

बिलासपुर । गुरु घासीदास विश्वविद्यालय में ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट ऑफिसर (TPO) की नियुक्ति को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। एनएसयूआई के प्रदेश सचिव रजेश सिंह ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए तत्काल कार्रवाई, FIR दर्ज करने और अब तक किए गए भुगतान की वसूली की मांग की है।



रजेश सिंह ने कुलसचिव को लिखे पत्र में कहा है कि 17 और 18 मार्च 2026 को सामने आए तथ्यों के अनुसार TPO की नियुक्ति में भारी अनियमितताएं और नियमों की अनदेखी की गई है। आरोप है कि एक शैक्षणिक पद को गलत तरीके से अशैक्षणिक पद में बदलकर नियुक्ति की गई, जबकि इस पद की विधिवत स्वीकृति ही नहीं थी।
बिना स्वीकृति करोड़ों का भुगतान!
पत्र में दावा किया गया है कि UGC या शिक्षा मंत्रालय से पद की मंजूरी नहीं होने के बावजूद छात्रों की फीस से TPO को वेतन दिया जा रहा है। अब तक 1 से 15 करोड़ रुपये तक का भुगतान किए जाने की बात कही गई है, जिसे वित्तीय अनियमितता बताया गया है।
चयन प्रक्रिया पर भी सवाल..
एनएसयूआई ने चयन प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि इंटरव्यू में 30 अंकों के स्थान पर 341 अंक दिए गए। साथ ही, चयनित उम्मीदवार की डिग्री और पात्रता पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। बताया गया है कि संबंधित डिग्री को AICTE की मान्यता नहीं है और उम्मीदवार उस डिग्री के लिए पात्र भी नहीं थे।
अनुभव और अंकों में गड़बड़ी का आरोप..
पत्र में यह भी कहा गया है कि उम्मीदवार को मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव और स्कूल शिक्षक के अनुभव के आधार पर पूरे अंक दे दिए गए, जबकि यह पद के लिए प्रासंगिक नहीं था। अतिरिक्त 10 अंक दिए जाने को भी पक्षपातपूर्ण बताया गया है।
पहले भी उठ चुके हैं सवाल..
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2016 में वित्तीय समिति ने इस भर्ती को अनियमित बताते हुए वेतन रोक दिया था। वहीं, 2025 में बनी जांच समिति ने भी अनियमितताओं की पुष्टि की थी। इसके बावजूद फिर से भुगतान शुरू किया जाना सवालों के घेरे में है।
प्रभावशाली पदों पर नियुक्ति का आरोप..
एनएसयूआई का आरोप है कि संबंधित अधिकारी को विश्वविद्यालय में लीगल ऑफिसर, RTI सेल सदस्य और अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी दी गई हैं, जिससे जांच प्रभावित हो सकती है। उन्हें सभी पदों से हटाने की मांग की गई है।
केंद्रीय जांच की मांग..

मामले को गंभीर बताते हुए केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) को भेजी गई रिपोर्ट के निर्देशों को सार्वजनिक करने और स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही कुलपति, कुलसचिव, वित्त अधिकारी और चयन समिति के सदस्यों की भूमिका की भी जांच की मांग उठाई गई है।
आंदोलन की चेतावनी..
एनएसयूआई ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन चरणबद्ध आंदोलन करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।



