तीन दिन का नया मेंटेनेंस भी बेअसर : 17 अक्टूबर तक सरकंडा से अशोक नगर तक कटी बिजली, 18 की रात फिर अंधेरा ; त्योहार से पहले सुधरे नहीं हालात..

बिलासपुर। शहर में त्योहारों से पहले बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने के नाम पर चल रही मेंटेनेंस की कवायद 18 अक्टूबर तक भी कागजी साबित हुई है। विभाग ने 15 से 17 अक्टूबर तक सरकंडा, चांटीडीह और अशोक नगर क्षेत्र में लगातार तीन दिन सुबह 10 बजे से दोपहर 2.30 बजे तक बिजली बंद रखकर मरम्मत का काम पूरा किया। इसके बावजूद 18 अक्टूबर को भी इन क्षेत्रों के उपभोक्ता ट्रिपिंग, लो वोल्टेज और केबल फाल्ट से जूझते रहे। इससे पहले सितंबर में भी 14 दिन तक 64 घंटे से ज्यादा बिजली बंद रखकर दावा किया गया था कि अब फाल्ट नहीं होंगे, लेकिन उसी दौरान 507 शिकायतें दर्ज हुईं। ताजा मेंटेनेंस के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं और अफसर वही पुराना दावा दोहरा रहे हैं।

बिजली कंपनी ने दशहरा और दिवाली के दौरान निर्बाध बिजली आपूर्ति के नाम पर 15 अक्टूबर को सरकंडा मुक्तिधाम क्षेत्र, 16 अक्टूबर को चांटीडीह और 17 अक्टूबर को अशोक नगर में बड़ा मेंटेनेंस अभियान चलाया। शेड्यूल के अनुसार हर रोज साढ़े चार घंटे बिजली काटी गई। विभाग का दावा था कि हाईटेंशन और एलटी लाइनों के पास पेड़ों की डालियां काट दी गई हैं, ढीले तारों को कसा गया है, खराब इंसुलेटर बदल दिए गए हैं और ट्रांसफॉर्मर में आयल लेवल जांचा गया है। लेकिन 17 अक्टूबर का काम खत्म होते ही 18 अक्टूबर को कई इलाकों में फिर से लाइनें ट्रिप होने लगीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि दिनभर की कटौती झेलने के बाद भी रात में सप्लाई बंद होने का सिलसिला थमा नहीं है।

सितंबर की नाकामी से नहीं लिया सबक, 14 दिन में 64 घंटे कटौती के बाद आई थीं 507 शिकायतें..

विभागीय रिकॉर्ड बताते हैं कि 1 से 14 सितंबर के बीच शहर के अलग अलग जोनों में 64 घंटे से अधिक समय तक बिजली बंद रखकर मेंटेनेंस किया गया था। हैरानी की बात यह रही कि जिन इलाकों में मेंटेनेंस के नाम पर सप्लाई रोकी गई, वहीं से सबसे ज्यादा शिकायतें आईं। इन चौदह दिनों में फ्यूज उड़ने, केबल फाल्ट और ट्रिपिंग की कुल 507 शिकायतें दर्ज हुईं। वसंत विहार सब स्टेशन से जुड़े करीब 15 मोहल्लों में सुबह 10.30 से दोपहर 2 बजे तक मेंटेनेंस हुआ और उसी रात 9 से 10 बजे के बीच मेन फ्यूज उड़ गया। गोलबाजार जोन के मसानगंज में मेंटेनेंस के दिन ही रात 10.40 बजे केबल फाल्ट से ढाई घंटे अंधेरा छाया रहा। आरके नगर और मोपका में तय शेड्यूल के अलावा भी चालीस मिनट से एक घंटे तक अतिरिक्त कटौती की गई।

अफसरों का दावा बड़े फाल्ट टलेंगे, ग्राउंड पर छोटे फाल्ट से ही लोग बेहाल..

लगातार सामने आ रही शिकायतों पर अधीक्षण यंत्री पीएल सिदार का कहना है कि त्योहारों में निर्बाध सप्लाई के लिए मेंटेनेंस जरूरी है और इससे बड़े फाल्ट की आशंका कम होती है। कुछ जगहों पर तकनीकी कारणों से सप्लाई बंद हुई होगी। हालांकि जमीनी हकीकत यह है कि मेंटेनेंस के तुरंत बाद केबल जलने और फ्यूज उड़ने की घटनाएं यह साफ कर रही हैं कि मेंटेनेंस के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है और ठेकेदारों के काम की कोई ठोस जांच नहीं की जा रही है।

15 से 17 अक्टूबर का नया रिपोर्ट कार्ड..

विभाग ने तीन दिन तक सरकंडा मुक्तिधाम, चांटीडीह और अशोक नगर में हर दिन साढ़े चार घंटे बिजली बंद रखी। काम पूरा होने का दावा 17 अक्टूबर की शाम को किया गया, लेकिन 18 अक्टूबर को भी लोड बढ़ते ही कई जगहों पर ट्रिपिंग शुरू हो गई। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब उपकरण बदले गए तो फिर फॉल्ट क्यों आ रहे हैं।

सितंबर से अक्टूबर तक का गणित..

सितंबर के पहले 14 दिनों में 64 घंटे बिजली काटी गई और 507 शिकायतें आईं। इसके बाद अक्टूबर में फिर तीन दिन लगातार कटौती हुई। यानी डेढ़ महीने के भीतर शहर के बड़े हिस्से में 75 घंटे से ज्यादा कटौती झेलने के बाद भी लो वोल्टेज और केबल फॉल्ट की समस्या खत्म नहीं हुई।

जांच के दायरे में मेंटेनेंस का खर्च..

हर साल त्योहार से पहले मेंटेनेंस के नाम पर लाखों रुपये का बजट खर्च किया जाता है। इंसुलेटर बदलने, तार कसने और ट्रांसफॉर्मर जांचने के लिए टेंडर जारी होते हैं। इसके बावजूद अगर मेंटेनेंस के चंद घंटों बाद ही केबल फाल्ट आ रहे हैं, तो इससे स्पष्ट है कि फील्ड में सामग्री की गुणवत्ता और कर्मचारियों के काम का कोई भौतिक सत्यापन नहीं हो रहा है।