभीर मरीजों को होती है।

जानकारी मंगाकर कार्रवाई करेंगे : अधीक्षण अभियंता..

इस पूरे मामले में जब PWD के अधीक्षण अभियंता (SE) के.पी. संत से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस गड़बड़ी की जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा, “आपने जिन तथ्यों को सामने लाया है, उसकी जानकारी मुझे नहीं है। मैं विभाग से पूरी फाइल और जानकारी मंगाऊंगा। इसके बाद मामले में जो भी उचित होगा, वह निर्णय लिया जाएगा।”