मित्रता हो तो कृष्ण-सुदामा जैसी हो..लाखासर में श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन भावविभोर हुए श्रद्धालु..

बिलासपुर,तखतपुर । ग्राम लाखासर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन कथा वाचक पं. नरेश कुमार तिवारी ने अपनी ओजस्वी और भावपूर्ण वाणी से कृष्ण-सुदामा चरित्र का मार्मिक वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने बताया कि सच्ची मित्रता में अमीरी-गरीबी, छोटा-बड़ा कोई भेद नहीं होता, बल्कि निस्वार्थ प्रेम और अपनापन ही उसकी पहचान होता है।

कथा में बताया गया कि निर्धन ब्राह्मण सुदामा अपनी दरिद्रता दूर करने की कोई इच्छा नहीं, बल्कि मित्र दर्शन की भावना लेकर अपने बाल सखा भगवान श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका पहुँचे। द्वारका के वैभव और महलों की भव्यता देखकर वे संकोच में पड़ गए। जब द्वारपाल ने श्रीकृष्ण को यह संदेश दिया कि कोई ‘सुदामा’ नाम का ब्राह्मण उनसे मिलने आया है, तो अपने मित्र का नाम सुनते ही भगवान कृष्ण नंगे पाँव महल से बाहर दौड़ पड़े।

दोनों मित्रों का मिलन इतना भावुक था कि उपस्थित श्रद्धालुओं की आँखें भी नम हो उठीं। वर्षों बाद मिले मित्र को देखकर भगवान श्रीकृष्ण की आँखें सजल हो गईं। उन्होंने सुदामा का ऐसा आत्मीय और राजसी स्वागत किया कि सुदामा स्वयं को धन्य समझने लगे।

विदाई के समय जब श्रीकृष्ण ने सुदामा को प्रत्यक्ष रूप से कुछ भी नहीं दिया, तो सुदामा कुछ उदास मन से अपने गाँव लौट आए। लेकिन घर पहुँचते ही उन्होंने देखा कि उनकी टूटी झोपड़ी के स्थान पर भव्य महल खड़ा है और उनकी पत्नी व बच्चे राजसी वैभव में जीवन यापन कर रहे हैं। यह सब देख सुदामा समझ गए कि यह उनके मित्र श्रीकृष्ण का मौन और महान उपहार है। इस प्रकार कृष्ण-सुदामा की मित्रता संसार के लिए निस्वार्थ प्रेम और सच्चे संबंधों की अमर मिसाल बन गई।

कथा का आयोजन निर्मलकर परिवार द्वारा किया गया है, जिसमें प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा का रसपान करने पहुँच रहे हैं। सुदामा चरित्र के साथ ही पं. तिवारी ने उद्धव ज्ञान उपदेश, कलियुग का वर्णन एवं परीक्षित मोक्ष की कथा सुनाकर छठवें दिन की कथा को विश्राम दिया।

पं. नरेश कुमार तिवारी द्वारा प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से श्रीमद् भागवत कथा का वाचन किया जा रहा है। इस अवसर पर मुख्य यजमान राजा निर्मलकर-सुशीला निर्मलकर, लक्ष्मीनाथ निर्मलकर-साममती निर्मलकर, रामेश्वर प्रसाद निर्मलकर-अन्नपूर्णा निर्मलकर सहित सनत, राजकुमार, अजय, रामेश्वर, परमेश्वर, अधारी, विनोद, संतोष, गली, बली, मुकेश रजक एवं क्षेत्र के अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

यह कथा आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ कर रहा है, बल्कि समाज को मित्रता, प्रेम और त्याग का सशक्त संदेश भी दे रहा है।