सांस्कृतिक कार्यक्रम की आड़ में अशोभनीय प्रदर्शन : कोरिया जिले से वायरल वीडियो ने प्रशासन की निगरानी पर उठाए सवाल.. देखें वॉयरल वीडियो..

कोरिया। छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक सांस्कृतिक आयोजनों की आड़ में बढ़ती अशोभनीय प्रस्तुतियों ने प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। गरियाबंद और सूरजपुर के बाद अब कोरिया जिले के बैकुंठपुर क्षेत्र से सामने आए एक वायरल वीडियो ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोनहत ब्लॉक के पोड़ी क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम में कोरबा से आमंत्रित नाचा मंडली की प्रस्तुति मर्यादा की सीमाएं लांघती नजर आई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में मंच पर नृत्य कर रही महिला कलाकारों पर दर्शकों द्वारा नोट उड़ाए जाते हुए देखा जा सकता है। साथ ही पृष्ठभूमि में बज रहे गीतों और दर्शकों की आपत्तिजनक हरकतों ने पूरे आयोजन की गरिमा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सांस्कृतिक आयोजन या खुली मनमानी?

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, कार्यक्रम का आयोजन पारंपरिक नाचा के नाम पर किया गया था, लेकिन समय बीतने के साथ प्रस्तुति का स्वरूप पूरी तरह बदल गया। वीडियो में यह भी स्पष्ट दिखाई देता है कि कुछ लोग मंच के बेहद करीब पहुंचकर कलाकारों को उकसाने की कोशिश कर रहे थे। दर्शक दीर्घा में मौजूद कई लोगों ने इस घटनाक्रम को मोबाइल कैमरों में रिकॉर्ड किया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले..

यह पहला मामला नहीं है जब छत्तीसगढ़ में इस तरह की घटनाएं सामने आई हों।

गरियाबंद जिले में ओपेरा कार्यक्रम के दौरान अशोभनीय नृत्य का वीडियो वायरल होने पर प्रशासनिक कार्रवाई की गई थी, जिसमें एसडीएम को पद से हटाया गया।

इसके बाद सूरजपुर जिले में वन विभाग के रेस्ट हाउस में आयोजित विवादित डांस कार्यक्रम के मामले में भी जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हुई थी।

इन घटनाओं के बावजूद कोरिया का ताजा मामला यह दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर निगरानी व्यवस्था में अपेक्षित सुधार अब तक नहीं हो पाया है।

प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल..

वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय नागरिकों में आक्रोश है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि ऐसे आयोजनों की अनुमति किन शर्तों पर दी जाती है और कार्यक्रम के दौरान निगरानी की जिम्मेदारी किसकी होती है? यदि प्रशासनिक प्रतिनिधि या स्थानीय जिम्मेदार मौके पर मौजूद थे, तो फिर इस तरह की गतिविधियां खुलेआम कैसे चलती रहीं?

सामाजिक प्रभाव को लेकर बढ़ी चिंता..

ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि सार्वजनिक मंचों पर इस प्रकार की प्रस्तुतियां समाज, विशेषकर युवाओं और बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। उनका मानना है कि यदि समय रहते सख्त दिशा-निर्देश और प्रभावी निगरानी व्यवस्था लागू नहीं की गई, तो सांस्कृतिक आयोजनों की आड़ में ऐसी अव्यवस्थाएं और बढ़ेंगी।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है – क्या प्रशासन हर बार वीडियो वायरल होने के बाद ही जागेगा, या भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए पहले से ठोस और सख्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी?

देखिए वायरल वीडियो..

(Disclaimer)

यह समाचार रिपोर्ट प्राप्त जानकारी और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर तैयार की गई है। इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि तेज खबर .इन आधिकारिक तौर पर नहीं करता है। लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य किसी की छवि को धूमिल करना नहीं, बल्कि जनता और प्रशासन तक घटना की सूचना पहुँचाना है। मामले की पूरी सच्चाई और जांच का जिम्मा संबंधित पुलिस प्रशासन का है।