बिलासपुर के मस्तूरी में आंगनबाड़ी पुताई घोटाला : एक दीवार पोतो फोटो खींचो और लाखों डकार जाओ..

बिलासपुर।बिलासपुर जिले के मस्तूरी ब्लॉक में महिला एवं बाल विकास विभाग का एक बड़ा और हैरान करने वाला घोटाला सामने आया है। यहां नौनिहालों के बैठने के लिए बने आंगनबाड़ी केंद्रों की रंगाई पुताई के नाम पर लाखों रुपये का भ्रष्टाचार हुआ है। विभाग ने फंड तो जारी किया लेकिन यह पैसा केंद्रों की दीवारों तक नहीं पहुंचा। भ्रष्ट अफसरों ने पैसा निकालने का एक नया और शातिर तरीका खोज लिया। केंद्रों में केवल एक दीवार की पुताई कराई गई। उसकी फोटो खींची गई और बाकी सारा पैसा अफसरों की जेब में चला गया। मस्तूरी के इस नए घोटाले की जांच हो तो पूरे बिलासपुर जिले में एक बहुत बड़े भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हो सकता है।

मस्तूरी ब्लॉक में लगभग 300 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों में छोटे बच्चे प्राथमिक शिक्षा लेने आते हैं। ग्रामीण महिलाओं के विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाएं भी यहीं से चलती हैं। लेकिन रखरखाव के भारी अभाव में इन भवनों की हालत बद से बदतर हो गई है। कई सालों से यहां कोई काम नहीं हुआ है। इमारतें बदरंग हो चुकी हैं और दीवारों का प्लास्टर गिर रहा है। जिन्हें देखकर ही लगता है कि दशकों से इनमें रंग नहीं लगा है। लेकिन कागजों में सब कुछ चकाचक है। विभागीय अधिकारी बड़े गर्व से दावा कर रहे हैं कि हमने इसी साल सभी आंगनबाड़ी केंद्रों की रंगाई पुताई कराई है। जबकि फील्ड की जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।

मिली जानकारी के मुताबिक विभाग ने केंद्रों को चमकाने के लिए बाकायदा फंड जारी किया था। हर सेक्टर के लिए 50 से 60 हजार रुपये दिए गए थे। यह भवनों को संवारने के लिए एक अच्छी रकम होती है। लेकिन भ्रष्ट अधिकारियों ने इस पूरे फंड का बंदरबांट कर लिया। सूत्रों का पक्का दावा है कि एक बड़े साहब ने मौखिक आदेश जारी किया। साहब ने कहा कि पुताई का पूरा पैसा खर्च नहीं करना है। सीधे कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया गया कि वे भवन की केवल एक दीवार पर रंग करवाएं। इसके बाद उस रंगी हुई साफ दीवार के सामने खड़े होकर फोटो खींचें और उसे विभाग को भेज दें।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मजबूर थीं। उन्हें अपने अधिकारियों से मिले इस अजीब आदेश का पालन करना पड़ा। उन्होंने एक दीवार रंग कर फोटो बड़े अधिकारियों को भेज दी। इसके बाद जो पैसा बचा उसे साहब ने वापस मंगा लिया। बिना कोई काम किए लाखों रुपये डकार लिए गए। यह सब कुछ एक सोची समझी साजिश के तहत किया गया। अफसरों ने अपनी फाइलों में काम पूरा दिखा दिया और फंड का पैसा आपस में बांट लिया। सवाल यह उठता है कि जब फोटो में केवल एक दीवार दिख रही थी तो किसी जिम्मेदार अधिकारी ने मौके पर जाकर जांच क्यों नहीं की। इससे साफ पता चलता है कि ऊपर से नीचे तक सब मिले हुए हैं।

यह मामला केवल मस्तूरी ब्लॉक तक सीमित रहने वाला नहीं है। जानकारों का मानना है कि बिलासपुर जिले के अन्य ब्लॉकों में भी यही खेल चल रहा है। एक दीवार पोतने और फोटो खींचकर पैसा निकालने का यह मस्तूरी मॉडल पूरे बिलासपुर जिले में अपनाया जा रहा है। अगर मस्तूरी के इन 300 केंद्रों की निष्पक्ष जांच हो जाए तो जिले के कई बड़े चेहरों से नकाब उतर सकता है। रंगाई पुताई के नाम पर निकाले गए लाखों रुपये के गबन की कई परतें खुल सकती हैं।

आंगनबाड़ी केंद्रों की यह दुर्दशा सीधे तौर पर गरीब बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ है। सरकार बच्चों के पोषण और शिक्षा के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाती है। उनके बैठने की जगह साफ सुथरी होनी चाहिए। इसी मकसद से रंग रोगन का पैसा भेजा जाता है। लेकिन भ्रष्ट तंत्र ने इस पैसे को भी नहीं छोड़ा। बदहाल भवनों में बच्चे बैठने को आज भी मजबूर हैं। आम जनता और ग्रामीणों में इस घोटाले को लेकर भारी गुस्सा है। लोग अब बिलासपुर जिला प्रशासन से इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। दोषी अधिकारियों पर तुरंत केस दर्ज कर जनता के पैसे की वसूली होनी चाहिए ताकि आगे से कोई अधिकारी बच्चों के हक का पैसा मारने की हिम्मत न कर सके।