NTPC सीपत विवाद : मुआवजा बंद, मजदूरी में कटौती और राखड़ प्रदूषण से ग्रामीण त्रस्त..

मनमानी के खिलाफ मजदूरों-ग्रामीणों का उग्र प्रदर्शन, यूनियन अध्यक्ष बोले – “अब आर-पार की लड़ाई होगी”

बिलासपुर। NTPC सीपत परियोजना से प्रभावित ग्राम कौडिया, नवागांव और हरदा के ग्रामीण और मजदूर लगातार शोषण और अन्याय के शिकार हो रहे हैं। राखड़ डंपिंग और पानी निकासी के चलते लगभग 60 किसानों की जमीन दलदली हो चुकी है, जिनका मुआवजा वर्ष 2023 से बिना किसी नोटिस के बंद कर दिया गया है। इससे किसानों की आर्थिक हालत बदतर हो गई है।

ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में राखड़ के उड़ने से प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुंच चुका है, जिससे दमा व श्वास संबंधी बीमारियां फैल रही हैं। सबसे गंभीर मामला 14 जुलाई 2025 को सामने आया, जब राखड़ में दबने से रामखिलावन महिलांगे की मौत हो गई, परंतु उनके परिजनों को आज तक कोई मुआवजा या सहायता नहीं मिली।

ठेकेदार कंपनियों की मनमानी : मजदूरी में कटौती और अधिकारों का हनन..

एनटीपीसी यूनिट-2 में कार्यरत सिमर इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी पिछले तीन माह से मजदूरों को वेतन नहीं दे रही है, और विरोध करने वालों को नौकरी से निकाल दिया गया। यूनिट-3 में विष्णु प्रकाश पोंगलिया कंस्ट्रक्शन कंपनी स्थानीय मजदूरों की जगह बाहरी मजदूरों से 12 घंटे काम करवा रही है, लेकिन भुगतान केवल 8 घंटे का किया जा रहा है।

वहीं, डेम नंबर-2 में कार्यरत जेपी एसोसिएट्स मजदूरों को केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित ₹541 की न्यूनतम मजदूरी के बजाय केवल ₹250-300 प्रतिदिन दे रही है। ईपीएफ, ईएसआई और सुरक्षा कार्ड जैसी बुनियादी सुविधाएँ तक नहीं दी जा रही हैं।

आंदोलन की चेतावनी : “मांगें नहीं मानी तो फिर सड़क पर उतरेंगे”

मजदूर यूनियन अध्यक्ष मुकेश सिंह धुरी ने आरोप लगाया कि उन्होंने जब किसानों और मजदूरों की समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुँचाया, तो उन्हें झूठे केस में फंसा दिया गया। धुरी ने कहा, “एनटीपीसी प्रबंधन गरीबों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा है, अब चुप नहीं बैठेंगे।”

ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि यदि उन्हें 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून (LARR) के अनुसार मुआवजा नहीं दिया गया, मजदूरों को न्याय नहीं मिला और राखड़ प्रदूषण पर रोक नहीं लगी, तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

कलेक्ट्रेट में गरजा जनसैलाब : ‘हक़ की लड़ाई आखिरी सांस तक लड़ेंगे’

ग्रामीणों और मजदूरों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जोरदार नारेबाजी की और प्रशासन को चेतावनी दी कि वे अब किसी भी कीमत पर पीछे हटने वाले नहीं हैं। “अपना हक लेकर रहेंगे, चाहे इसके लिए कितनी भी कुर्बानी क्यों न देनी पड़े”- यही जज़्बा उनके हर नारे में झलक रहा था।