
सड़क निर्माण का सच – विभागीय तालमेल की कमी से लेटलतीफी,कलेक्टर-कमिश्नर ने किया निरीक्षण, दिए सख्त निर्देश..


बिलासपुर। शहर में करीब 60.5 करोड़ रुपये की लागत से चल रहे चार प्रमुख सड़क विकास कार्यों की रफ्तार फाइलों और विभागों के आपसी तालमेल में उलझ गई है। रविवार को कलेक्टर संजय अग्रवाल ने नगर निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे के साथ शहर का औचक निरीक्षण किया तो जमीनी हकीकत सामने आई। कहीं डामरीकरण के लिए शासन से संशोधित दरों (रिवाइज्ड रेट) की मंजूरी का इंतजार हो रहा है, तो कहीं सीएसईबी की पोल शिफ्टिंग न होने से 30 करोड़ का प्रोजेक्ट अटका पड़ा है।

कलेक्टर ने पीडब्ल्यूडी और निगम के अधिकारियों को तलब करते हुए स्पष्ट किया है कि निर्माण कार्यों में देरी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सबसे बड़े आंकड़े वाले प्रोजेक्ट्स में ठेकेदारों और एजेंसियों को अल्टीमेटम दिया है कि तय समय-सीमा में काम पूरा करें, ताकि शहरवासियों को धूल और जाम से राहत मिल सके।
30 करोड़ का फोरलेन प्रोजेक्ट: सीएसईबी के पोल बने बाधा..
शहर के सबसे अहम प्रोजेक्ट्स में से एक दयालबंद से दर्रीघाट तक सड़क मजबूतीकरण और लाल खदान ओवरब्रिज के आगे से दर्रीघाट तक फोरलेन निर्माण कार्य है। करीब 30 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट की समीक्षा में यह बात सामने आई कि सीएसईबी (छत्तीसगढ़ स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड) द्वारा अब तक पोल शिफ्टिंग का कार्य पूरा नहीं किया गया है। निर्माण एजेंसी ने तर्क दिया कि पोल न हटने की वजह से अलाइनमेंट और सड़क का काम प्रभावित हो रहा है। इस पर कलेक्टर ने दोनों विभागों को तत्काल समन्वय बनाकर पोल शिफ्टिंग खत्म करने के निर्देश दिए हैं, ताकि काम न रुके।
9 करोड़ का चौड़ीकरण : शासन के नए रेट के इंतजार में रुका डामरीकरण..
मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के तहत गुरुनानक चौक से स्मृति वन और वहां से शक्ति चौक तक 9 करोड़ की लागत से सड़क चौड़ीकरण, डिवाइडर और लाइटिंग का काम चल रहा है। निरीक्षण के दौरान यह खुलासा हुआ कि डामरीकरण के संशोधित दरों और प्राक्कलन (एस्टीमेट) से जुड़ी कागजी प्रक्रिया के कारण डामर का काम अटका हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि शासन स्तर पर नए रेट के लिए पत्राचार किया गया है। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जब तक शासन से आदेश नहीं आ जाता, तब तक धूल उड़ने से रोकने के लिए नियमित पानी का छिड़काव किया जाए और डामरीकरण के अलावा बाकी बचे काम तेजी से निपटाए जाएं।
17 करोड़ का गौरव पथ और 4.5 करोड़ की शनिचरी सड़क..
कलेक्टर ने अशोक नगर चौक से बिरकोना तक 17 करोड़ की लागत से बन रहे गौरव पथ का भी जायजा लिया। यहां भी डामरीकरण से पहले के बेस वर्क और अन्य प्रक्रियाओं को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए, ताकि काम में विलंब न हो। इसके अलावा साइंस कॉलेज से शनिचरी रपटा तक 4.5 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित सड़क निर्माण की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को गुणवत्ता मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा ।
ठेकेदारों को चेतावनी..
सड़क निर्माण की सुस्त रफ्तार और बेतरतीब काम से वाहन चालकों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। उड़ती धूल और बिना संकेतकों वाले निर्माण स्थलों पर दुर्घटना की आशंका रहती है। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने ठेकेदारों को दो टूक चेतावनी दी कि साइट पर सुरक्षा के पूरे इंतजाम रखे जाएं। साथ ही ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर यातायात को सुचारु रखने की व्यवस्था करने को कहा गया है।
विभागों के बीच पत्राचार का खेल..
जांच में यह भी सामने आया कि निर्माण में देरी की एक बड़ी वजह विभागों का आपस में समन्वय न होना है। डामरीकरण के नए रेट लागू करने के लिए शासन को सिर्फ पत्र लिखकर काम रोक दिया गया था। अब अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि कागजी कार्रवाई को शासन स्तर पर फॉलो-अप लेकर जल्द पूरा कराएं, ताकि काम को गति मिल सके।
पेनाल्टी की तैयारी :
आने वाले समय में इन चारों बड़े प्रोजेक्ट्स की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी। प्रशासन अब साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा करेगा और डेडलाइन पार करने वाली निर्माण एजेंसियों पर पेनाल्टी लगाने की भी रूपरेखा तैयार की जा रही है।








