डिजिटल पहचान पर ब्रेक : आधार डाटा और स्कूल रिकॉर्ड मिसमैच से 38 हजार छात्रों की ‘अपार आईडी’ अटकी, रायपुर ब्लॉक में सर्वाधिक 23 हजार केस पेंडिंग..

एक्सक्लूसिव: शिक्षा विभाग की योजना में आधार वेरिफिकेशन बना सबसे बड़ी बाधा, अब हर ब्लॉक में खुलेंगे नए केंद्र..

रायपुर । जिले में स्कूली विद्यार्थियों को डिजिटल पहचान देने वाली ‘अपार आईडी’ (APAAR ID) योजना में आधार कार्ड की गड़बड़ियों के कारण एक बड़ा तकनीकी पेंच फंस गया है। शिक्षा विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, जिले में अब तक 38,598 विद्यार्थियों की अपार आईडी पोर्टल पर जनरेट नहीं हो पाई है। इसका मुख्य कारण आधार कार्ड में दर्ज नाम और स्कूल के दाखिला रजिस्टर में लिखे नाम का आपस में मैच नहीं होना है। इसके अलावा, कई सालों से बच्चों का बायोमेट्रिक अपडेट न होना भी इसकी बड़ी वजह बनकर सामने आया है, जिससे सिस्टम आईडी जनरेट करने से रिजेक्ट कर रहा है। इस बड़े बैकलॉग से निपटने के लिए शिक्षा विभाग अब जिले के हर विकासखंड (ब्लॉक) में नए आधार केंद्र खोलने की तैयारी कर रहा है।

नाम की स्पेलिंग में अंतर और बायोमेट्रिक अपडेट नहीं होना बनी मुख्य वजह..

विभागीय रिकॉर्ड और डाटा सिंकिंग की जांच बताते हैं कि आईडी जनरेट न होने के पीछे सबसे बड़ा कारण दस्तावेजों का आपस में मेल न खाना है। कई बच्चों के आधार कार्ड में नाम की स्पेलिंग अलग है, जबकि स्कूल के रिकॉर्ड में नाम अलग तरह से दर्ज है। इसके अलावा, जिन बच्चों के आधार कार्ड 5 से 7 साल पहले बचपन में बने थे, उनका फिंगरप्रिंट और आंखों की पुतली का डाटा (बायोमेट्रिक) अपडेट नहीं हुआ है। जब अपार आईडी पोर्टल के लिए डाटा सिंक किया जाता है, तो बायोमेट्रिक मिसमैच का एरर आ जाता है। इसे दूर करने के लिए विभाग हर ब्लॉक स्तर पर आधार केंद्र शुरू करेगा। इन केंद्रों पर सीधे आधार की गलतियों में सुधार और बायोमेट्रिक अपडेट का काम होगा, ताकि रुकी हुई प्रक्रिया फिर से शुरू हो सके।

जिले में 92.86 प्रतिशत काम पूरा, लेकिन रायपुर ब्लॉक की स्थिति सबसे खराब..

हालिया ब्लॉकवार रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि जिले में अपार आईडी बनाने का काम तेज हुआ है, लेकिन पेंडिंग मामलों का आंकड़ा भी काफी बड़ा है। जिले में कुल 5 लाख 40 हजार 700 विद्यार्थियों के नामांकन के मुकाबले अब तक 5 लाख 2 हजार 102 बच्चों की अपार आईडी बन चुकी है। यानी कुल लक्ष्य का 92.86 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। लेकिन बाकी बचे 38,598 मामले पूरी तरह से आधार की तकनीकी गड़बड़ियों के चलते सर्वर पर अटके हैं। इसमें सबसे खराब स्थिति रायपुर ब्लॉक की है। यहां अकेले 23,795 विद्यार्थियों की आईडी बनना बाकी है, जो कुल पेंडिंग मामलों का आधे से ज्यादा हिस्सा है।

निजी और मदरसा स्कूलों के 3.18 लाख विद्यार्थी शामिल, वहां भी आ रही दिक्कतें..

यह योजना केवल सरकारी स्कूलों तक सीमित नहीं है, बल्कि निजी स्कूलों के विद्यार्थियों का डाटा भी इसी पोर्टल पर दर्ज होना है। एक अन्य सरकारी आंकड़े के मुताबिक, जिले में कुल 5 लाख 40 हजार 869 विद्यार्थी दर्ज हैं। इनमें से 3 लाख 18 हजार 604 बच्चे निजी और मदरसा स्कूलों में पढ़ते हैं। वहीं, सरकारी और अनुदान प्राप्त स्कूलों में 2 लाख 22 हजार 265 बच्चे पढ़ते हैं। अकेले शहर की बात करें तो 2 लाख 34 हजार 828 विद्यार्थी नामांकित हैं, जिनमें 1.73 लाख बच्चे निजी स्कूलों और मदरसों के हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार, निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का डाटा पोर्टल पर अपलोड करने में भी आधार एरर और नाम मिसमैच की बिल्कुल ऐसी ही दिक्कतें आ रही हैं।

1: 5 और 15 साल की उम्र में अपडेट न कराना पड़ा भारी..

दस्तावेजों की स्क्रूटनी में यह साफ हुआ है कि आधे से ज्यादा पेंडिंग मामलों में पैरेंट्स ने पिछले कई सालों से बच्चों का आधार अपडेट ही नहीं कराया है। नियम के तहत 5 साल और 15 साल की उम्र में बायोमेट्रिक अपडेट अनिवार्य है। ऐसा न होने के कारण अब सरकारी सर्वर बच्चों के डाटा को वेरिफाई करने से सीधे इनकार कर रहा है।

बिना आईडी अटक सकती हैं भविष्य की सरकारी योजनाएं..

अपार आईडी भविष्य में देश भर के विद्यार्थियों की सिंगल डिजिटल पहचान (वन नेशन वन स्टूडेंट आईडी) होगी। विभागीय अफसरों का कहना है कि अगर यह तय समय पर जनरेट नहीं होती है, तो आने वाले समय में बच्चों को स्कॉलरशिप, बोर्ड परीक्षा फॉर्म भरने और अन्य विभागीय योजनाओं का फायदा मिलने में तकनीकी अड़चन आ सकती है।

स्कूलों में ही कैंप लगाकर वेंडर करेंगे सुधार..

हर ब्लॉक में खुलने वाले नए आधार केंद्रों के लिए प्रशासन अलग से प्राइवेट वेंडर तय करने पर विचार कर रहा है। इसके लिए सीधे स्कूलों में ही पंचायत स्तर पर कैंप लगाए जा सकते हैं, ताकि बच्चों को क्लास छोड़कर किसी बाहरी चॉइस सेंटर के चक्कर न काटने पड़ें और काम जल्दी हो जाए।

शिक्षा विभाग इसी हफ्ते सभी ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों (BEO) और नोडल अफसरों की बैठक बुलाने जा रहा है। इसमें नए आधार केंद्रों की लोकेशन, मशीनों की व्यवस्था और ऑपरेटरों की ड्यूटी पर अंतिम फैसला होगा। सूत्रों के मुताबिक, पेंडिंग 38 हजार आईडी को क्लीयर करने के लिए विभाग 15 से 20 दिन की नई डेडलाइन भी तय कर सकता है। इसकी मॉनिटरिंग सीधे जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से की जाएगी।