

दुर्ग। वन संपदा की सुरक्षा को लेकर दुर्ग वनमंडल ने बड़ी सफलता हासिल की है। 23 और 24 फरवरी की दरमियानी रात चलाए गए विशेष अभियान के दौरान विभाग ने अवैध रूप से लकड़ी का परिवहन कर रहे चार वाहनों को रंगे हाथों पकड़ा है। जब्त की गई लकड़ियों में कहुआ मिश्रित जलाऊ और गोला शामिल हैं, जिनकी बाजार में भारी कीमत आंकी जा रही है।

तड़के 3 बजे घेराबंदी..
वन विभाग को पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में अवैध लकड़ी की तस्करी की गोपनीय सूचनाएं मिल रही थीं। वनमंडलाधिकारी (DFO) दुर्ग के निर्देशन में एक विशेष रणनीति तैयार की गई। उप वनमंडलाधिकारी के नेतृत्व में उड़नदस्ता दल दुर्ग वृत्त और परिक्षेत्र सहायक भिलाई-03 की संयुक्त टीम ने मोर्चा संभाला।
मंगलवार और बुधवार की तड़के सुबह 3:00 से 6:00 बजे के बीच, जब तस्कर सक्रिय थे, टीम ने सघन गश्त कर घेराबंदी की। इस दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में गुजर रहे चार भारी वाहनों को रोका गया, जिनमें बिना किसी वैध दस्तावेज के भारी मात्रा में लकड़ी लदी हुई थी।
जब्त वाहनों का विवरण..
विभाग ने चारों वाहनों को राजसात करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पकड़े गए वाहनों का विवरण इस प्रकार है :
| CG-10C-3389 | कहुआ मिश्रित जलाऊ लकड़ी | पाटन / पुलगांव डिपो |
| CG-08L-3736 | कहुआ मिश्रित जलाऊ लकड़ी | पाटन / पुलगांव डिपो |
| CG-04JC-9290 | कहुआ मिश्रित गोला | पाटन / पुलगांव डिपो |
| CG-04MF-6945 | कहुआ मिश्रित जलाऊ लकड़ी | पाटन / पुलगांव डिपो |
कड़ी कानूनी कार्रवाई: वन अपराध दर्ज..
वन विभाग ने कहा है कि पर्यावरण और वन संपदा को नुकसान पहुँचाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
विभागीय जानकारी के अनुसार :
मामले में वन अपराध प्रकरण क्रमांक 79/11 (दिनांक 23.02.2026) तथा 91/3, 91/4, 91/5 (दिनांक 24.02.2026) के तहत वैधानिक कार्यवाही की जा रही है। सभी वाहनों को फिलहाल पुलगांव और पाटन डिपो में सुरक्षित खड़ा कराया गया है।
नेटवर्क खंगाल रही है टीम..
सूत्रों की मानें तो इस तस्करी के पीछे एक बड़े अंतर्राज्यीय गिरोह के हाथ होने की आशंका है। वन विभाग अब इस बात की जांच कर रहा है कि यह लकड़ी किस जंगल से काटी गई थी और इसे कहां खपाने की तैयारी थी।



